मुंबई: एशिया कप का खिताब अपने नाम करने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम सोमवार रात मुंबई एयरपोर्ट पर उतरी, जहाँ उन्हें जबरदस्त स्वागत मिला. हजारों प्रशंसक, रंग-बिरंगे पोस्टर और उत्साहभरी आवाज़ों के बीच टीम का जश्न जैसा अभिनंदन हुआ. मीडिया और समर्थक दोनों ही इस ऐतिहासिक पल को यादगार बनाना चाहते थे.
स्वागत समारोह के दौरान कप्तान सूर्यकुमार यादव ने कहा कि पाकिस्तान को इस जीत से जवाब देना जरूरी था. यह सिर्फ एक मुकाबला नहीं था, बल्कि आत्मबल और सम्मान की लड़ाई भी थी.
कप्तान और कोच का भावनात्मक रिश्ता
सूर्या ने यह भी बताया कि उनके और कोच गौतम गंभीर के बीच रिश्ता भाई जैसा है. उन्होंने कहा, "गंभीर भाई जो भी इशारा करते हैं, मैं बिना सोचे वही करता हूं. हमारे बीच विश्वास का स्तर बहुत ऊँचा है."
35 वर्ष के सूर्या ने कहा कि इस जुड़ाव की शुरुआत 2012 से है, जब गंभीर ने कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) को अपना पहला आईपीएल खिताब दिलाया था. उस वक्त सूर्या KKR की टीम के उपकप्तान थे और उन्होंने गंभीर से बहुत-कुछ सीखा.
सपोर्टिंग वेबसाइट रैव स्पोर्ट्स के बोरिया मजूमदार से बातचीत में सूर्या ने कहा, "हमने एक-दूसरे को करीब से जाना है. गंभीर ने खिलाड़ी के मानसिक पक्ष, दबाव में फैसले लेना, रणनीति समझने की कला सिखाई है."
ट्रॉफी विवाद और अन्य प्रश्नों के जवाब
जब उनसे ट्रॉफी विवाद के बारे में पूछा गया, तो सूर्या ने कहा कि वह इसे “विवाद” नहीं मानते. उन्होंने कहा कि मौलिक ट्रॉफी केवल एक भौतिक रूप से नहीं होती. वह टीम, सपोर्ट स्टाफ, संघर्ष और लोगों के भरोसे की जीत है.
उन्होंने आगे कहा, "लोग ट्रॉफी की तस्वीरें कहीं भी पोस्ट करते हैं, लेकिन असली ट्रॉफी वही है जिसे हमने एक-दूसरे के बीच और जनता के बीच अर्जित किया है."
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हार्दिक पांड्या फाइनल में उपलब्ध नहीं थे. "मैच से पहले खुद हार्दिक ने कहा था कि अगर मैं नहीं खेल पाऊँ तो शिवम दुबे को खेलाना चाहिए, क्योंकि वह पेस ऑलराउंडर हैं."
जीत का अहसास और टीम भावना
सूर्या ने कहा कि पाकिस्तान पर मिली इस जीत का अहसास बहुत ही शानदार था. उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट को अजेय (अद्वितीय) तरीके से जीतने का अनुभव देश और टीम दोनों के लिए गर्व की बात है.
उन्होंने कहा, "हम कल रात मुंबई में अकेले नहीं आए; टीम ने साथ मिलकर जश्न मनाया, बातचीत की, मज़ा किया… बहुत ही यादगार रही वह रात."
ये भी पढ़ें- अफगानिस्तान में इंटरनेट सर्विस बंद, मोबाइल नेटवर्क भी ठप, तालिबान ने क्यों लिया यह फैसला?