मध्य अमेरिकी देश ग्वाटेमाला एक बार फिर प्राकृतिक आपदा के गंभीर खतरे का सामना कर रहा है. देश के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में शामिल फुएगो ज्वालामुखी में हुए भीषण विस्फोट के बाद सरकार ने पूरे देश में ऑरेंज अलर्ट घोषित कर दिया है. ज्वालामुखी से निकला लावा और आसमान में कई किलोमीटर तक उठता राख का विशाल गुबार आसपास के इलाकों के लिए बड़ा खतरा बन गया है. हालात को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है, जबकि वैज्ञानिक लगातार इसकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं.
6 किलोमीटर तक पहुंचा राख का गुबार
ग्वाटेमाला सिटी से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित फुएगो ज्वालामुखी में सोमवार सुबह शुरू हुई गतिविधियां शाम तक और अधिक तेज हो गईं. अधिकारियों के मुताबिक ज्वालामुखी से लगातार राख, गैस और लावा निकल रहा है, जिससे करीब 6 किलोमीटर ऊंचाई तक राख का घना बादल फैल गया. आसपास के कई इलाकों में राख गिरने से लोगों को घरों के भीतर रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है. प्रशासन ने संभावित खतरे को देखते हुए राहत और निगरानी अभियान भी तेज कर दिया है.
वैज्ञानिकों ने बढ़ते खतरे को लेकर दी चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि फुएगो ज्वालामुखी की गतिविधियां पहले की तुलना में अधिक तेज हो रही हैं. ऐसे में इसकी ढलानों से अत्यधिक गर्म राख, पत्थर और ज्वालामुखीय मलबा तेज गति से नीचे आ सकता है, जो आसपास की बस्तियों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. इसी आशंका के चलते प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है और लोगों से किसी भी आधिकारिक निर्देश का तुरंत पालन करने की अपील की है.
स्कूल बंद, प्रमुख सड़क पर आवाजाही रोकी गई
ज्वालामुखी के प्रभाव वाले दो क्षेत्रों में एहतियात के तौर पर स्कूलों की ऑफलाइन पढ़ाई फिलहाल रोक दी गई है. इसके अलावा दक्षिणी तट को ऐतिहासिक और पर्यटन नगरी एंटीगुआ से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क भी अस्थायी रूप से बंद कर दी गई है. अधिकारियों का मानना है कि राख और लावा के कारण सड़क मार्ग पर यात्रा करना जोखिम भरा हो सकता है. इससे पहले भी फुएगो ज्वालामुखी के विस्फोट के दौरान बड़ी मात्रा में राख वातावरण में फैली थी, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ था.
क्यों बार-बार सक्रिय होता है फुएगो?
ग्वाटेमाला प्रशांत महासागर के 'रिंग ऑफ फायर' क्षेत्र में स्थित है, जिसे दुनिया का सबसे सक्रिय भूकंपीय और ज्वालामुखीय क्षेत्र माना जाता है. इसी कारण यहां समय-समय पर भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट जैसी घटनाएं होती रहती हैं. फुएगो ज्वालामुखी भी इसी भूगर्भीय गतिविधि का हिस्सा है और पिछले कई वर्षों में कई बार सक्रिय हो चुका है. विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक इसकी गतिविधियां पूरी तरह शांत नहीं हो जातीं, तब तक प्रशासन और स्थानीय लोगों को लगातार सतर्क रहने की आवश्यकता होगी.
ये भी पढ़ें: 5 महीने की जंग ने खोली अमेरिका की पोल! खत्म होने की कगार पर हाईटेक मिसाइलों का भंडार?