Russia Taliban Deal: अफगानिस्तान और रूस के बीच हाल ही में हुए रक्षा सहयोग समझौते को लेकर नई जानकारी सामने आई है. अफगानिस्तान मामलों के लिए रूस के विशेष दूत जमीर काबुलोव ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल मॉस्को तालिबान को नए हथियार उपलब्ध नहीं कराएगा. रूस का मौजूदा फोकस उन पुराने सैन्य उपकरणों और हथियारों की मरम्मत पर रहेगा, जो पहले से अफगानिस्तान के पास मौजूद हैं.
30 मई को मॉस्को में रूस और तालिबान के बीच हुए रक्षा समझौते के बाद यह पहला आधिकारिक संकेत माना जा रहा है कि दोनों पक्ष सैन्य सहयोग को किस दिशा में आगे बढ़ाना चाहते हैं.
पुराने हथियारों को फिर से सक्रिय बनाने की तैयारी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जमीर काबुलोव ने कहा कि वर्तमान चरण में रूस का उद्देश्य सोवियत दौर के हथियारों को दोबारा उपयोग के योग्य बनाना है. हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में नए हथियारों की आपूर्ति पर विचार किया जा सकता है, लेकिन अभी प्राथमिकता पुराने सैन्य संसाधनों की मरम्मत और रखरखाव है.
तालिबान के पास कैसे पहुंचे सोवियत हथियार?
अफगानिस्तान में सोवियत संघ की सैन्य मौजूदगी 1979 से 1989 तक रही थी. सोवियत सेना की वापसी के बाद बड़ी मात्रा में रूसी सैन्य उपकरण और हथियार अफगानिस्तान में ही रह गए थे. बाद के वर्षों में सत्ता परिवर्तन और संघर्षों के दौरान ये हथियार विभिन्न समूहों के हाथों में पहुंचे और अंततः तालिबान के नियंत्रण में आ गए.
2001 में अमेरिका के नेतृत्व में सैन्य कार्रवाई के बाद अफगानिस्तान में नई सरकार बनी और सुरक्षा बलों को आधुनिक हथियार दिए गए. लेकिन 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद बड़ी मात्रा में पुराने और नए दोनों तरह के हथियार उसके नियंत्रण में आ गए.
तालिबान के पास कौन-कौन से हथियार मौजूद हैं?
रूसी अधिकारियों के अनुसार, तालिबान के रक्षा मंत्रालय के पास इस समय कई सोवियत कालीन सैन्य उपकरण मौजूद हैं. इनमें T-55 और T-62 टैंक, BMP-1 और BMP-2 बख्तरबंद वाहन, Mi-17 और Mi-24 हेलिकॉप्टर शामिल हैं. इसके अलावा बड़ी संख्या में PKM मशीन गनें भी उनके पास हैं.
इनके साथ ही सोवियत दौर की तोपें, कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल प्रणालियां और कुछ पुराने एयर डिफेंस सिस्टम भी अफगानिस्तान के सैन्य भंडार का हिस्सा हैं. हालांकि लंबे समय से रखरखाव नहीं होने के कारण इनमें से कई उपकरण पूरी तरह संचालन योग्य नहीं हैं.
रक्षा क्षमताएं बढ़ाने पर तालिबान का जोर
तालिबान प्रशासन लगातार अपनी सैन्य ताकत को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है. रूस यात्रा से लौटने के बाद तालिबान के रक्षा मंत्री ने कहा कि अफगानिस्तान ऐसी रक्षा व्यवस्था विकसित करने की कोशिश कर रहा है जिससे किसी भी देश को उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने का साहस न हो.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस पुराने सैन्य उपकरणों को फिर से सक्रिय बनाने में सफल रहता है, तो इससे अफगानिस्तान की रक्षा क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है और तालिबान की सैन्य स्थिति पहले से अधिक मजबूत हो सकती है.
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