Modi at SCO Summit: The Man The World Trusts- Modi-Xi-Putin Handshake at Bishkek | The JC Show

The JC Show: दुनिया के बदलते समीकरणों के बीच सवाल बड़ा है कि आखिर दुनिया को नरेंद्र मोदी में ऐसा क्या दिखता है कि हर बड़ा ग्लोबल प्लेयर आज भारत की ओर देख रहा है. कूटनीति में रिश्ते सिर्फ दिल से नहीं, हितों से भी चलते हैं.

Bharat 24

The JC Show: दुनिया के बदलते समीकरणों के बीच सवाल बड़ा है कि आखिर दुनिया को नरेंद्र मोदी में ऐसा क्या दिखता है कि हर बड़ा ग्लोबल प्लेयर आज भारत की ओर देख रहा है. कूटनीति में रिश्ते सिर्फ दिल से नहीं, हितों से भी चलते हैं. नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को समझें तो इसका सबसे अहम आधार है ट्रिपल टी-ट्रेड, ट्रस्ट और टेररिज्म. ट्रेड यानी हर बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ कारोबार और रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाना. 

ट्रस्ट यानी रूस का भारत पर भरोसा, पश्चिम का भारत को रणनीतिक साझेदार मानना और सेंट्रल एशिया का भारत को भरोसेमंद दोस्त समझना. वहीं टेररिज्म पर भारत की नीति बिल्कुल साफ है, जीरो टॉलरेंस. यानी मोदी की कूटनीति ने भारत को ऐसी जगह पहुंचाया है, जहां दुश्मन भारत को नजरअंदाज नहीं कर सकता और दोस्त भारत को छोड़ना नहीं चाहता. तो क्या भारत अब सिर्फ ग्लोबल पावर बनने की कोशिश कर रहा है या दुनिया के फैसलों को प्रभावित करने वाली ताकत बन चुका है? आज जेसी शो में इसी पर करेंगे चर्चा और हमारे साथ मौजूद हैं भारत 24 के सीईओ और एडिटर इन चीफ और फर्स्ट इंडिया के सीएमडी और एडिटर इन चीफ डॉ जगदीश चंद्र. 

सवाल: मोदी एट द मैन द वर्ल्ड ट्रस्ट. आखिर इसके मायने क्या हैं? एंड हैज़ नरेंद्र मोदी रियली इमर्ज्ड ऐज़ द न्यू एक्सेप्टेबल ग्लोबल वॉइस ऐज़ अ मिडिएटर और अ नेगोशिएटर.

जवाब: यू आर अब्सोलुटली करेक्ट. नरेंद्र मोदी स्पीक्स वर्ल्ड लिसेंस. नरेंद्र मोदी स्पीक्स वर्ल्ड ट्रस्ट. आई थिंक बाय नाउ ही इज द ओनली एक्सेप्टेबल ग्लोबल वॉइस टू मीडिएट और टू नेगोशिएट इंटरनेशनल इश्यूज लाइक रशिया यूक्रेन एंड अदर्स. लुक एट रशिया उनको भी नरेंद्र मोदी चाहिए. लुक एट यूक्रेन उनको नरेंद्र मोदी चाहिए. और अब तो ईरान को भी नरेंद्र मोदी चाहिए शांति वार्ता के लिए. वो नरेंद्र मोदी से मदद मांग रहे हैं. 

तो इट्स रियली ए डिप्लोमेसी मिरेकल बाय नरेंद्र मोदी एंड प्राइड ऑफ द कंट्री इन इंटरनेशनल अफेयर्स कि आज देश का प्रधानमंत्री ऐसा व्यक्ति है जिसको सारा संसार चाहता है कि मेरे यहां भी एक नरेंद्र मोदी हो या उनको बुला के अपने इश्यूज को जो है ना हम सॉर्ट आउट कर सकें. तो नरेंद्र मोदी नाउ रियली ए ग्लोबल फोर्स ए ग्लोबल नेगोशिएटर ए ग्लोबल मीडिएटर यू कैन से. सो दिस इज द हेडलाइन ऑफ़ द स्टोरी. पर सर एक बड़ा क्वेश्चन है. हम जब अंतरराष्ट्रीयवाद की बात करते हैं तो उनको सुलझाने के लिए एज अ ग्लोबल नेगोशिएटर क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी कुछ सीमाएं हैं? ऑफकोर्स हर व्यक्ति की सीमाएं हैं. 

सबसे बड़ी सीमा ये है कि आप उस देश की पॉलिटिक्स को चेंज नहीं कर सकते. सेकंड ये जो ग्राउंड रियलिटीज है, लेनदेन है बॉर्डर का, सेना का आगे पीछे हटना वो तो वही देश तय करेंगे. सबसे इंपॉर्टेंट बात जो नरेंद्र मोदी का कंट्रीब्यूशन यह है कि ही कैन ब्रिंग बोथ द पार्टीज ऑन टेबल टू नेगोशिएट ही कैन क्रिएट इन एटमॉस्फेयर दोस्ती का माहौल फ्रेंडली माहौल कि आओ भाई बैठो वो सबसे बड़ी उपलब्धि है नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ा टास्क है सबसे बड़ा मैंडेट है उनका दैट वे उस टेबल पे जो है तो सीमाएं हैं लेकिन सबसे बड़ी इंपॉर्टेंट बात ये है कि कम से कम वो उन दोनों पक्षों को टेबल पे लाने की क्षमता रखते हैं. दोनों पक्षों का विश्वास है, भरोसा है उनमें और बाकी सीमाएं तो हर चीज की. 

सवाल: व्हाट इज द रोल ऑफ इंडिया इन द चेंजिंग सिनेरियो ऑफ़ सेंट्रल एशिया?

जवाब: सेंट्रल एशिया में देखिए रोल इसलिए इंपॉर्टेंट है वहां पर तालिबान फैक्टर है अफगानिस्तान वहां पर चाइना फैक्टर है वहां इंडिया का डिजिटल पेमेंट इंडियन टेक्नोलॉजी का सिस्टम है और फिर बाय नाउ जो है हम कह सकते हैं कि सेंट्रल एशिया हैज़ बिकम ए मेजर इंपॉर्टेंट पार्ट ऑफ इंडियास एनर्जी सिक्योरिटी आर्किटेक्चर ये सब इशूज़ ऐसे हैं जिनके कारण से सेंट्रल एशिया में भारत का रोल लगातार बढ़ रहा है और इंपॉर्टेंट है और भारत की विदेश नीति में सेंट्रल एशिया अब एक इंपॉर्टेंट स्थान ले रहा है. तो इट्स अ ग्रोइंग इंपॉर्टेंट रोल फॉर इंडिया टू प्ले इन सेंट्रल एशिया. 

सवाल: ताशकंद एयरपोर्ट पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे तो उजबेक राष्ट्रपति शौकत मिरज ने प्रोटोकॉल तोड़कर उनका स्वागत किया. दोनों नेता एक ही गाड़ी से निकले. इस कार डिप्लोमेसी को आप कैसे देखते हैं? 

