चांद से टकराएगा Falcon-9 रॉकेट का हिस्सा! 8700 Km/h की रफ्तार से होगी टक्कर, उठेगा 50 KM ऊंचा धूल का गुब्बार

अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट का ऊपरी हिस्सा चंद्रमा की सतह से टकराएगा.

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अंतरिक्ष में छोड़ी गई हर वस्तु हमेशा के लिए गायब नहीं हो जाती. कई बार वर्षों तक अंतरिक्ष में भटकने के बाद यही मलबा किसी ग्रह, उपग्रह या दूसरे खगोलीय पिंड से टकरा जाता है. ऐसा ही एक दुर्लभ खगोलीय घटनाक्रम बुधवार को देखने को मिलेगा, जब अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट का ऊपरी हिस्सा चंद्रमा की सतह से टकराएगा. 

वैज्ञानिकों के लिए यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि चंद्रमा की सतह और अंतरिक्षीय टक्करों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है. हालांकि यह घटना पृथ्वी से सामान्य आंखों से दिखाई नहीं देगी, लेकिन टेलिस्कोप के जरिए चंद्रमा की सतह से उठने वाली धूल कुछ क्षणों के लिए देखी जा सकती है.

2025-010डी नाम से पहचाना गया अंतरिक्ष मलबा

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह रॉकेट का ऊपरी चरण जनवरी 2025 में लॉन्च किए गए फाल्कन-9 मिशन का हिस्सा था, जिसे अमेरिका और जापान के संयुक्त चंद्र मिशन के तहत दो लैंडर और वैज्ञानिक उपकरण अंतरिक्ष में भेजने के लिए इस्तेमाल किया गया था. स्वतंत्र खगोलशास्त्री बिल ग्रे समेत कई विशेषज्ञों ने इस मलबे को 2025-010डी नाम दिया है. 

अनुमान है कि भारतीय समयानुसार दोपहर 12:05 बजे यह चंद्रमा के आइंस्टीन क्रेटर के पास करीब 8,700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से टकराएगा. टक्कर के बाद चंद्रमा की सतह से लगभग 50 किलोमीटर तक धूल का विशाल गुबार उठ सकता है, जिसे आधुनिक टेलिस्कोप की मदद से रिकॉर्ड किए जाने की उम्मीद है.

अंतरिक्ष में ही रह जाते हैं फाल्कन-9 के ऊपरी हिस्से

स्पेसएक्स का फाल्कन-9 दुनिया के सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले पुन: प्रयोज्य रॉकेटों में से एक है. इसके पहले चरण को मिशन पूरा होने के बाद वापस पृथ्वी पर उतार लिया जाता है ताकि उसे दोबारा उपयोग में लाया जा सके. लेकिन ऊपरी चरण अक्सर अंतरिक्ष में ही रह जाते हैं और लंबे समय तक अलग-अलग कक्षाओं में भटकते रहते हैं. लगभग 4,000 किलोग्राम वजनी और करीब पांच मंजिला इमारत जितने बड़े इस मलबे का अंत अब चंद्रमा से टकराकर होने वाला है, जो अंतरिक्ष में छोड़े गए निष्क्रिय रॉकेटों से जुड़े जोखिमों की भी याद दिलाता है.

टक्कर से बनेगा नया क्रेटर

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस प्रभाव से चंद्रमा की सतह पर लगभग 17 मीटर व्यास का नया गड्ढा बन सकता है. हालांकि इससे चंद्रमा की संरचना या उसकी कक्षा पर किसी तरह का गंभीर प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है. इसके विपरीत, यह घटना वैज्ञानिकों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, क्योंकि इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि तेज रफ्तार से होने वाली अंतरिक्षीय टक्करों का चंद्र सतह पर क्या असर पड़ता है. भविष्य के चंद्र मिशनों और ग्रहों की सतह से जुड़े अनुसंधानों के लिए भी इस घटना से मिलने वाले आंकड़े महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

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