पटना: बिहार में बढ़ती सुपारी किलिंग की घटनाओं ने पुलिस मुख्यालय को सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया है. अब ऐसे अपराधियों पर लगाम कसने के लिए एक अलग और हाई-टेक स्पेशल सेल तैयार किया गया है. यह नया ‘किलर सेल’ राज्य की एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) के अधीन काम करेगा और सुपारी लेकर हत्या करने वालों का पूरा डेटाबेस बनाएगा.
पुलिस मुख्यालय की तरफ से बनाए गए इस नए 'किलर सेल' का उद्देश्य है प्रदेश में सुपारी किलिंग की घटनाओं पर तुरंत और ठोस कार्रवाई करना. यह सेल न केवल अपराधियों की पहचान करेगा, बल्कि उनके पुराने रिकार्ड और संभावित गतिविधियों पर भी नजर रखेगा. एडीजी कुंदन कृष्णन के मुताबिक, सुपारी किलर से जुड़ी सूचनाएं सभी जिलों के पुलिस थानों को दी जा रही हैं, ताकि स्थानीय स्तर पर भी निगरानी कड़ी हो.
हर शूटर की होगी डिजिटल प्रोफाइलिंग
इस सेल का मुख्य काम यह भी होगा कि वह नए और पुराने दोनों तरह के शार्प शूटरों की पहचान कर उनकी डिजिटल प्रोफाइलिंग करे. इसमें अपराधी का नाम, पता, फोटो, हुलिया, पुराना आपराधिक रिकॉर्ड और नेटवर्क शामिल होंगे. यह डाटा पूरे राज्य के पुलिस सिस्टम से साझा किया जाएगा, जिससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई हो सके.
जेल में बंद शूटर भी रडार पर रहेंगे
पुलिस अब जेल में बंद शार्प शूटरों को भी नजरअंदाज नहीं कर रही है. ऐसे अपराधियों की गतिविधियों पर जेल के अंदर भी नजर रखी जा रही है. इसके अलावा, जैसे ही कोई सुपारी किलर जेल से रिहा होता है, उस पर थाना स्तर पर निगरानी बनाए रखने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं.
हालिया घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
पिछले कुछ महीनों में बिहार में सुपारी किलिंग के कई हाई-प्रोफाइल मामले सामने आए हैं. पटना में कारोबारी गोपाल खेमका की हत्या का मामला हो या फिर सिविल कोर्ट के वकील जितेंद्र मेहता की हत्या दोनों ही मामलों में सुपारी देकर पेशेवर शूटरों को हायर किया गया था. गोपाल खेमका केस में बिल्डर अशोक साह ने 3 लाख रुपये में सुपारी देकर हत्या करवाई, वहीं वकील मेहता की हत्या के पीछे उनकी बेटी का प्रेमी निकला, जिसने डेढ़ लाख रुपये में दो शूटरों को सुपारी दी थी.
पुलिस के इस एक्शन से साफ है कि अब सुपारी लेकर हत्या करना इतना आसान नहीं रहेगा. एडीजी ने साफ कहा है कि जो भी व्यक्ति एक बार पुलिस की निगाह में आ गया, उस पर हमेशा नजर रखी जाएगी.
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