जवाब: कार डिप्लोमेसी नाउ इज अ फैशन ऑफ द डे टू लेर नरेंद्र मोदी और टू अट्रैक्ट नरेंद्र मोदी इन अ वे तो एक फैशन हो गया इस तरह से जब बड़े-बड़े लोग उन्हें कार में बैठाते हैं पुतिन कार में बैठाते हैं तो छोटे राष्ट्रों में एक क्रेज बात है नरेंद्र मोदी हमारी गाड़ी में बैठे और साथ जाए बैठ के एक स्टेटस सिंबल बन गया इन राष्ट्रों के लिए नरेंद्र मोदी को अपनी कार में बैठाना उनको लेके जाना तो यहां पे कार में गए 15 मिनट तक साथ रहे वहां पे आगे फंक्शन था वहां गए फंक्शन तक कार में गए सो दिस इज़ नाउ यू कैन से नथिंग थिंग न्यू ए ट्रेडिशनल कार डिप्लोमेसी फॉर नरेंद्र मोदी बाय द डिग्निटी ऑफ़ दोज़ कंट्रीज. प्रसाइली हम कह सकते हैं कि नरेंद्र मोदी की जो कार डिप्लोमेसी है, इट हैज़ बिकम ए फैशन ऑफ ग्लोबल डिप्लोमेसी बाय नाउ. 

सवाल: उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वोच्च सम्मान ओली दराज दोस्तिक से नवाजा है. और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 36वां राष्ट्रीय सम्मान है. तो आप इसे कैसे देखते हैं? 

जवाब: कुदरत है अद्भुत चमत्कार है. मैंने लास्ट टाइम भी कहा था कि राष्ट्रों में होड़ लगी हुई है नरेंद्र मोदी हमारे यहां आए और हम उन्हें अंतरराष्ट्रीय ताज उनको सौंपे अंतरराष्ट्रीय सम्मान उनको दें. तो ये जो यात्रा है ये उसी श्रंखला में कड़ी है. दिस इज़ नो मोर एक्सेप्शन. मोदी इज़ वन ऑफ़ द मोस्ट पॉपुलर ग्लोबल लीडर एट द मोमेंट. और इसीलिए जहां भी जाते हैं एक आकर्षण रहता है. वहां का राष्ट्र उन्हें सम्मानित करके गौरान्विंद महसूस करता है. गदगद होता है. और इस देश में भी वही हुआ. 

सवाल: बड़ा इंटरेस्टिंग फैक्ट है ये. दुनिया भर के 36 अंतरराष्ट्रीय सम्मान के साथ में प्रधानमंत्री मोदी नेताओं की वैश्विक सूची में सबसे आगे हैं. यहां तक कि पुतिन, शी जिनपिंग और बात करें अगर हम ट्रंप की ये सब भी पीछे हैं. सर इस अभूतपूर्व रिकॉर्ड को आप कैसे देखते हैं?

जवाब: अभूत रिकॉर्ड है. मैंने कहा ना कुदरत है, जन्मपत्री है, मिरेकल है लोकप्रियता का. 36 है वार्ड इमेजिन. और बाकी संसार के टॉप लीडर्स कहां है? 25 पे तो पुतिन खड़े हैं. 19 पे चाइना के राष्ट्रपति खड़े हैं. 11 पे ट्रंप खड़े हैं. इतना शोर पुरस्कार केवल 11 हैं. आप देख रहे हैं. तो रिकॉर्ड है प्राइड फॉर इंडिया कि आपका प्रधानमंत्री ऐसा है जहां जाते हैं उनको एक पुरस्कार मिलता है. और 36 अवार्ड जो है रियली एन अचीवमेंट. 

सवाल: आखिर कैसी रही ताशकंद में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिज़ई के साथ नरेंद्र मोदी की बटरल टॉक्स और क्या है 

जवाब:  इसकी हाईलाइट्स या हेडलाइंस बटरल टॉक्स बहुत अच्छी थी कुछ एक हाईलाइट्स हैं इंपॉर्टेंट सबसे पहले इंपॉर्टेंट तो ये कि इंडिया हैज़ एलिवेटेड देयर स्टेटस एज ए कॉम्प्रहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप वेरी इंपॉर्टेंट डेवलपमेंट सेकंड इसमें यू है कि इंडिया हैज़ साइन एग्रीमेंट फॉर लॉन्ग टर्म यूरेनियम सप्लाई तीसरा ये कि दोनों देशों का जो व्यापार है 2030 तक वो पांच गुना होगा. यह बेसिकली उन्होंने तय किया है. उसके अलावा फिर क्रिटिकल मिनरल्स हैं, आपका पावर है, स्पेस है, एनर्जी है, हेल्थ है. ये सारे सेक्टर्स जो है वहां पे हुए हैं. तो इट वाज़ ए वेरी नाइस बटरल मीटिंग बिटवीन द टू कंट्रीज. 

सवाल: क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म को लेकर प्रधानमंत्री मोदी और उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति के बीच में महत्वपूर्ण बातचीत हुई है. आप क्या कहना चाहेंगे इस बारे में? 

जवाब: वेरी इंपॉर्टेंट दे हैव एग्रीड टू कंडेम क्रॉस टेररिज्म एंड ऑल सॉर्ट ऑफ़ टेररिज्म. सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह दोनों राष्ट्र या यूं कहिए कि नरेंद्र मोदी की श्रंखला में एक और राष्ट्र जुड़ गया है. उनके आतंक विरोधी अभियान में शामिल होने के लिए. तो इट्स वन मोर एडिशन टू नरेंद्र मोदी मैंडेट टू फिनिश टेररिज्म ऑन दिस अर्थ ऑन दिस ग्रुप जिसे कहते हैं. दिस इज़ ऑल. 

सवाल: किरगिस्तान की राजधानी बिजक में आयोजित जो 26वें एसओ शिखर सम्मेलन में का जो मुख्य एजेंडा क्या था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में क्या थी मुख्य बातें जिसने सारे राष्ट्रों का ध्यान उनकी ओर खींचा 

जवाब: सबसे महत्वपूर्ण बात ये थी टेररिज्म हैज़ कम टू एन एंड इकोसिस्टम जो टेररिज्म का है उनकी भर्ती है उनका फंडिंग है उनके प्रोटेक्टर्स हैं दे ऑल हैव टू बोट टू लॉ बोट टू जस्टिस जिसे कहते हैं सबसे इंपॉर्टेंट ड्रग तस्करी की उन्होंने बात की. तीसरी इंपॉर्टेंट बात उन्होंने कही कि यह जो टेररिज्म है और यह जो चल रहा है सारा इट डज़ंट इफेक्ट ओनली वन कंट्री. इट्स अ ग्लोबल इशू. वी हैव टू बी वेरी सीरियस टू सॉर्ट आउट दिस इशू. तो बेसिकली तो टेररिज्म की बात थी, ड्रग ट्रैफिकिंग की बात थी और उसके अलावा जो दूसरे इशूज़ हैं, क्फ्लिक्ट हैं आसपास के देशों के उनकी बातचीत हुई. इट वाज़ अ गुड बटरल मीटिंग. 

सवाल: SCO समिट में वेस्ट एशिया क्राइसेस के बारे में क्या कुछ कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने? 

जवाब: उनका तो कहना यही है कि बाय पीस और जो वहां पर कोई क्रूरता हो रही है किसी तरह की हैं उसको खत्म करिए और सबसे इंपॉर्टेंट बात यह है कि एनश्योर पीस जो कहना चाहिए उनका कहने का मतलब है कि ये जो युद्ध है मिडिल ईस्ट का या जो इशू ये झगड़े हैं वॉर है रोज का जो है ये किसी एक रीजन को प्रभावित नहीं करता इट अफेक्ट्स द ओवरऑल एनर्जी सिचुएशन ओवरऑल जिसे कहते हैं सप्लाई चेन एंड ओवरऑल सिक्योरिटी ऑफ द वर्ल्ड तो यह सब उन्होंने कहा कि विषय एक पे नहीं है. इसलिए सब मिलकर इसको सॉर्ट आउट करिए. इट इज द लार्जर इंटरेस्ट ऑफ ह्यूमनिटी. 

