Balochistan Pakistan Army Faisal Naseer: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पाकिस्तानी सेना ने अपनी रणनीति तेज कर दी है. इसी कड़ी में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के पूर्व अधिकारी और अब राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक प्राधिकरण यानी एनएसीटीए के प्रमुख बनाए गए मेजर जनरल फैसल नसीर बलूचिस्तान पहुंचे हैं.
फैसल नसीर ने बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती और विवादित कबायली नेता शफीक उर रहमान मेंगल से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद विवाद खड़ा हो गया है. बलूच मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि मेंगल का संबंध उन स्थानीय हथियारबंद गुटों से रहा है, जिन्हें बलूच राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं के खिलाफ इस्तेमाल किए जाने का दावा किया जाता है.
असीम मुनीर के दौरे के बाद बढ़ी हलचल
पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर ने भी हाल ही में बलूचिस्तान का दौरा किया था. इस इलाके में पिछले कुछ समय से पाकिस्तानी सुरक्षाबलों और बलूच विद्रोहियों के बीच लगातार संघर्ष देखने को मिला है.
रिपोर्टों के मुताबिक, अब बलूचिस्तान में विद्रोह से निपटने की जिम्मेदारी फैसल नसीर को दी गई है. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान उन्हें ‘डर्टी हैरी’ कहकर निशाना बनाते रहे हैं.
बलूच मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि शफीक उर रहमान मेंगल से जुड़े नेटवर्क को बलूचिस्तान में ‘डेथ स्क्वाड’ के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है. इन संगठनों ने उस पर बलूच राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया है.
मेंगल पर पहले भी लगते रहे हैं गंभीर आरोप
मेंगल का नाम ‘मुसल्लाह दिफा तंजीम’ से जोड़ा जाता रहा है. इस संगठन पर बलूच राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं. दक्षिण एशिया आतंकवाद पोर्टल की 2026 की रिपोर्ट में भी मेंगल के नेटवर्क को बलूचिस्तान में सक्रिय प्रमुख ‘डेथ स्क्वाड’ नेटवर्क में शामिल किए जाने का दावा किया गया है. मेंगल के खिलाफ पहले भी आपराधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आती रही है.
बलूचिस्तान सरकार ने 2014 में मेंगल और करीब 100 अन्य लोगों के खिलाफ आठ लोगों की हत्या के मामले में केस दर्ज किया था. इसके अलावा उस पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, इस्लामिक स्टेट और लश्कर-ए-झांगवी जैसे संगठनों को मदद या पनाह देने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं.
एनएसीटीए में भी सेना का बढ़ा प्रभाव
फैसल नसीर को तीन साल के लिए एनएसीटीए का राष्ट्रीय समन्वयक बनाए जाने के बाद भी सवाल उठ रहे हैं. उन्हें आईएसआई से एनएसीटीए में भेजा गया है. इससे पहले वह आईएसआई की घरेलू शाखा के प्रमुख थे, जिसके पास देश के अंदर सुरक्षा और संवेदनशील मामलों की जिम्मेदारी होती है.
इमरान खान लंबे समय से फैसल नसीर पर अपने खिलाफ साजिश में शामिल होने के आरोप लगाते रहे हैं और उन्हें ‘डर्टी हैरी’ कहते रहे हैं. एनएसीटीए एक नागरिक आतंकवाद निरोधक संस्था है, लेकिन पाकिस्तान में सेना के अधिकारियों की तैनाती के कारण इस संस्था पर सैन्य प्रभाव बढ़ने की बात भी कही जाती रही है.
बलूच मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना बलूच विद्रोह को दबाने के लिए स्थानीय हथियारबंद गुटों के नेटवर्क का भी इस्तेमाल करती रही है. फैसल नसीर की बलूचिस्तान में नई भूमिका के बाद इन आरोपों और वहां की स्थिति को लेकर चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है.
ये भी पढ़ें- Delhi PG Building Collapse: दिल्ली PG हादसे में बड़ा एक्शन, फरार बिल्डिंग मालिक हरिराम गुप्ता गिरफ्तार