Apple CCI Case: दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में Competition Commission of India (CCI) और केंद्र सरकार से यह सवाल उठाया है कि कंपनियों पर जुर्माना क्यों उनकी वैश्विक कमाई (Global Turnover) के आधार पर लगाया जाना चाहिए, जबकि उनके भारतीय कारोबार की कमाई भी जुर्माने की गणना के लिए पर्याप्त हो सकती है.
दरअसल, भारत के Competition Act, 2002 में हाल ही में बदलाव किए गए हैं, जिनमें यह प्रावधान जोड़ा गया कि यदि कोई बड़ी कंपनी प्रतिस्पर्धा नियमों का उल्लंघन करती है, तो उस पर लगने वाला जुर्माना उसकी वैश्विक कमाई के आधार पर तय किया जा सकता है, सिर्फ भारत में की गई कमाई पर नहीं.
इस नए नियम को लेकर Apple Inc. ने सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है. कंपनी का दावा है कि अगर CCI उन्हें दोषी पाता है, तो वैश्विक कमाई पर आधारित जुर्माना उनकी वित्तीय स्थिति पर बहुत बड़ा बोझ डाल सकता है.
Apple पर CCI की जांच और वित्तीय दस्तावेजों की मांग
CCI Apple की App Store पेमेंट पॉलिसी की जांच कर रहा है. इस जांच की शुरुआत 2021-22 में दर्ज शिकायतों के आधार पर हुई थी. शिकायतकर्ताओं में कुछ एनजीओ, भारतीय स्टार्टअप्स और Match Group शामिल थे. उनका आरोप है कि Apple अपने इन-ऐप पेमेंट सिस्टम और 30% तक कमीशन के जरिए App Store पर प्रभुत्व का दुरुपयोग कर रहा है.
CCI ने प्रारंभिक जांच में यह संकेत पाया कि Apple ने प्रतिस्पर्धा नियमों का उल्लंघन किया है, लेकिन कंपनी ने इसे खारिज कर दिया. इसके बाद CCI ने Apple से 8 दिसंबर तक वित्तीय स्टेटमेंट जमा करने को कहा था. हाई कोर्ट ने इस वित्तीय दस्तावेज की मांग पर फिलहाल कोई रोक या आदेश नहीं दिया है.
अदालत ने Apple को राहत नहीं दी
दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस चरण में Apple की अपील पर कोई फैसला या सुरक्षा नहीं दे रही है. कोर्ट ने सरकार और CCI से एक सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है कि ग्लोबल टर्नओवर आधारित जुर्माने का तर्क क्या है.
अदालत ने Apple के यह दावे भी फिलहाल नहीं सुने कि वैश्विक बिक्री पर आधारित जुर्माना भारत में सीमित व्यवसाय के लिए अनुचित है. कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में किसी भी निर्णय को जल्दी नहीं करना चाहती और फिलहाल केवल तथ्यों और दलीलों की समीक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रही है.
जुर्माने की राशि कितनी हो सकती है?
Apple पर लगने वाला जुर्माना अनुमानित रूप से 38 अरब डॉलर तक जा सकता है. कंपनी का कहना है कि Competition Act में हालिया संशोधन और 2024 में जारी किए गए Monetary Penalty Guidelines के तहत औसत ग्लोबल टर्नओवर का 10% तक जुर्माना लगाया जा सकता है.
Apple का मुख्य तर्क है कि भारत में केवल App Store और इन-ऐप भुगतान गतिविधि हुई है, इसलिए पूरी दुनिया की कमाई को आधार बनाना अनुचित और असंगत है. कंपनी ने यह भी कहा कि इस नियम का प्रभाव पिछले वर्षों की कमाई पर भी पड़ सकता है, जिसे वह न्यायसंगत नहीं मानती.
Apple ने इस मामले में 2017 के Supreme Court के Excel Crop Care फैसले का हवाला भी दिया, जिसमें यह तय किया गया था कि जुर्माने की गणना संबंधित कारोबार के टर्नओवर के आधार पर होनी चाहिए.
भारत में इस केस का महत्व
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे तय होगा कि भारत भविष्य में Google, Meta, Apple जैसी बड़ी टेक कंपनियों पर कैसे जुर्माना लगाएगा. अदालत का फैसला यह स्पष्ट करेगा कि जुर्माना केवल भारत में हुई कमाई पर आधारित होगा, या जुर्माना पूरी वैश्विक कमाई पर लगाया जा सकता है. इस फैसले का प्रभाव न सिर्फ Apple पर बल्कि सभी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भारत में प्रतिस्पर्धा कानून की व्याख्या और लागू करने के तरीके पर पड़ेगा.
अगली सुनवाई और प्रक्रिया
अगली सुनवाई 16 दिसंबर को निर्धारित की गई है. इस दौरान कोर्ट सरकार और CCI से ग्लोबल टर्नओवर आधारित जुर्माने के तर्क पर विस्तृत जवाब मांगेगी और Apple की अपील पर भी सुनवाई करेगी.
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