सवाल: SCO में अमेरिका इजराइल के खिलाफ और ईरान के समर्थन में ऐसा क्या कहा कि ईरान गदगद है. 

जवाब: ईरान इसलिए गदगद है कि पूरा SCO ईरान के लिए खड़ा था. SCO बैक्स ईरान जिसे एक लाइन में कहा जाए. दे कंडेम तहरान अटैक्स. और दूसरा उन्होंने कहा कि अमेरिका जो बार-बार धमकी देता है उसको उन्होंने क्रिटिसाइज किया. तो कुल मिला के है कि SCO का जो सपोर्ट था वो पूरा ईरान को इस बार फॉर्मली मिला.
इसलिए ईरान गद है. ईरान खुश है. 

सवाल: SCO समिट में राष्ट्रपति पुतिन का कहना था कि SCO इज वर्ल्ड लार्जेस्ट ब्लॉक. इस पर कुछ कहना चाहेंगे आप?

जवाब: एग्जैक्टली लार्जेस्ट ब्लॉक है. आप देखिए ब्रिक्स है, SCO है. प्रेजेंट 50% पापुलेशन ऑफ द वर्ल्ड एंड 40% प्रोडक्शन यू कैन से बिज़नेस ऑफ़ द वर्ल्ड. इसलिए संसार का सबसे बड़ा ये संगठन है. संसार का सबसे बड़ा एक ग्रुप है. 

सवाल: SCO सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, व्लादमीर पुतिन और श्री जिनपिंग का जो पावरफुल डबल हैंडशेक का फोटो जारी हुआ उसकी अहमियत क्या है?

जवाब: उसकी अहमियत यह है कि इट्स अ न्यू वर्ल्ड ऑर्डर. नंबर वन. नंबर टू जो मैं कहता हूं न्यू वर्ल्ड ऑर्डर इज बेसिकली एमिंग ट्रंप दैट वे. सेकंड है बैलेंसिंग एक्ट. और थर्ड यह है कि रीमरजेंस ऑफ़ नरेंद्र मोदी एज अ ग्लोबल लीडर. आप तस्वीर देखिए तीन में से कितना पावरफुल चेहरा नरेंद्र मोदी का आपको दिखाई देता है. तो यह इस चित्र का यह है अर्थ. 

सवाल: राजनीतिक परवेक्षकों का मानना है कि इंडिया एट SCO समिट इंडिया ड्रॉ ए रेड लाइन ऑन चाइनास बीआरआई. इसके क्या मायने हैं?

जवाब: इसका अर्थ ये है कि चाइना के लिए एक पॉलिसी है कि यहां सड़क बना दो. यहां इंटर कॉरिडोर बना दो. और कहा जाता है कॉरिडोर बनाते समय इस क्षेत्र का डेवलपमेंट होगा. कनेक्टिविटी आएगी. यह कनेक्टिविटी इज़ अ यूनिवर्सल रिलीफ फॉर एव्री कंट्री. कहा जाता है. लेकिन चाइना के क्या डबेस इंटेंशंस होते हैं. और कनेक्टिविटी ऐसी बनाएगा जैसे तिब्बत में घुस जाएगा यहां पे. वहां कनेक्टिविटी बनाएगा, नेपाल में घुस जाएगा, किसी और बांग्लादेश में घुस जाएगा, पाकिस्तान में घुस जाएगा. 

तो डूबेस कनेक्टिविटी है. तो नरेंद्र मोदी ने कहा कि डुबेस कनेक्टिविटी है ना स्लो रेड सिग्नल है. उनका एक ही कहना है कि आप कनेक्टिविटी करिए. बहुत अच्छी बात है. इन द ह्यूमन इंटरेस्ट, इन द इंटरेस्ट ऑफ़ ओवरऑल डेवलपमेंट ऑफ ऑल द नेशंस जिसे कहते हैं कनेक्टिंग नेशंस. बट एट द सेम टाइम यू मस्ट कीप इन माइंड सर्जनिटी एंड टेरिटोरियल इंटीग्रिटी ऑफ़ दैट पर्टिकुलर नेशन. यह उनका कहने का अर्थ था. व्हिच इज़ अ वेलकम मूव ऑन द पार्ट ऑफ़ द प्राइम मिनिस्टर. 

सवाल: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ की मौजूदगी में एसयू में जारी हुए आतंक विरोधी घोषणापत्र को नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक जीत माना जा रहा है. क्या आप सहमत हैं इस आकलन से?

जवाब: अब्सोलुटली कितनी बड़ी बात है कि जो टेरर के जन्मदाता हैं, टेरर के प्रोटेक्टर हैं, सपोर्टर हैं पाकिस्तान. उनके प्रधानमंत्री बैठे हुए हैं और उनके सामने रेज़ोल्यूशन पास हो रहा है टेरर के खिलाफ और नरेंद्र मोदी का उसमें की रोल है. इसलिए एक अखबार ने लिखा बहुत अच्छा उसने लिखा. उसने लिखा कि नरेंद्र मोदी सीक्स टू डिस्मेंटल टेरर इंफ्रा उसका नाम क्या दिया उसने टेरर इंफ्रा वाइल शरीफ सीट्स एंड लिस टू मोदी इट वाज़ अ ग्रेट डिप्लोमेटिक मोमेंट फॉर इंडिया.

सवाल:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस एसओ समिट में साफ-साफ कहा कि टेररिज्म कांट बी स्ट्रेटेजिक एसेट. आखिर क्या कहना चाहते थे पीएम मोदी?

जवाब:  कहना चाहते हैं इट्स अ वेरी ब्रिलियंट सेंटेंस सबसे पहले. उन्होंने कहा कि नो कंट्री शुड बी अलाउड टू एक्सरसाइज दिस टेररिज्म स्ट्रेटेजिक एसेट. उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवाद को हथियार बना के अपनी विदेश नीति में रखते हैं वो एक ना एक दिन घाटे में रहेंगे और ये बहुत खतरनाक संकेत है. तो क्लियरली वो कहना चाहते थे कि पाकिस्तान में जिस तरह से आर्मी और टेररिस्ट एक हो गए हैं. 

एंड टेररिस्ट आर वर्किंग इन पाकिस्तान एज ए पैरामिलिट्री फोर्सर्सेस ऑफ़ आर्मी. ऐसा लगता है वहां पे जैसे सीएसएफ है यहां पे बीएसएफ है वहां लगता है कि उन्हीं सीएसएफ बीएसएफ जो है वो टेररिस्ट हो गए हैं उनके जनाजे में वो लोग जा रहे हैं आ रहे हैं सब कर रहे हैं दैट विल है तो वो ये कहना चाहते थे कि इट शुड नॉट बी एक्सरसाइज्ड एज ए स्ट्रेटेजिक एसेट दिस इज ऑल.

