ईरान संग टकराना अमेरिका को पड़ा महंगा, 3 हफ्तों में 26 हजार करोड़ का नुकसान, पेंटागन में हड़कंप

Iran US War: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने दिखा दिया है कि युद्ध कितने विनाशकारी हो सकते हैं. सिर्फ 21 दिनों के अंदर ही अमेरिका को बड़ा आर्थिक झटका लगा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दौरान अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को करीब 1.4 से 2.9 अरब डॉलर तक का नुकसान हुआ है.

Takrina with Iran cost America dearly loss of Rs 26 thousand crore in 3 weeks panic in Pentagon
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Iran US War: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने दिखा दिया है कि युद्ध कितने विनाशकारी हो सकते हैं. सिर्फ 21 दिनों के अंदर ही अमेरिका को बड़ा आर्थिक झटका लगा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दौरान अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को करीब 1.4 से 2.9 अरब डॉलर तक का नुकसान हुआ है. यह नुकसान बताता है कि यह लड़ाई सिर्फ ताकत की नहीं, बल्कि आर्थिक दबाव की भी है.

ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमलों ने पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों की सटीकता ने अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है. हालात को देखते हुए पेंटागन अब अतिरिक्त बजट की मांग करने की तैयारी में है, ताकि नुकसान की भरपाई की जा सके.

लड़ाकू विमानों को बड़ा झटका

इस संघर्ष में अमेरिका को सबसे ज्यादा नुकसान उसके महंगे लड़ाकू विमानों के रूप में हुआ है. एक घटना में गलती से सहयोगी देश कुवैत के F/A-18 विमान ने अमेरिका के तीन F-15E स्ट्राइक ईगल जेट गिरा दिए. इन विमानों की कीमत बहुत ज्यादा होती है, जिससे आर्थिक नुकसान और बढ़ गया.

इसके अलावा एक आधुनिक F-35A फाइटर जेट को भी आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी. ईरान ने दावा किया कि यह उसके हमले का असर था. हालांकि इस तरह की घटनाओं ने अमेरिका की एयर पावर को बड़ा झटका दिया है.

टैंकर और ड्रोन भी हुए तबाह

हवाई युद्ध में टैंकर विमानों की भूमिका बहुत अहम होती है, क्योंकि ये फाइटर जेट्स को हवा में ही ईंधन देते हैं. लेकिन इस बार ये भी सुरक्षित नहीं रहे. इराक के ऊपर एक KC-135 टैंकर विमान हादसे का शिकार हो गया, जिसमें कई सैनिकों की जान चली गई.

इसके साथ ही सऊदी अरब में मिसाइल हमलों के कारण कई टैंकर विमानों को नुकसान पहुंचा. अमेरिका के कई MQ-9 रीपर ड्रोन भी नष्ट हो गए, जो निगरानी के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं.

रडार सिस्टम और बेस को नुकसान

हमलों का असर सिर्फ विमानों तक ही सीमित नहीं रहा. जॉर्डन में तैनात THAAD सिस्टम का अहम रडार भी हमले में क्षतिग्रस्त हो गया. वहीं कतर के अल-उदीद एयर बेस पर मौजूद एक महंगा रडार सिस्टम भी नुकसान की चपेट में आ गया. इससे अमेरिका की निगरानी और रक्षा क्षमता पर असर पड़ा है.

समुद्र में भी बढ़ीं मुश्किलें

समंदर में भी अमेरिका को परेशानी का सामना करना पड़ा. उसका सबसे आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford अचानक आग की चपेट में आ गया. इस वजह से जहाज को मरम्मत के लिए बंदरगाह पर ले जाना पड़ा, जिससे उसकी तैनाती पर असर पड़ा.

जमीनी युद्ध से पहले ही बड़ा असर

सबसे अहम बात यह है कि यह नुकसान उस समय हुआ है जब पूरी तरह से जमीनी युद्ध अभी शुरू भी नहीं हुआ है. सिर्फ कुछ हफ्तों के हमलों ने ही अमेरिका के सैन्य संसाधनों और बजट पर बड़ा दबाव डाल दिया है. यह साफ दिखाता है कि आधुनिक युद्ध कितने महंगे और नुकसानदेह हो सकते हैं.

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