2200 KM की रफ्तार, 50,000 फीट तक उड़ने की क्षमता; कितना घातक है तेजस लड़ाकू विमान? जानें इसकी खासियत

    Tejas Jet Crash in Dubai: दुबई में शुक्रवार को एयर शो के दौरान भारतीय स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस के क्रैश होने की खबर ने सभी को चौंका दिया. यह हादसा उस समय हुआ जब एयर शो में फाइटर जेट्स की प्रदर्शनी चल रही थी.

    tejas fighter jet crash dubai air show tejas price cost features height weight
    प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

    Tejas Jet Crash in Dubai: दुबई में शुक्रवार को एयर शो के दौरान भारतीय स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस के क्रैश होने की खबर ने सभी को चौंका दिया. यह हादसा उस समय हुआ जब एयर शो में फाइटर जेट्स की प्रदर्शनी चल रही थी. भारतीय वायुसेना ने इस घटना के बाद एक कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का गठन कर दिया है, ताकि घटना के कारणों का पता लगाया जा सके. हालांकि इस दुर्घटना से पहले, तेजस लड़ाकू विमान भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम रहा है. आइए जानते हैं इस विमान की खासियतें, भारत की रक्षा में इसका महत्व, और भविष्य की योजनाएं क्या हैं.

    तेजस लड़ाकू विमान की प्रमुख विशेषताएं

    तेजस मार्क-1ए भारत का सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान है, जो फिलहाल भारतीय वायुसेना में सेवा में है. यह एक लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) है, यानी हल्का और अत्यधिक तेज उड़ने वाला विमान. तेजस को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा डिज़ाइन और निर्मित किया गया है. वर्तमान में एचएएल तेजस के मार्क-2 संस्करण पर काम कर रही है, जो अगले कुछ सालों में और भी बेहतर तकनीक के साथ आएगा.

    तेजस की गति 2200 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, और यह लगभग 9 टन वजन तक के हथियार ले जाने में सक्षम है. इस विमान में बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट, और दूरवर्ती मिसाइलों जैसे आई-डर्बी ER और अस्त्र BVR से लैस किया गया है, जो इसे और भी शक्तिशाली बनाते हैं. तेजस की खासियत यह है कि यह एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बना सकता है, जो इसे खासतौर पर युद्ध परिस्थितियों में बेहद प्रभावी बनाता है. यह 50,000 फीट ऊंचाई तक उड़ सकता है. इसके हार्ड प्वाइंट्स की संख्या 9 है.

    भारत का पहला स्वदेशी लड़ाकू विमान

    तेजस भारत का पहला स्वदेशी लड़ाकू विमान है. हालांकि इसके इंजन अभी तक विदेश से मंगाए जाते हैं, खासकर अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक्स से, लेकिन भारत के लिए यह एक बड़ा कदम है क्योंकि यह देश को अपने लड़ाकू विमान निर्माण में आत्मनिर्भर बना सकता है. तेजस को बनाने में एल्युमिनियम, लिथियम एलॉय, टाइटेनियम, और कार्बन फाइबर कॉम्पोजिट मैटेरियल्स का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे हल्का और मजबूत बनाते हैं. यह सुपरसोनिक विमान सबसे छोटे और हल्के विमानों में से एक है, जो हवा की गति से तेज उड़ान भर सकता है.

    हथियार और आर्मामेंट्स

    तेजस में बहुत प्रभावी और अत्याधुनिक हथियार सिस्टम लगाए गए हैं. इसमें आई-डर्बी ER, अस्त्र BVR और आर-73, पायथन-5, और ASRAAM जैसे हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें लगाई गई हैं. इसके अलावा, तेजस में एक 23 मिमी की ग्रायाजेव-शिपुनोव (GSH-23) ट्विन बैरल तोप भी शामिल है, जो इसे और भी ताकतवर बनाती है. यह हथियार सिस्टम तेजस को किसी भी युद्ध में प्रभावी बनाने के लिए सक्षम हैं.

    भारतीय वायुसेना के लिए अहमियत

    तेजस को लेकर भारतीय वायुसेना में लंबे समय से उत्साह था. भारतीय वायुसेना के लिए यह विमान रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. तेजस को बनाने की शुरुआत 1983 में हुई थी और इसे 1994 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था. हालांकि, कुछ तकनीकी समस्याओं और आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों के कारण यह परियोजना काफी समय तक स्थगित रही. आज के समय में भारतीय वायुसेना में तेजस के दो स्क्वॉड्रन (लगभग 38 विमान) सेवा में हैं, लेकिन इसके मार्क-1 संस्करण में कुछ कमियां थीं, जिन्हें मार्क-1A संस्करण में सुधारा जा रहा है.

    भविष्य की योजनाएं: भारत की रक्षा में तेजस की भूमिका

    भारत सरकार ने फरवरी 2021 में तेजस Mk-1A के निर्माण के लिए एचएएल के साथ एक बड़ा अनुबंध किया था. इस अनुबंध के तहत 97 तेजस विमान बनाए जाने हैं, जिनकी आपूर्ति 2027-2028 के बीच पूरी होगी. 62,370 करोड़ रुपये के इस सौदे से भारतीय वायुसेना को 68 सिंगल सीटर और 29 ट्विन सीटर तेजस विमान मिलेंगे. यह सौदा भारत की रक्षा क्षमता को और मजबूत करेगा और बढ़ते सामरिक तनाव के बीच देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा.

    तेजस के उत्पादन में देरी: क्या कारण हैं?

    हालांकि तेजस Mk-1A का उत्पादन शुरू हो चुका था, लेकिन अभी तक 2025 के मध्य तक किसी भी तेजस Mk-1A विमान की डिलीवरी नहीं हुई है. इसे लेकर कुछ तकनीकी सुधारों की आवश्यकता बताई जा रही है. भारतीय वायुसेना की योजना के अनुसार, पहला तेजस Mk-1A मार्च 2024 तक भारतीय वायुसेना में शामिल होना था, लेकिन अब इसकी आपूर्ति 2025 तक हो सकती है. इससे यह स्पष्ट होता है कि तेजस के अगले संस्करण पर काम और सुधार की प्रक्रिया चल रही है.

    ये भी पढ़ें: कितनी है लड़ाकू विमान तेजस की कीमत, कौन-सी कंपनी बनाती है ये फाइटर जेट, सेना के साथ कितने का है सौदा?