सवाल: जब SCO ग्रुप फोटो की तस्वीर सामने आती है तो पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ को नजरअंदाज किया जाता है साथ ही वो साइट से निकल जाते हैं और ये वीडियो बहुत ज्यादा वायरल हुआ आप इसको कैसे देखते हैं 

जवाब: देखो पाकिस्तान है लॉस्ट इट्स रेलेवेंस ऑन ऑल इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स इंडिया वाले सीरियसली नहीं लेते पाकिस्तान को. पाकिस्तान वर्चुअली फिनिश्ड फ्रॉम ऑल एंगल्स. और मुनीर जाते-आते हैं दो फोटो खींच जाते हैं उनके. पाकिस्तान इस आउट ऑफ रिकॉग्निशन रेस. इस पर्टिकुलर केस में क्या हुआ कि वहां पे नरेंद्र मोदी जब जा रहे थे तो वहीं पे उनको पुतिन और चाइनी राष्ट्रपति मिले. दोनों ने एकदम से आगे बढ़ के उनका स्वागत किया. कंधे पे पुतिन ने हाथ रखा और इस तरह से कहा हाथ बाकी फिर दोनों साथ चल दिए. अब वो खड़े हुए बेचारे असहाय हो के वो देख रहे थे. 

पाकिस्तान के प्राइम मिनिस्टर क्या करें? तो समझ नहीं आया कुछ फोटो सेशन तो चाहिए ना फोटो चाहिए एक जो है अखबार के लिए तो भाग के वो पुतिन के पीछे पहुंचे और वहां उन्होंने अपने किस्से से अपना फोटो खिंचवाया नरेंद्र मोदी ने देखा नहीं उस तरफ सीधे चल दिए और नरेंद्र मोदी खास बात क्या है कि ही इज़ अ नो नॉनसेंस मैन हम नो हिपोक्रेसी पाकिस्तान से नहीं है तो नहीं है हम फिर उसमें ये डुप्लीकेसी नहीं है कि चलो हेलो कह लो या फिर बाद में वो कर लेंगे नथिंग नोइंग नो नॉनसेंस मैन सो दिस वाज़ अ ग्रेट मोमेंट फॉर इंडिया वेयर पाकिस्तान वाज़ पब्लिकली हमलेटेड एट दैट दैट मोमेंट 

सवाल: SCO शिखर सम्मेलन के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से ग्रुप फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की गई और इसमें से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति को क्रॉप करके हटा दिया गया. फिर फजीहत हुई तो दोबारा से तस्वीर शेयर की गई. ये पूरा मामला क्या था और ये जो पाकिस्तान की बचकानी हरकत है. इसे आप कैसे देखते हैं?

जवाब: इज़ चाइल्डिश एंड फुलिश. एक लाइन में कहा जाए इसको तो जो है और ये 12 लोग तस्वीर के अंदर है. तस्वीर जारी हुई वहां से. आप छाप दो उसको एज़ इट इज़ के नहीं हमें तो शरीफ को बड़ा करके दिखाना उसमें शरीफ दिख नहीं रहे हैं. पाकिस्तानी प्राइम मिनिस्टर दिख नहीं रहे हैं. क्रॉप कर दिया और क्रॉप ऐसा हुआ कि ईरान वाला भी हट गया. नरेंद्र मोदी के साथ-साथ जो है बड़ा हल्ला हुआ बाद में. वै फुलिश ऑन द पार्ट ऑफ़ पाकिस्तानी मीडिया. पाकिस्तान पीएमओ जो है तस्वीर जारी करी भारत के पीएमओ ने. वो प्रॉपर तस्वीर थी. 12 लोग थे उसमें. दे हैड टू विथड्रॉ दैट एंड दे हैव टू रेक्टिफाई ए शेमफुल एक्ट. 

सवाल: SCO में चीन, रूस, पाकिस्तान समेत 10 राष्ट्रों ने तेहरान पर हो रहे हमलों की तो निंदा की लेकिन किसी ने भी अमेरिका या इजराइल का नाम नहीं लिया. ये कैसी हिपोक्रेसी?

जवाब: हिपोक्रेसी नहीं है. ये इंटरनेशनल डिप्लोमेटिक जिसे क्या कह कंपल्शन कहिए, मजबूरी है कभी-कभी कि कुछ होते हैं चाहते हैं करना लेकिन पिन पॉइंट नहीं कर पाते. बिकॉज़ ऑफ़ इट्स इंटरेस्ट. हर कंट्री कहीं ना कहीं इंटरेस्ट होते हैं. तो उसे ओवरऑल क्या करते हैं कि वी आर पार्ट ऑफ दिस कंडेम लेटर बट दे विल नॉट नेम आउट. उसी का पार्ट है. तो दिस इज़ पॉलिटिकल यू कैन से पॉलिटिकल कंपल्शन. दैट्स ऑल एंड इट रिक्वायर्स करज एंड कन्विक्शन फॉर देम टू टेक द नेम्स. तो इन फ्यूचर आई वुड रिक्वेस्ट ऑल दोज़ कंट्रीज दे शुड टेक द नेम वंस दे से दिस थिंग. देयर शुड नॉट बी एनी हिपोक्रेसी. 

सवाल: क्या आपको ऐसा लगता है कि भारत सेंट्रल एशिया को एंटी चाइना प्लेटफार्म के तौर पर डेवलप करना चाहता है?

जवाब: नहीं ऐसा तो नहीं है. लेकिन हां इनडायरेक्टली कहीं ना कहीं तो मन में रहता है ना चाइना कंट्रोल करो. ऐसा कोई भी इक्विपमेंट पॉलिटिकल हथियार ऐसा आता है चाइना कंट्रोल होता है विदाउट बीइंग विज़िबली इंडिया बीइंग ए विलन दैट विल जो है तो वो उस तरह से उसको देखते हैं. बाकी तो चाइना का सवाल है. इंडिया हैज़ रोबस्ट बिज़नेस विद चाइना. आप देखते हैं ना चाइना से कितना व्यापार है भारत का जो है तो इंडिया ओपनली कभी चाइना को अपोज नहीं करेगा इस तरह से लेकिन डिप्लोमेटिकली रिमोट कंट्रोल पे तो मन हर देश का करता है या थोड़ा इसको कंट्रोल करो सो दिस इज ऑल दैट.

सवाल: बेल्जियम के प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान दोनों ही प्रधानंत्रियों के बीच हुई बटरल टॉक्स में क्या कुछ इंक्लूडेड रहा शामिल रहा 

जवाब: बटरल टॉक्स में सबसे पहले तो यह हुआ कि 5 अरब डॉलर का व्यापार करेंगे 2030 तक और सेकंड उसकी रेंज है बटरल टॉक्स थी वो मैंने पढ़ा कि जेम से लेके और डिफेंस तक दैट वे तो वाइड रेंज ऑफ़ दिस थिंग इट वाज़ अ वै सक्सेस इट्स अ गुड मीटिंग जो है नाइस.

सवाल: बेल्जियम के प्रधानमंत्री बाद वैभव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बेल्जियम चॉकलेट से बना हुआ इंडिया गेट लेकर आ रहे थे जो कि रास्ते में पिघल गया. इस दिलचस्प चॉकलेट डिप्लोमेसी को आप कैसे देखते हैं?

