नई दिल्ली: नई उड़ान ट्रस्ट एवं विश्व मांगलय स्वनाथ परिषद के संयुक्त तत्वावधान में तथा गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय एवं महिला एवं बाल विकास विभाग, दिल्ली सरकार के सहयोग से ‘स्वनाथ सम्मेलन-2026 : अनाथ से स्वनाथ की ओर’ का भव्य आयोजन गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के ईस्ट दिल्ली कैंपस, सूरजमल विहार स्थित कन्वेंशन हॉल में किया गया. ‘हर बच्चे को स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और स्वावलंबन का अधिकार’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य बाल देखभाल संस्थानों में रह रहे तथा 18 वर्ष की आयु के बाद आफ्टर-केयर व्यवस्था में आने वाले युवाओं की चुनौतियों पर व्यापक चर्चा करना और उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल, रोजगार, कानूनी सहायता, सुरक्षा तथा आत्मनिर्भरता से जोड़ने के लिए एक प्रभावी सामाजिक सहयोग तंत्र विकसित करना रहा.
सम्मेलन में 2200 आफ्टर-केयर युवाओं ने सहभागिता की, जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग, दिल्ली सरकार तथा गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से जुड़े लगभग 600 से अधिक पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों सहित कुल 2800 से अधिक लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. सम्मेलन के प्रमुख विषयों में शिक्षा एवं संस्कार, मानसिक सहयोग एवं मार्गदर्शन, परिवार से जोड़ना, कौशल विकास एवं स्वावलंबन, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, रोजगार, कानूनी सहायता तथा 18 वर्ष के बाद आफ्टर-केयर व्यवस्था शामिल रहे.
तीन सत्रों में हुआ सम्मेलन
स्वनाथ सम्मेलन-2026 का आयोजन तीन प्रमुख सत्रों में किया गया. *प्रथम सत्र* का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ. दीप प्रज्वलन में केंद्रीय राज्य मंत्री एवं भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक प्रशांत हरतालकर, गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के कुलपति पद्मश्री प्रो. डॉ. महेश वर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग, दिल्ली सरकार की सचिव रश्मि सिंह, विश्व मांगलय सभा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बबीता मल्होत्रा, संगठन मंत्री डॉ. वृषाली जोशी, अनुराधा आशीष सूद, नेहा जोशी, अध्यक्ष, स्वनाथ परिषद दिल्ली सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने सहभागिता की.
प्रथम सत्र: संरक्षण से आगे शिक्षा, संस्कार और आत्मनिर्भरता की दिशा
प्रथम सत्र में वक्ताओं ने कहा कि किसी बच्चे का माता-पिता के संरक्षण से वंचित होना उसके जीवन की अंतिम पहचान नहीं हो सकती. बच्चों को केवल भोजन, आवास और सुरक्षा उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें शिक्षा, संस्कार, भावनात्मक सहयोग, कौशल, रोजगार, मार्गदर्शन और आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है. केंद्रीय राज्य मंत्री एवं भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि समाज की जिम्मेदारी केवल बच्चों को संरक्षण देने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. प्रत्येक बच्चे को आगे बढ़ने के लिए शिक्षा, अवसर और सही मार्गदर्शन मिलना जरूरी है. उन्होंने कहा कि बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें उचित मंच उपलब्ध कराया जाए, ताकि परिस्थितियां उनके सपनों के रास्ते में बाधा न बनें. उन्होंने ‘स्वनाथ’ की अवधारणा को बच्चों को सम्मान और अवसर से जोड़ने वाली सकारात्मक पहल बताया.
