World Archery Championship: दुनिया ने आज न सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता में भारत की जीत देखी, बल्कि संघर्ष और आत्मबल की सबसे बड़ी मिसाल भी देखी. 18 साल की भारतीय तीरंदाज शीतल देवी ने तुर्की में आयोजित पैरावर्ल्ड आर्चरी चैंपियनशिप में वो कर दिखाया, जो शायद ही किसी ने सोचा हो, उन्होंने बिना हाथों के खेलते हुए महिला कंपाउंड व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीत लिया.
शीतल ने फाइनल में विश्व नंबर 1 तुर्की की ओजनुर क्योर गिरदी को 146-143 से हराया. ये वही गिरदी हैं जिन्होंने पिछले साल 2023 के फाइनल में शीतल को मात दी थी. इस जीत के साथ शीतल ने न सिर्फ बदला लिया, बल्कि विश्व स्तर पर इतिहास रच दिया.
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— The Khel India (@TheKhelIndia) September 27, 2025
- Paris Paralympics & World Champion Oznur Cure holding the medal for new World Champion Sheetal Devi, and the group hug at the end! ❤️
Pure Goosebumps! 🥺 pic.twitter.com/abEji45hTZ
पैरों और ठुड्डी से तीरंदाजी, दुनिया को चौंकाने वाली कला
शीतल इस प्रतियोगिता की इकलौती ऐसी खिलाड़ी थीं, जो हाथों के बिना खेलती हैं. वह अपने पैरों और ठुड्डी का इस्तेमाल करके तीर चलाती हैं, और ऐसा सटीक निशाना लगाती हैं कि अच्छे-अच्छे निशानेबाज दंग रह जाएं. यह उपलब्धि इसलिए और खास बन जाती है क्योंकि यह शीतल का पहला व्यक्तिगत वर्ल्ड चैंपियनशिप गोल्ड है. इससे पहले भी वह टीम और मिक्स्ड इवेंट्स में पदक जीत चुकी थीं.
तीन राउंड में तीन पदक, शीतल का स्वर्णिम अभियान
फाइनल की रोमांचक कहानी, एक-एक तीर में बसी थी उम्मीद
फाइनल मुकाबला एक भावनात्मक और तकनीकी थ्रिलर से कम नहीं था. पहले राउंड में दोनों खिलाड़ी बराबरी पर रहीं. दूसरे राउंड में शीतल ने तीन परफेक्ट 10 मारकर गिरदी पर बढ़त बना ली. तीसरे और चौथे राउंड में दोनों के बीच मुकाबला कांटे का रहा, लेकिन अंत में शीतल ने जो तीन लगातार परफेक्ट 10 मारे, उसने सबकुछ बदल दिया.
फाइनल स्कोर:
शीतल देवी: 146
ओजनुर गिरदी: 143
रजत पदक से भी कम नहीं जीत
शीतल और सरिता की जोड़ी ने ओपन टीम फाइनल में शानदार शुरुआत की थी, लेकिन अंत में तुर्की की जोड़ी ने वापसी की और मुकाबला 4 अंकों से जीत लिया. भारतीय टीम का एक तीर सिर्फ 7 अंक का निकला, जिससे बढ़त गंवानी पड़ी.
शीतल देवी: एक प्रेरणा, एक कहानी
शीतल जम्मू-कश्मीर से आती हैं, एक ऐसा क्षेत्र जो लंबे समय से संघर्षों का गवाह रहा है. लेकिन शीतल की कहानी इन सबसे ऊपर है. शारीरिक बाधाओं को चुनौती देना, खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाना और दुनिया के सबसे बड़े मंच पर देश का झंडा बुलंद करना, यह किसी चमत्कार से कम नहीं.
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