जवाब: फर्स्ट इंडिया की लीड थी अखबार मैंने सुबह देखा कि इंडिया बेल्जियम डिप्लोमेसी गेट्स ए लिटिल स्वीटर जो [हंसी] है तो सही है. बेचारे लाए थे मन से और मैंने कहा नरेंद्र मोदी का आकर्षण ऐसा है. नरेंद्र मोदी जाते हैं खुद भी गिफ्ट देते हैं थोड़ा बहुत. तो रेसिप्रोकल गिफ्ट थी. उनको समझ में आया कि चॉकलेट लेके चलें. प्यार की भाव है. तो वहां के प्राइम मिनिस्टर ने कहा भी सही कि भ है तो टेस्टी डिप्लोमेसी है. लेकिन ट्रेवल वो टेस्टी नहीं है. इसका फ्यूचर में थोड़ा ध्यान तो चॉकलेट बिगड़ लेकिन इट वाज़ इन गुड टेस्ट एंड इट शोज़ हाउ पीपल लव एंड अफेक्शन नरेंद्र मोदी इन अदर कंट्रीज आल्सो. 

सवाल: राजनीतिक प्रेक्षक ये मानते हैं कि 12 से 13 सितंबर को जो ब्रिक्स समिट भारत की अध्यक्षता में होने वाला है उस मौके पर भी पीएम मोदी को फिर से अपना कूटनीतिक कौशल दिखाने का मौका मिलेगा. 

जवाब: अब्सोलुटली आई थिंक मस्ट बी वेटिंग फॉर द डे. अपार्ट फ्रॉम डिप्लोमेसी ह डिप्लोमेटिक मिरेकल्स ही विल गव एन अपॉर्चुनिटी टू शोकेस द प्रोग्रेस ऑफ इंडिया ओवरऑल डेवलपमेंट ऑफ़ इंडिया ड्यूरिंग ह 13 ईयर टेन्योर और जो 25 साल पूरे करने जा रहे हैं दैट वे. सेकंड इज़ दैट ही विल आल्सो गेट एन अपॉर्चुनिटी टू फर्दर ब्रांड इंडिया टू फर्दर स्ट्रेंथन द ब्रांड ऑफ़ इंडिया एंड हिज़ ओन ब्रांड आल्सो एज अ ग्लोबल लीडर. आप देखना क्या भगदड़ मचेगी. 

जब आएंगे नरेंद्र मोदी सारे नेता होंगे. कोई यहां फोटो खिंचा रहा है, कोई वहां फोटो खिंचा रहा है. कोई हाथ पकड़ रहा है उनका. कोई कंधे पे हाथ रख रहा है. तो इसे कहते हैं नरेंद्र मोदी के लिए तो ऐसा होगा वो जो शो है क्योंकि इट इज़ वन ऑफ़ द बिगेस्ट डिप्लोमेटिक प्रेजेंस इन द वर्ल्ड. जिसमें 20 देश आने वाले हैं. 18वां सम्मेलन है ये. 12 13 तारीख को होगा ये. तो आपको ऐसा लगेगा जैसे किसी शादी में नरेंद्र मोदी गए हुए हैं. लोग पकड़ रहे हैं, झूम रहे हैं, फोटो खिंचा रहे हैं. वैरी इंटरेस्टिंग, वी विल वॉच इट. जस्ट लाइक द शो स्टॉपर, जस्ट लाइक द शो स्टॉपर, राइटली सेड पूर्णिमा. ही विल बी द टॉस टॉपर इन दिस कॉन्क्लेव जो होने वाला है. 

सवाल:  क्या ब्रिक्स को देखने का चीन और भारत का अपना अलग-अलग व्यू पॉइंट और एजेंडा है अर्थात हु शेप्स ब्रिक्स. 

जवाब: एजेंडा बिल्कुल अलग है. चाइना चाहता है कि मेरा साउथ ग्लोबल का पुश रहे वहां पे वन. सेकंड ही वांट्स टू ब्रिंग दिस इंस्टीट्यूशन टू डेवप दिस इंस्टीट्यूशन एज एन अल्टरनेटिव टू वेस्टर्न पावर सेंटर जी7. उनका यह है. इंडिया क्या है? इंडिया डजंट टेक एनी साइड ऑफ़ एनीबॉडी. 

इंडिया केवल यह चाहता है कि फॉर ए ग्रेटर प्रेजेंस जो है इन द एंटायर वर्ल्ड इन द ग्लोब जो हमारी प्रेजेंस ग्रेटर हो बड़ी हो प्रेजेंस ताकि सब जगह हम जा सकें व्यापार कर सकें बट वी विल नॉट टेक एनी साइट सो दिस इज़ अ बेसिक डिफरेंस बिटवीन चाइना एंड इंडिया स्टैंड बट ऑफ कोर्स बोथ द कंट्रीज हैव डिफरेंट एंबिशन डिफरेंट स्टैंड अबाउट दिस जी 

सवाल: भारत की विदेश नीति का ये कैसा चमत्कार है कि एक तरफ तो आप डायरेक्टली इनडायरेक्टली चीन और रूस जैसी एंटी अमेरिकन फर्सेस के साथ बैठकें करते हैं और दूसरी तरफ अमेरिका और पश्चिमी राष्ट्रों के साथ जबरदस्त कारोबार करते हैं. 

जवाब: आई एम सरप्राइज्ड हाउ नरेंद्र मोदी मैनेजिंग दिस कंट्राडिक्शन. सक्सेसफुली मैनेजिंग इसलिए मैंने कहा ही इज़ अ डिप्लोमेसी मिरेकल. आप देखिए इसको जो है वाकई कितनी हैरानी की बात है. आई थिंक ही इज़ ओनली लीडर एट द मोमेंट इन द वर्ल्ड जो इस तरह से मैनेज कर रहे हैं. डिफरेंट वर्ल्ड पावर्स को भी डिफरेंटली मैनेज कर रहे हैं और कोई थ्रेट नहीं है और डरते नहीं है. कोई थोड़ी बहुत धमकी ट्रंप जैसा दे देता है तो इग्नोर कर देते हैं. क्षमा करो आगे बढ़ो जैसे कहते हैं. इज़ अ फैक्ट ही इज़ मैनेजिंग कंट्राडिक्शन. 

सवाल: कैसी रही रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ मोदी की बटरल मीटिंग? और क्या कहा मोदी ने अपने पुराने मित्र पुतिन से?

जवाब: इट वास अ मीटिंग ऑफ टू माइंड्स. इट वास अ मीटिंग ऑफ टू फ्रेंड्स टू बज जिसे कहते हैं और सबसे इंपॉर्टेंट बात यह है कि रशिया ना तो वह डरे ना भारत डरता है अमेरिका से कि वो लोग क्या सोचेंगे हम लोग जिस तरह से गले मिल रहे हैं हाथ मिला रहे हैं और रशिया ने भी क्लियरली शो किया कि हम दोस्त हैं नरेंद्र मोदी ने शो किया हम दोस्त हैं वी डैम अबाउट अमेरिका और एनी कंट्री टू दैट एक्सटेंट कि हमारी मीटिंग को कंट्रोल करेंगे क्या ये बड़ी इंपॉर्टेंट बात थी.

तीसरी फिर जो उनका आधे घंटे की चर्चा हुई बटरल टॉक्स हुई तो बटरल में वही जो मेन इशज़ हैं सारे आपका एनर्जी है, स्पेस है, दैट, डिफेंस है, ऑल दीज़ इशज़ वर डिस्कस. इट वाज़ अ नाइस मीटिंग. और ओवरऑल तो नरेंद्र मोदी और पुतिन जब मिलते हैं तो संसार देखता है. पहले संसार आश्चर्य करता था. अब संसार ने मान लिया है, सारे देशों ने, वेस्ट ने मान लिया है, ट्रंप ने मान लिया है फ्रेंडशिप ऑफ़ मोदी एंड पुतिन. इट इज़ द ऑर्डर ऑफ़ द डे. तो दे ऑल हैव एक्सेप्टेड. 