18 वर्ष संरक्षण का अंत नहीं, नए जीवन की शुरुआत
दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि 18 वर्ष की आयु किसी बच्चे के संरक्षण का अंत नहीं, बल्कि उसके नए जीवन की शुरुआत होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि आफ्टर-केयर युवाओं को बैंकिंग, वित्तीय साक्षरता, रोजगार, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, दस्तावेज प्रबंधन, जीवन कौशल और मेंटरशिप की जानकारी देना जरूरी है. बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक एवं भावनात्मक वेलनेस को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि कोई भी बच्चा 18 वर्ष की आयु के बाद स्वयं को अकेला महसूस न करे, इसके लिए सरकार, विश्वविद्यालय, सामाजिक संस्थाओं और समाज को मिलकर दीर्घकालिक व्यवस्था तैयार करनी होगी.
बच्चों के भविष्य के लिए समाज को आगे आना होगा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक प्रशांत हरतालकर ने कहा कि बच्चों का भविष्य केवल सरकारी योजनाओं से सुरक्षित नहीं हो सकता. समाज के सक्षम वर्ग को भी आगे आकर बच्चों की शिक्षा, संस्कार, मार्गदर्शन और आत्मनिर्भरता में योगदान देना होगा. उन्होंने बच्चों के प्रति संवेदनशील सामाजिक दृष्टिकोण विकसित करने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया.
शिक्षा आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव
गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के कुलपति पद्मश्री प्रो. डॉ. महेश वर्मा ने कहा कि शिक्षा बच्चों के भविष्य को मजबूत बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है. उच्च शिक्षा संस्थानों को ऐसे युवाओं के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण, करियर मार्गदर्शन और रोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में आगे आना चाहिए. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की सामाजिक जिम्मेदारी केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि जरूरतमंद बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना भी उसका महत्वपूर्ण हिस्सा है.
बाल संरक्षण से आत्मनिर्भरता तक बने मजबूत तंत्र
महिला एवं बाल विकास विभाग, दिल्ली सरकार की सचिव रश्मि सिंह, IAS ने अपने संबोधन में बाल अधिकारों, बाल संरक्षण तथा जरूरतमंद बच्चों तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, पोषण, भावनात्मक सहयोग और अपने व्यक्तित्व के विकास के समान अवसर मिलना उसका अधिकार है. उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य केवल बच्चों को तत्काल सुरक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, कौशल, मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग देकर आत्मनिर्भर एवं जिम्मेदार नागरिक बनाना होना चाहिए. इसके लिए सरकारी विभागों के साथ-साथ बाल देखभाल संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है.
रश्मि सिंह ने विशेष रूप से आफ्टर-केयर व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि बाल देखभाल संस्थानों से बाहर आने के बाद बच्चों के सामने शिक्षा, रोजगार, आवास, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्वास जैसी अनेक चुनौतियां होती हैं. ऐसे समय में उन्हें अकेला छोड़ने के बजाय एक मजबूत सहयोगात्मक तंत्र उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य का निर्माण कर सकें. उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे की परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए योजनाओं और सेवाओं को केवल सामान्य व्यवस्था के रूप में नहीं, बल्कि बच्चे की व्यक्तिगत आवश्यकता और परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए लागू किया जाना चाहिए. विभागीय अधिकारियों, फील्ड कार्यकर्ताओं और सामाजिक संस्थाओं के बीच बेहतर संवाद और समन्वय से ऐसे बच्चों की पहचान और उन्हें उचित सेवाओं से जोड़ने का कार्य और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है.
उन्होंने समाज से भी अपील की कि अनाथ एवं वंचित बच्चों को केवल सहानुभूति का पात्र न मानकर उन्हें सम्मान, अवसर और आत्मनिर्भरता का अधिकार दिया जाए. उन्होंने कहा कि जब कोई बच्चा शिक्षा और कौशल के माध्यम से अपने पैरों पर खड़ा होता है, तभी बाल संरक्षण की वास्तविक सफलता सुनिश्चित होती है. अंत में उन्होंने बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार, समाज और स्वयंसेवी संस्थाओं के सामूहिक प्रयासों से ही ऐसा मजबूत तंत्र विकसित किया जा सकता है, जिसमें कोई भी बच्चा संरक्षण, शिक्षा, अवसर और सम्मान से वंचित न रहे.
