सजा-ए-मौत के बाद... 21 साल जेल की सजा, अब किस मामले में शेख हसीना पर कोर्ट ने सुनाया फैसला?

बांग्लादेश की राजनीति इन दिनों उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है. सत्ता से बेदखल होने के बाद से शेख हसीना भारत में शरण लिए हुए हैं, लेकिन अब ढाका की अदालतों से लगातार आने वाले फैसले हालात को और तनावपूर्ण बना रहे हैं.

Sheikh Hasina Sentenced 21 Year Jail in Corruption Cases
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बांग्लादेश की राजनीति इन दिनों उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है. सत्ता से बेदखल होने के बाद से शेख हसीना भारत में शरण लिए हुए हैं, लेकिन अब ढाका की अदालतों से लगातार आने वाले फैसले हालात को और तनावपूर्ण बना रहे हैं. भ्रष्टाचार से लेकर मानवता के खिलाफ अपराधों तक, पूर्व प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोपों की पंक्तियाँ लंबी होती जा रही हैं और इसी के साथ बांग्लादेश की अंतरिम सरकार भारत से उन्हें वापस भेजने की मांग तेज करती जा रही है.

बांग्लादेश की एक अदालत ने शेख हसीना को भ्रष्टाचार के तीन मामलों में कुल 21 साल कैद की सजा सुना दी है. यह वही नेता हैं जिन्हें 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुए हिंसक दमन और मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए पहले ही फांसी की सजा दी जा चुकी है. लेकिन मुश्किल यह है कि हसीना वर्तमान में बांग्लादेश में नहीं, बल्कि पिछले एक साल से अधिक समय से भारत में रह रही हैं.  जिस ट्रिब्यूनल ने उन्हें मौत की सजा सुनाई, वह भी उन्हें अपनी पहुंच से बाहर मान रहा है.

भारत से एक्सट्रैडिशन की औपचारिक मांग

दिसंबर 2024 में बांग्लादेश ने हसीना को भारत से वापस लाने के लिए औपचारिक अनुरोध किया था. यह अनुरोध भारत के विदेश सचिव के ढाका दौरे के दो हफ्ते बाद आया जिसके दौरान दोनों देशों ने रिश्तों में स्थिरता और शांति बनाए रखने की बात कही थी. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस हसीना के प्रत्यर्पण पर ज़ोर दे रहे हैं. उनका कहना है कि हसीना को देश वापस लाया जाए ताकि उनके कार्यकाल के दौरान हुए कथित अपराधों की कानूनी जांच और सुनवाई हो सके.

ढाका की नई सरकार की बढ़ती बेचैनी

जुलाई 2025 में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने एक्सट्रैडिशन की दिशा में औपचारिक कदम बढ़ाए. विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने पुष्टि की कि भारत को औपचारिक चिट्ठी भेजी जा चुकी है. उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए फॉलो-अप भी किया जाएगा. यूनुस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने भारत के प्रति नाराज़गी जताते हुए कहा था कि भारत को अब नैतिक स्पष्टता के साथ निर्णय लेना चाहिए. बहुत समय से ढाका की कानूनी मांग अनसुनी की जा रही है.

कूटनीतिक मंचों पर भी चर्चा तेज

BIMSTEC समिट  बैंकॉक में हुई इस बैठक के दौरान यूनुस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच वार्ता में भी हसीना का मुद्दा सामने आया. रिपोर्ट्स के अनुसार यूनुस ने अप्रत्यक्ष रूप से इस बात का संकेत दिया कि भारत को हसीना द्वारा उनकी सरकार की आलोचना को रोकने में भूमिका निभानी चाहिए.

भारत की चिंता: संवेदनशील पड़ोसी, संवेदनशील फैसला

शेख हसीना का मामला सिर्फ एक राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की कूटनीतिक संतुलन का भी बड़ा मुद्दा बन गया है. भारत के लिए यह फैसला सीधा नहीं—क्योंकि एक ओर लोकतांत्रिक पड़ोसी के साथ संबंध संतुलन में रखना है, और दूसरी ओर मानवाधिकार तथा कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर वैश्विक नजरें भी भारत पर टिकी हैं.

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