सवाल: यूक्रेन युद्ध को लेकर पुतिन के साथ बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दो टूक शब्दों में कहा कि वी मस्ट मूव अवे फ्रॉम एंडलेस वॉर टू वार्ड्स एंड एंड टू द वॉर. इस स्टेटमेंट का वैश्विक इंपैक्ट क्या है और आप क्या कहना चाहेंगे इस बारे में?

जवाब: उन्होंने कहा कि भाई एक दिन का युद्ध वो मानवता को पीछे धकेल देता है. इसलिए अंतहीन युद्ध से हटकर के आप युद्ध को अंत करने की सोचिए. अंत करिए युद्ध का आप जो है और सेकंड फिर उन्होंने कहा वॉर इज नॉट द स्यूशन स्यूशन लाइ ऑन टेबल डायलॉग एंड डिप्लोमेसी ही मे एग्री डिसए्री बट डायलॉग शुड कंटिन्यू ये दो बड़ी इंपॉर्टेंट बातें उन्होंने वहां पे कही कि आप इसको करिए इसको इस तरह से है और तीसरा यह भी कहा चेतावनी में कि ठीक है हम अच्छे मित्र हैं भारत रशिया लेकिन अगर कहीं मानवता का संघार हो रहा है या कहीं क्रिटिकल कुछ ऐसा गलत हो रहा है तो हम चुप नहीं बैठेंगे हम अपनी बात वहां भी उठाएंगे दैट पे तो यह बहुत अच्छा हुआ. देन दे डिस्कस ऑल वेस्ट एशिया ट्रेड सिक्योरिटी इंडियन जो गए थे लोग वहां पे आर्मी में वहां पे रशिया उनके सेफ्टीवटी उन सब की बातचीत हुई. इट वाज़ अ गुड बटरल मीटिंग दैट्स ऑल. 

सवाल: बिशकेक में मोदी और पुतिन एक ही कार और सीनेट में बैठकर वर्ल्ड नोमैट गेम्स के उद्घाटन में पहुंचे. सर इस कार डिप्लोमेसी 2.0 ओका अमेरिका और पश्चिमी देशों को क्या मैसेज किया?

जवाब: वो तो देखते हैं दे एक्सेप्टेड देयर फ्रेंडशिप. ऐसे नॉर्मल परंपरा बन गई. एक व्यवहार बन गया. नॉर्मल आचरण हो गया है. तो पुतिन नरेंद्र मोदी की दोस्ती उनका कार में बैठना, उनका गले मिलना, उनका गप्पे लड़ाना, उनके एक दूसरे के कंधे पे हाथ मारना ये लोगों ने स्वीकार कर लिया है. बट दीज़ फोटोग्राफ्स आर वैरी चार्मिंग दिस टाइम. नरेंद्र मोदी जा रहे हैं, साथ आ रहे हैं, कर रहे हैं. नाइस फोटो टू वॉच. 

सवाल: रूस से भारत को मिलने वाले नए S400 सुदर्शन एयर डिफेंस सिस्टम के प्रस्ताव की भी खबरें सामने आई. तो रक्षा क्षेत्र में इस बैठक के क्या परिणाम है?

जवाब: ऑपरेशन सिंदूर में दिस एस फॉर एंडेड प्लेड ए वेरी क्रिटिकल रोल बड़ा था उसकी डिमांड पूरे वर्ल्ड में होगी उसकी जो है इंडिया ने पहले चार स्क्वाडन लिए थे पांच स्कडन ऑर्डर किया है 500 करोड़ का ऑर्डर है दैट इज़ तो इज़ ए वन मोर पॉजिटिव डेवलपमेंट ऑफ़ प्राइम मिनिस्टर विजिट एंड प्राइम मिनिस्टर टॉक्स विद पुतिन.

सवाल: क्या इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने रूसी सेना में भर्ती हुए भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी और सेवा मुक्ति को लेकर भी पुतिन के साथ कोई चर्चा की है? 

जवाब:  हां विदेश सचिव गए थे वहां पे फार्मेसी ऑफिशियल ने मुद्दे को बड़े अच्छे से इसको उठाया और काफी 227 लोग थे ऐसे 139 तो वापस आ गए हैं 51 समथिंग लोग जो लड़ाई में मारे उसमें लड़ाई होती है तो जीत हार चलती है दैट है तो इंडिया इस ट्राइंग वेरी हार्ड टू ब्रिंग ऑल ऑफ़ देम बैक जो है सो दिस वाज़ वन मोर अपॉर्चुनिटी फॉर इंडियन ऑफिशियल्स टू पर्स्यू दिस एजेंडा विद रशियन गवर्नमेंट एंड दे डीड इट वेल. 

सवाल: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पिजिशियान से 40 मिनट की मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा इंश्योर पीस फ्रीडम ऑफ नेविगेशन. क्या कुछ कहना चाहेंगे आप इस बारे में? और सर क्या युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान के राष्ट्रपति ने मोदी से मांगी है मदद?

जवाब: अबब्सोलुटली. दिस इज मोदी करज एंड कन्विक्शन कि ईरान के राष्ट्रपति की आंखों में आंखें डालकर उनसे कहा कि फर्स्ट टू एनश्योर जब उन्होंने कहा हमें आपकी मदद चाहिए. ईरान के राष्ट्रपति नरेंद्र मोदी से कहा कि आपकी एक्सटेंसिव आपका जो इन्फ्लुएंस है वो हमारे लिए आप यूज़ करिए. तो उन्होंने कहा कि मैं क्लोजली इस काम को करूंगा आपके साथ यूज़ करूंगा काम करूंगा आपके साथ. ठीक है? बट यू हैव टू एनश्योर फर्स्ट ऑफ ऑल दैट यू मस्ट एनश्योर पीस एंड मस्ट एनश्योर फ्रीडम ऑफ नेविगेशन. ये हॉर्मोन का झगड़ा खत्म करिए. आने जाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए. नेविगेशन फ्री होना चाहिए. तो मोदी डिड दिस पार्ट वेल. 

सवाल: SCO में ईरान के राष्ट्रपति और मोदी के साथ हुई मुलाकात के बाद अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने चेतावनी दी कि नो कंट्री शुड हेल्प ईरान अवेड सेंशंस. आखिर कितना सीरियस लेगा भारत इस चेतावनी को. 

जवाब:  भारत इग्नोर कर देगा जैसे पिछले एक साल से कर रहे हैं, डेढ़ साल से कर रहे हैं. डोंट टेक सीरियसली ट्रंप टू दैट एक्सटेंट. यह बहुत सीरियस बात जब तक नहीं हो. नोबडी टेक्स ट्रंप सीरियसली. आप इसको मानिए. सो, दिस इज़ नथिंग सीरियस. अब यह बात जरूर है कि निगाहें थी वाशिंगटन की जैसे मीटिंग हुई और 40 मिनट की मीटिंग हुई. आप देखिए ईरान के राष्ट्रपति के साथ वन ऑफ़ द रेयर मीटिंग्स ऑफ़ ईरानियन प्रेसिडेंट विद एनी प्राइम मिनिस्टर ऑफ द कंट्री. किसी देश की कंट्री के साथ जो है हुई तो उन्होंने कहा वहां पे कि भाई आप कोई ऐसा काम नहीं करेंगे. मीनिंग बाय इंडिया. 