दूसरा सत्र: बाल अधिकार, कानूनी सुरक्षा, स्वास्थ्य और वित्तीय सुरक्षा पर मंथन
दूसरे सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता श्री बी.के. सिंह ने की. इस सत्र में महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल अधिकार, कानूनी सुरक्षा, स्वास्थ्य, बीमा, कॉरपोरेट एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने आफ्टर-केयर युवाओं के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और उनके समाधान पर विचार रखे.
इस सत्र में रश्मि सिंह, महिला एवं बाल विकास विभाग, दिल्ली सरकार; डॉ. संघमित्रा बारिक, निदेशक, SPNIWCD; डॉ. ओम प्रकाश व्यास, अध्यक्ष, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग; चंद्र सिंह दासपा, रीजनल मैनेजर, अंजलि देव अध्यक्ष विश्व मांगलय स्वनाथ परिषद, लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन से चंद्र सिंह दासपा, दिल्ली महिला एवं बाल विकास विभाग के डिप्टी डायरेक्टर एस. एम.अली, टेंपल ऑफ़ हीलिंग से डॉ पीयूष सक्सेना, किरण मोदी, चेयरपर्सन, उदेयन केयर; स्वनाथ अमृता करावन्दे, स्वनाथ पूजा, अश्वनी महाजन, M3M तथा श्री कृपा शंकर चौबे सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार रखे.
स्वनाथ युवाओं को मिले निःशुल्क कानूनी सलाह और सुरक्षा
दूसरे सत्र की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता बी.के. सिंह ने आफ्टर-केयर युवाओं के लिए कानूनी जागरूकता और सुरक्षा को महत्वपूर्ण विषय बताया. उन्होंने कहा कि अनेक युवा 18 वर्ष की आयु के बाद अपने कानूनी अधिकारों, दस्तावेजों, रोजगार संबंधी मामलों, किरायेदारी, बैंकिंग, अनुबंध और अन्य आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर कठिनाइयों का सामना करते हैं. उन्होंने ‘स्वनाथ सहायता केंद्र’ के माध्यम से जरूरतमंद स्वनाथ युवाओं को निःशुल्क कानूनी सलाह एवं आवश्यक कानूनी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की पहल का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि प्रयास होना चाहिए कि कोई भी युवा जानकारी या आर्थिक संसाधनों के अभाव में अपने कानूनी अधिकारों से वंचित न रहे. उन्होंने बच्चों एवं युवाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों में आवश्यक मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की.
योजनाओं का केंद्र हो बच्चे की वास्तविक जरूरत
स्वनाथ सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. संघमित्रा बारिक, IAS, अतिरिक्त निदेशक, राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान (महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार) ने बच्चों के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए संवेदनशील और आवश्यकता-आधारित व्यवस्था विकसित करने पर विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे की परिस्थितियां, अनुभव, पारिवारिक पृष्ठभूमि और आवश्यकताएं अलग-अलग होती हैं. इसलिए बच्चों के लिए बनाई जाने वाली किसी भी योजना का केंद्र केवल सरकारी प्रावधान नहीं, बल्कि बच्चे की वास्तविक जरूरत और उसका सुरक्षित एवं सम्मानजनक भविष्य होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि बच्चों के विकास को केवल शिक्षा तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता. उनके स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, मानसिक एवं भावनात्मक सहयोग, सामाजिक सुरक्षा, व्यक्तित्व विकास तथा कौशल विकास को एक-दूसरे से जोड़कर समग्र रूप से कार्य करने की आवश्यकता है. विशेष परिस्थितियों में जीवन जी रहे बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार किया जाना चाहिए, जहां उन्हें सुरक्षा के साथ-साथ अपनापन, मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त हों.
