अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद ने एक बार फिर उग्र रूप ले लिया है. हाल ही में दोनों देशों के बीच हुई सैन्य झड़पों और आरोप-प्रत्यारोपों के बाद, अब अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने पाकिस्तान को सीधे तौर पर सख्त चेतावनी दी है.
तालिबान के उप-गृहमंत्री मावलवी मुहम्मद नबी ओमारी ने सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान की सैन्य और राजनीतिक नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि यदि पाकिस्तान की सेना को "आक्रमणकारी" घोषित किया गया, तो अफगानी राष्ट्र उन्हें भारतीय सीमा तक खदेड़ने से भी पीछे नहीं हटेगा. उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान की नीतियाँ स्वतंत्र नहीं हैं, बल्कि वह बाहरी शक्तियों के निर्देशों पर चलती है.
बढ़ता तनाव: हालिया घटनाक्रम
बीते कुछ दिनों में अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें दोनों देशों के सैनिकों और आम नागरिकों की मौत की खबरें सामने आई हैं. विशेष रूप से कंधार और बलूचिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में गोलीबारी की घटनाओं ने हालात को और बिगाड़ दिया.
काबुल का आरोप है कि पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच हुए 48 घंटे के संघर्षविराम (सीजफायर) का उल्लंघन किया. यह युद्धविराम एक सप्ताह से चल रही हिंसा को रोकने के लिए लागू किया गया था, लेकिन सीमा पार फायरिंग की घटनाएं जारी रहीं.
दोहा बैठक: मध्यस्थता से हुआ समझौता
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, कतर के विदेश मंत्रालय ने दोहा में एक आपात बैठक का आयोजन किया. इस बैठक में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और तत्काल युद्धविराम लागू करने पर सहमति व्यक्त की. यह समझौता एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, हालांकि जमीनी हकीकत में बदलाव अभी बाकी है. आगे की बातचीत के लिए एक नई बैठक इस्तांबुल में आयोजित की जाएगी, जिसमें दीर्घकालिक समाधान पर चर्चा की जाएगी.
डूरंड रेखा फिर बना विवाद का केंद्र
तालिबान नेता ओमारी ने अपने बयान में डूरंड रेखा का भी जिक्र किया, यह वह सीमा रेखा है जिसे ब्रिटिश काल में तय किया गया था और जिसे अफगानिस्तान आज भी औपचारिक रूप से मान्यता नहीं देता. ओमारी ने संकेत दिया कि यह समय अफगानिस्तान के ऐतिहासिक क्षेत्रों को वापस लेने का है, जो उन्होंने कहा, "कभी खो दिए गए थे."
इस्लामाबाद की नीतियाँ स्वतंत्र नहीं
ओमारी ने पाकिस्तान की सरकार और सेना पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इस्लामाबाद की नीतियाँ स्वतंत्र नहीं हैं. उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का एक वीडियो भी उद्धृत किया जिसमें वह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से चापलूसी भरे अंदाज़ में बात कर रहे थे. तालिबान नेता ने इसे पाकिस्तान की परतंत्र विदेश नीति का प्रतीक बताया.
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