कोई ऐसा काम नहीं करेंगे. हमने प्रतिबंध लगाए हैं. वो उनका निष्प्रभावी हो जाए. वो उनका प्रभाव खत्म हो जाए. ऐसा कुछ काम नहीं हो रहा. करेंगे तो हम आपके भी सेंशन लगा देंगे. यह दो साल से कह रहे हैं इस बात को जो है भारत बहुत ज्यादा परवाह नहीं करता. बस इंडिया मस्ट हैव टेकन नॉट ऑफ इट. दैट वे जो है लेकिन साथ ही फिर उसने यह भी कहा विदेश मंत्री अमेरिकन ने. उसने भी कहा कि एट द मोमेंट डोंट थिंक देयर इज़ एनी ट्रेड डील बिटवीन इंडिया एंड ईरान. तभी कोई चिंता की बात नहीं है. दैट वे जो है. सो दिस इज़ ऑल. 

सवाल: प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान ईरान के साथ चाबहार बंदरगाह और इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को लेकर क्या कोई चर्चा हुई है? 

जवाब: ऑफकोर्स दीज़ आर वेरी क्रिटिकल एंड की प्रोजेक्ट्स बिटवीन इंडिया एंड ईरान. चाबार का तो बड़ा अच्छा शुरू में 1000 करोड़ का इन्वेस्टमेंट था. फिर 2000 करोड़ की बात हुई. 250 करोड़ लग गए अभी. और ट्रंप देखिए ट्रंप ने पिछले दिन अटैक किया तो वहां भी अटैक कर दिया. नुकसान हो गया हमारा. दैट वे वहां पे जो है लेकिन भारत ने कहा कि वी आर कमिटेड टू दिस प्रोजेक्ट. और कॉरिडोर की बात जो आप कह रहे हैं वो भी बड़ा प्रोजेक्ट है. 

7200 कि.मी. का प्रोजेक्ट है. और दोनों प्रोजेक्ट जब ये पूरे हो जाते हैं अगर उस तरह से है तो सारा सामान भारत का जो है वो वेस्ट एशिया में जा सकता है. छोटे रूट से जा सकता है. कम खर्चे में जा सकता है वहां पे और सीधा जाके वहां पे फिट्स वर्क के रास्ते उन देशों में भी वहां पे ईरान वगैरह में जो जा सकता है. तो इंडिया स्टैंड्स कमिटेड इनस्पाइट ऑफ़ ऑल दीज़ अटैक्स एंड ऑल दोज़ इशूज़ जो है. इंडिया स्टैंड्स कमिटेड विद ईरान ऑन दीज़ टू. 

सवाल: ऑन फाइनेंसियल एंड इकोनॉमिक फ्रंट आखिर क्या था चीन, रूस और ईरान का SCO के मंच पर एजेंडा. 

जवाब: उनका एजेंडा देखो प्रेसाइजली क्या है कि इट इज़ एंटी अमेरिका इज़ लूजली एंटी अमेरिका यू कैन से डिसेंटली एंटी अमेरिका आप कह सकते हैं. तो बेसिकली क्या है उसमें? सबसे पहले दे वांट डीडोलराइजेशन. डॉलर का जो भय है वो खत्म करो अक्रॉस ग्लोबल साउथ आल्सो. वन दे वांट एन अल्टरनेट पेमेंट सिस्टम इन प्लेस ऑफ Swift जो अमेरिका कंट्रोल करता है, डॉलर कंट्रोल करता है. तीसरा वो चाहते हैं कि जो बटरल ट्रेड बिटवीन कंट्रीज है हम लोगों के बीच जो है वो लोकल करेंसी में होना चाहिए. ऑल गुड सजेशंस एंड अल्टीमेटली द एम टू वीकन अमेरिकन डॉलर. इज़ अ पार्ट ऑफ़ पॉलिटिक्स. फाइन. सो इंडिया. 

सवाल:  ताशकंद और बिकेक दोनों ही जगहों पर पीएम मोदी के योग सत्रों को कैसे देखते हैं आप?

जवाब: योग इज फाइन. मोदी तो आजकल क्या इंटरनेशनल ब्रांड एंबेसडर है इंडियन योगा के देखा जाए तो तो वहां पर भी वह गए तो उन्होंने योगा करके दिखाया ट्रेन किया यूथ और दूसरे जो लोग थे वंदे मातरम गीत बजा था उस पे भी योगा किया उन्होंने दिल जीता लोगों का वहां के लोग भी सोचते होंगे कैसा प्राइम मिनिस्टर योगा भी जानता है योगा भी करता है तो ये उनका जो पब्लिक कनेक्ट है ना मैन टू मैन कनेक्ट है उसका पार्ट है वेलकम जैसे 

सवाल: किरगिस्तान यात्रा के दौरान भारत और किरगिस्तान के बीच में कौन से बड़े समझौते हुए?

जवाब: बेसिक समझौता तो इन कंट्री के बीच में वही है जो स्टैंडर्ड समझौता होता है वही आपका डिफेंस है आपका एनर्जी है मेडिकल है आपका डिजिटल पेमेंट है इसमें यूपीआई भी था इसके अंदर से इस तरह के बेसिक जो समझौते हैं सारे इस तरह के इट वाज़ ए छोटा देश है छोटे देश के साथ कोई बहुत बड़े समझौते नहीं होते लेकिन ठीक है हमारे मैत्री राष्ट्र हमारे बिजनेस पार्टनर्स हैं उनमें एक देश और जुड़ा 

सवाल:  इस पूरे दौरे के दौरान में जो किरगिस्तान के रक्षा अधिकारी और वहां के स्थानीय लोग हैं उन्होंने बड़ा भाई भाई बताया भारत को प्रधानमंत्री मोदी को. आप इसे कैसे देखते हैं?

जवाब: नेचुरली नेचुरल रिएक्शन वहां छोटी सी सेना है. उनके लोग आए थे एनडीए में यहां पे नेशनल डिफेंस एकेडमी में ट्रेनिंग करने वो ट्रेनिंग करके गए तो वहां कोई जॉइंट एक्सरसाइज होती हैं. मिलिट्री एक्सरसाइज उनमें थे वो लोग तो गए तो वो लोग गदगद थे कि भारत के लोग आए हैं. तो उन्होंने कहा कि आप हमारे मित्र नहीं आप हमारे बड़े भाई हैं. तो अच्छी बात है. अभी गले मिलो. फाइन. 

सवाल: किरगिस्तान के बिक में पीएम मोदी के लिए खासतौर पर शाकाहारी व्यंजन बनाए गए. जैसे कि गुजराती थेपले की बात करें या फिर किरगिस के प्लोब और लगमन की बात करें. इसे किस रूप में देखते हैं आप?

जवाब: इट्स लव एंड अफेक्शन फॉर मोदी बाय द होस्टिंग कंट्री जो है उनको पता है कि मोदी एक अच्छे स्वभाव के व्यक्ति हैं और एक अच्छी रुचि लेते हैं इन सब कामों में. ही इज़ नॉट 24 * 7 ओनली प्राइम मिनिस्टर. ही इज़ अ गुड ह्यूमन बीइंग आल्सो. ए मैन ऑफ़ टेस्ट. और गुजरात से बिलोंग करते हैं तो होता है उनको अच्छा खाना खिलाओ. तो नाइस. 