डॉ. बारिक ने इस बात पर भी बल दिया कि बच्चे की पहचान केवल उसकी वर्तमान परिस्थिति से नहीं, बल्कि उसकी क्षमताओं, सपनों और संभावनाओं से होनी चाहिए. विभागीय योजनाओं और संस्थागत प्रयासों में बच्चों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को समझते हुए उन्हें उचित परामर्श, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और भविष्य के लिए आवश्यक कौशल उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास होना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार, प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों और समाज के सामूहिक प्रयासों से ही बच्चों के लिए एक मजबूत और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है. प्रत्येक बच्चे को यह विश्वास दिलाना आवश्यक है कि वह समाज पर बोझ नहीं, बल्कि देश के भविष्य की महत्वपूर्ण शक्ति है.
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने बच्चों के हित में कार्य कर रही संस्थाओं और सभी सहयोगी व्यक्तियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का सबसे प्रभावी रास्ता उनकी जरूरतों को समझना, उनकी बात सुनना और उन्हें सम्मान के साथ अवसर प्रदान करना है.
बाल अधिकारों की जानकारी से ही सशक्त होंगे बच्चे
दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश व्यास ने बाल अधिकारों की जानकारी और उनके प्रभावी संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण, शिक्षा, सम्मान और अपनी बात रखने का अधिकार मिलना चाहिए. उन्होंने बाल संरक्षण से जुड़े विभागों और संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता बताई, ताकि जरूरतमंद बच्चे तक समय पर सहायता पहुंच सके.
LIC और सामाजिक संस्थाओं की भूमिका पर भी चर्चा
चंद्र सिंह दसपा, रीजनल मैनेजर, LIC ने आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की योजना से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की. वहीं किरण मोदी, चेयरपर्सन, उदेयन केयर ने आफ्टर-केयर युवाओं के लिए निरंतर मार्गदर्शन और सामाजिक सहयोग की आवश्यकता पर विचार रखे. स्वनाथ अमृता करावन्दे, स्वनाथ पूजा, अश्वनी महाजन, M3M तथा कृपा शंकर चौबे सहित अन्य वक्ताओं ने भी युवाओं को रोजगार, कौशल, शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के लिए संस्थागत एवं सामाजिक सहयोग की आवश्यकता पर अपने विचार रखे.
तीसरा सत्र: आफ्टर-केयर युवाओं के लिए ठोस व्यवस्था की दिशा में ऐतिहासिक पहल
सम्मेलन के तीसरे एवं अंतिम सत्र की अध्यक्षता दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने की. इस सत्र में आफ्टर-केयर युवाओं के भविष्य, रोजगार, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक पुनर्स्थापन पर विशेष चर्चा हुई.
विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब हर बच्चा आगे बढ़े
दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार होगा, जब समाज का प्रत्येक बच्चा आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सके और उसकी प्रतिभा का सही उपयोग हो. उन्होंने सक्षम परिवारों से अपील की कि वे जरूरतमंद बच्चों को परिवार, शिक्षा और संस्कार देने में आगे आएं. उन्होंने कहा कि एक बच्चे को सही दिशा देना किसी पूजा से कम नहीं है. उन्होंने कहा कि समाज के विकास का सही पैमाना केवल भौतिक संसाधनों का निर्माण नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि समाज का हर बेटा और बेटी मुख्यधारा से जुड़े तथा अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सके.
तीन महत्वपूर्ण केंद्रों का विधिवत विमोचन एवं उद्घाटन
स्वनाथ सम्मेलन-2026 की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक आफ्टर-केयर युवाओं के लिए तीन विशेष सेवा केंद्रों—‘स्वनाथ सहायता केंद्र’, ‘स्वनाथ रोजगार केंद्र’ और ‘स्वनाथ स्वास्थ्य केंद्र’ का विधिवत विमोचन एवं उद्घाटन रहा. इन तीनों केंद्रों का विधिवत विमोचन एवं उद्घाटन दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा एवं गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय की कुलपति पद्मश्री प्रो. महेश वर्मा द्वारा किया गया.
