मॉस्को से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने पर मंथन, पुतिन पर प्रेशर बनाने की चल रही तैयारी!

यूक्रेन युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा और इस बीच G7 देशों ने रूस पर नए सिरे से आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति पर विचार-विमर्श तेज कर दिया है. कनाडा के वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान में जानकारी दी गई है कि G7 देशों के वित्त मंत्रियों की हाल ही में एक अहम बैठक हुई.

tariff on country who will buy oil from moscow
Image Source: ANI

यूक्रेन युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा और इस बीच G7 देशों ने रूस पर नए सिरे से आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति पर विचार-विमर्श तेज कर दिया है. कनाडा के वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान में जानकारी दी गई है कि G7 देशों के वित्त मंत्रियों की हाल ही में एक अहम बैठक हुई, जिसमें रूस के सहयोगी देशों पर टैरिफ जैसे कड़े व्यापारिक उपायों की संभावना पर गंभीर चर्चा की गई.

बात सिर्फ रूस तक सीमित नहीं रही बैठक में उन देशों पर भी टैरिफ लगाने की बात की गई जो किसी भी रूप में रूस की युद्ध नीति को ताकत दे रहे हैं, खासतौर पर यूक्रेन पर हो रहे हमलों में परोक्ष सहयोग दे रहे देशों पर.

अमेरिका ने चीन और भारत को घेरा

बैठक का केंद्र बिंदु भले ही रूस रहा हो, लेकिन अमेरिका ने मौके का फायदा उठाते हुए चीन और भारत को भी कटघरे में खड़ा कर दिया. अमेरिकी वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इन दोनों देशों द्वारा रूस से तेल की खरीद पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन दे रही है, जिससे यूक्रेनी नागरिकों की बेवजह मौतें हो रही हैं. अमेरिका की मांग है कि इन देशों पर भी भारी टैरिफ लगाया जाए, ताकि रूस को परोक्ष समर्थन देने वाले देशों की आर्थिक गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सके.

ट्रंप की टिप्पणी: “भारत पर टैरिफ लगाना आसान नहीं”

इसी बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान भारत को लेकर एक साफ और कूटनीतिक दृष्टिकोण पेश किया.
उन्होंने कहा, “भारत रूस से तेल खरीदने वाला सबसे बड़ा देश रहा है. मैंने अपने कार्यकाल में उस पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, लेकिन यह आसान नहीं था. इससे भारत-अमेरिका के रिश्तों में तनाव आ सकता था.” ट्रंप की इस टिप्पणी से साफ है कि भारत के साथ अमेरिका के आर्थिक संबंध इतने गहरे हैं कि कोई भी कठोर कदम उठाने से पहले राजनयिक समीकरणों को ध्यान में रखना जरूरी है.

क्या भारत पर टैरिफ लगाएगा G7?

हालांकि, G7 की इस बैठक में भारत का नाम सीधे तौर पर किसी प्रस्ताव में शामिल नहीं किया गया है, लेकिन अमेरिका की तरफ से दी गई कड़ी भाषा यह इशारा जरूर करती है कि आने वाले समय में भारत पर भी कुछ प्रकार का आर्थिक दबाव बनाया जा सकता है. भारत फिलहाल रूस से डिस्काउंट रेट पर कच्चा तेल खरीद रहा है, जिससे घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए रखने में मदद मिल रही है. लेकिन पश्चिमी देश इसे रूस को आर्थिक सहारा देने के रूप में देख रहे हैं.

यह भी पढ़ें: 2027 में SCO समिट की मेजबानी करेगा पाकिस्तान, अभी से तैयारियां शुरू करने लगा आतंकिस्तान!