स्वनाथ सहायता केंद्र
‘स्वनाथ सहायता केंद्र’ के माध्यम से आफ्टर-केयर युवाओं को सरकारी योजनाओं, शिक्षा, छात्रवृत्ति, दस्तावेजी सहायता, वित्तीय साक्षरता, मार्गदर्शन, आफ्टर-केयर सेवाओं तथा आवश्यक सामाजिक सहायता से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जाएगा. इसके अंतर्गत जरूरतमंद युवाओं को निःशुल्क कानूनी सलाह एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की पहल भी शामिल है, ताकि वे अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं को समझ सकें और आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता प्राप्त कर सकें.
स्वनाथ रोजगार केंद्र
‘स्वनाथ रोजगार केंद्र’ का उद्देश्य आफ्टर-केयर युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, करियर काउंसलिंग, रोजगार, स्वरोजगार, उद्यमिता और विभिन्न रोजगार अवसरों से जोड़ना है. केंद्र के माध्यम से युवाओं की रुचि और क्षमता के अनुसार कौशल विकास तथा रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न संस्थाओं एवं कॉरपोरेट क्षेत्र के साथ समन्वय विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा.
स्वनाथ स्वास्थ्य केंद्र
‘स्वनाथ स्वास्थ्य केंद्र’ के माध्यम से आफ्टर-केयर युवाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य एवं वेलनेस, स्वास्थ्य जागरूकता तथा आवश्यक चिकित्सा सहायता से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जाएगा.
सम्मेलन में आयोजित स्वास्थ्य जांच शिविर को इसी सोच की प्रारंभिक कड़ी के रूप में देखा गया, जिसमें डेंटल चेकअप, आई चेकअप तथा प्रशिक्षित फिजिशियन डॉक्टरों की टीम ने प्रतिभागियों को स्वास्थ्य सेवाएं एवं परामर्श प्रदान किया.
स्वास्थ्य जांच शिविर और विभिन्न विभागों की प्रदर्शनियां रहीं आकर्षण का केंद्र
सम्मेलन के दौरान दिल्ली महिला एवं बाल विकास विभाग सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा प्रदर्शनी स्टॉल लगाए गए, जहां प्रतिभागियों को विभागीय योजनाओं, बाल संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी जानकारी दी गई. इसके अतिरिक्त अनेक स्कूलों के विद्यार्थियों ने भी अपनी रचनात्मक एवं शैक्षणिक प्रदर्शनियां प्रस्तुत कीं.
कार्यक्रम में हेल्थ चेकअप कैंप का भी आयोजन किया गया, जिसमें डेंटल चेकअप, आई चेकअप तथा प्रशिक्षित फिजिशियन डॉक्टरों की टीम द्वारा स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं एवं परामर्श प्रदान किया गया. बड़ी संख्या में युवाओं और प्रतिभागियों ने स्वास्थ्य जांच शिविर का लाभ उठाया.
एस. एम. अली ने संबोधन में क्या कहा?
महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के डिप्टी डायरेक्टर एस. एम. अली जी ने स्वनाथ सम्मेलन को संबोधित करते हुए अनाथ एवं जरूरतमंद बच्चों के संरक्षण, सम्मान और बेहतर भविष्य के लिए समाज एवं विभाग की सामूहिक जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला. उन्होंने बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने, उन्हें सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने तथा उनके सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता पर जोर दिया.
उन्होंने ‘अनाथ से स्वनाथ’ जैसी पहल को सामाजिक संवेदनशीलता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कार्यक्रम के आयोजकों, सहयोगी संस्थाओं एवं सभी प्रतिभागियों की सराहना की तथा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए हरसंभव सहयोग का संदेश दिया.
‘यह तो शुरुआत मात्र है, आगे और व्यापक स्तर पर होगा अभियान’
संपूर्ण ‘स्वनाथ सम्मेलन-2026’ की अध्यक्षता एवं संयोजन नई उड़ान ट्रस्ट के संस्थापक एवं विश्व मंगल्य स्वनाथ परिषद के संयोजक महेंद्र रावत ने किया. सम्मेलन के सफल आयोजन में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, सरकारी विभागों, विश्वविद्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों, बाल देखभाल संस्थानों, स्वयंसेवकों, चिकित्सकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और प्रतिभागियों के प्रति उन्होंने आभार व्यक्त किया.
महेंद्र रावत ने कहा कि ‘स्वनाथ सम्मेलन-2026’ किसी अभियान का अंत नहीं, बल्कि एक नई सामाजिक यात्रा की शुरुआत है. उन्होंने कहा कि अनाथ एवं देखभाल की आवश्यकता वाले बच्चों को केवल संरक्षण देने के बजाय उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल, रोजगार, परिवार जैसा सहयोग, मार्गदर्शन और सम्मानजनक आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे.
उन्होंने कहा, “यह तो एक शुरुआत मात्र है. बहुत जल्द हम इससे भी बड़े और व्यापक स्तर के कार्यक्रम की योजना बना रहे हैं, जिसमें देशभर से बाल अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कॉरपोरेट, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर आफ्टर-केयर युवाओं के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी.”
उन्होंने कहा कि ‘स्वनाथ’ की सोच को दिल्ली तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे देश के अन्य हिस्सों तक ले जाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि कोई भी बच्चा 18 वर्ष की आयु के बाद स्वयं को अकेला और असहाय महसूस न करे.
प्रशांत हरतालकर जी ने कहा कि इस अभियान का लक्ष्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि ‘स्वनाथ सहायता केंद्र’, ‘स्वनाथ रोजगार केंद्र’ और ‘स्वनाथ स्वास्थ्य केंद्र’ जैसी स्थायी सहयोग व्यवस्थाओं को विकसित करना है, ताकि बच्चों और आफ्टर-केयर युवाओं को आवश्यकता के समय शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कानूनी सहायता, मार्गदर्शन और अन्य आवश्यक सहयोग मिल सके. उन्होंने सभी सहयोगियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि “जब समाज एक बच्चे का हाथ थामता है, तो वह केवल एक जीवन नहीं बदलता, बल्कि आने वाली पूरी पीढ़ी का भविष्य बदल देता है.”
‘स्वनाथ’: पहचान बदलने से आगे, भविष्य बदलने की पहल
सम्मेलन में आयोजकों ने कहा कि ‘स्वनाथ’ केवल एक नाम नहीं, बल्कि सामाजिक सोच में परिवर्तन का प्रयास है. किसी बच्चे को उसकी पारिवारिक परिस्थिति से पहचानने के बजाय उसकी प्रतिभा, क्षमता, अधिकार और सपनों से पहचानने की जरूरत है.
सम्मेलन में यह संकल्प दोहराया गया कि 18 वर्ष की आयु के बाद भी युवाओं का साथ नहीं छूटना चाहिए. उन्हें शिक्षा से रोजगार, स्वास्थ्य से सुरक्षा, कानूनी सहायता से अधिकार और संरक्षण से आत्मनिर्भरता तक एक निरंतर सहयोग प्रणाली उपलब्ध कराना आवश्यक है.
सम्मेलन का सामूहिक संदेश
स्वनाथ सम्मेलन-2026 ने यह संदेश दिया कि किसी बच्चे का अतीत उसके भविष्य का निर्धारण नहीं करता. यदि सरकार, विश्वविद्यालय, सामाजिक संगठन, कॉरपोरेट क्षेत्र और संवेदनशील नागरिक मिलकर काम करें तो प्रत्येक बच्चा आत्मविश्वास के साथ अपने जीवन की नई शुरुआत कर सकता है. ‘अनाथ’ से ‘स्वनाथ’ तक की यात्रा केवल शब्दों का परिवर्तन नहीं, बल्कि सोच, व्यवस्था और सामाजिक जिम्मेदारी में बदलाव की यात्रा है.