सवाल: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किरगिस्तान रिपब्लिक यात्रा की क्या उपलब्धियां रही हैं? 

जवाब: उपलब्धियां देखो सबसे बड़ी तो मैंने आपसे कहा ना कि मेन उपलब्धि ये है कि एक और राष्ट्र को आप जोड़ रहे हैं. एक और राष्ट्र को जहां कोई जाते-आते नहीं है वहां जो प्रेसिडेंट बने थे तो पहली बार नरेंद्र मोदी से मिले. तो आपका रिश्ता होता है और बाकी सब जो रूटीन फॉर्मेट्स हैं बटरल टॉक्स के वो सारे वहां पे थे. दिस इज ऑल. 

सवाल: पीएम मोदी ने बिशकेक में आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल नाक से की जाने वाली आवाज़] पाशनियान से भी मुलाकात की थी. सर इस मुलाकात के एजेंडे क्या हो सकते हैं?

जवाब: अर्मेनिया इज़ अ स्माल कंट्री लेकिन आजकल क्या छोटे-छोटे देश की भी पॉलिटिकल रेलेवेंस डिप्लोमेटिक रेलेवेंस होती जा रही है और इंडिया जो कि उनको आर्म सप्लाई करता है, छोटे आर्म सप्लाई करता है तो हमारे कस्टमर हैं वो. तो गए वहां देखा सबसे मिले और जो है और जो अपने रूटीन सेक्टर्स हैं अपना इंडियन टेक्नोलॉजी है डिजिटल पेमेंट्स हैं दैट पे छोटी-मोटी डिफेंस की बात है डिफेंस का तो बेच ही रहे हैं उनको जो है एनर्जी की बात है ये सब बातें वहां पे हुई तो गुड एंड नॉर्मल एंड रूटीन डिप्लोमेटिक विजिट टू दिस कंट्रीज 

सवाल: प्रधानमंत्री मोदी बिकेकिक में छठवें वर्ल्ड नोमेड गैंग्स के सांस्कृतिक समारोह यानी कि उद्घाटन समारोह में शामिल हुए और भारतीय दल का खड़े होकर उन्होंने उत्साह बढ़ाया इसे आप कैसे देखते हैं? 

जवाब: अब्सोलुटली फाइन ही इज अ साइन ऑफ अ गुड लीडर एनकरेजिंग लीडर जिसे कहते हैं अब इंडिया के गए हुए हैं लोग एथलीट्स वगैरह 87 का शायद वहां था कंटिंजेंट तो 73 तो एथलीट्स थे इंडिया के उसमें और 110 देशों के लोग आए हुए थे तो भारतीय दल जब वहां से गुजरा होगा मार्स पास करता होगा तो नरेंद्र मोदी खड़े हुए तो ये एक उत्साह भरता है लोगों में कि भारत का प्रधानमंत्री आज हमारे उत्साह के लिए यहां बैठा हुआ है तो वेरी एनकरेजिंग मूव ऑन द पार्ट ऑफ़ प्राइम मिनिस्टर 

सवाल: उज़्बेकिस्तान के 20 वर्षीय ग्रैंड मास्टर सिंध रूफ और भारत के गोकेश के बीच होने वाले चेस मुकाबले साथ ही कुराश और कबड्डी जैसे खेलों का जिक्र प्रधानमंत्री मोदी ने क्यों किया?

जवाब: यह विशेषता है नरेंद्र मोदी की. यूथ हो, खेल हो, कुछ और हो, हर एक को कूटनीति से जोड़ देते हैं. डिप्लोमेसी से जोड़ देते हैं. उसको इंटरेस्टिंग बना देते हैं. और इसने जो लास्ट ईयर का विनर है गोल्ड मेडल जिसने वर्ल्ड प्राइज लिया वो गोवा में आया था जो है प्रधानमंत्री को मालूम रहा होगा जो है अब इंडिया का जो आदमी है वो दोनों कम्पीट करेंगे एक दूसरे को. इंडिया वाला और वो वाला जो है तो दोनों को शुभकामनाएं दी उन्होंने. तो ऐसे क्या है कि नरेंद्र मोदी डजंट लूज एनी चांस टू कनेक्ट विद द पीपल विद यूथ एंड विद द स्पोर्ट्स पर्सन. एंड दिस इज आल्सो वन ऑफ दैट इंसिडेंट इन दैट सीरीज. 

सवाल: एक बार फिर से हम रुख करते हैं उज्बेकिस्तान का. भारत का यूपीआई अब उज्बेकिस्तान में भी चलेगा. सर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का जिस तरीके से विस्तार हो रहा है भारत के लिए इसके मायने क्या है?

जवाब: बहुत है. इट्स अ मोमेंट ऑफ़ प्राइड फॉर इंडिया इन द एंटायर वर्ल्ड. हमारा यूपीआई जितना अच्छा है, जितना पॉपुलर है शायद संसार में किसी का नहीं है. वी आर नंबर वन इन यूपीआई. तो अब क्या है? प्राइम मिनिस्टर वहां गए हैं तो सेंट्रल एशिया के इस देश में भी यूपीआई का विस्तार होगा वहां पे और डिजिटल पेमेंट और ये सारा होगा. 

सवाल: ताशकंद में यांगी उज़्बेकिस्तान और गुजरात की गिफ्ट सिटी की प्लानिंग को लेकर कुछ मेगा प्रोजेक्ट भी साइन हुए हैं मिलकर. इसे आप कैसे देखते हैं? 

जवाब: जब नरेंद्र मोदी वहां पर गए तो ताशकंद के राष्ट्रपति के साथ वहां पर गए तो उन्होंने उन्हें बताया कि हमारे यहां न्यू ताशकंद बनाने जा रहे हैं हम एक मेगा सिटी वहां पे जो है तो नरेंद्र मोदी को उसमें अहमदाबाद की गिफ्ट सिटी एक बहुत बड़ी सिटी बनी है वहां पे इज अ फ्यूचर ऑफ इंडिया यू कैन से कंट्री का जो एक चेहरा है वो विदेशों में यहां निवेश करने के लिए और देश के लोगों का निवेश करने के लिए तो उसकी याद आई तो उन्होंने कहा हमने गिफ्ट सिटी बनाया वहां पे आप आइए देखिए अर्बन प्लानिंग और इसमें अपन को और आगे बढ़ के दोनों मिलके और अच्छा ऐसा क्या कर सकते हैं? तो वहां का डेलीगेशन जो है यहां अहमदाबाद आएगा सिटी में जाएगा और फिर देखेंगे कि क्या आपस में और कैसे हो सकता है. तो यह भी तय हुआ कि थ्री स्टेट्स एंड थ्री सिटीज इंडिया एंड उजाकिस्तान दे विल डेवलप एज अ सिस्टर सिटीज एंड सिस्टर स्टेट्स जो है तो इट्स वन मोर गुड अपॉर्चुनिटी फॉर इंडिया टू इनवाइट दोज़ पीपल फॉर इन्वेस्टमेंट इन इंडिया दैट इज़ एट अहमदाबाद गिफ्ट सिटी. 

सवाल: उज्बेकिस्तान ने भारतीय नागरिकों के लिए 30 दिन की वीजा फ्री एंट्री का ऐलान किया है. इसका दोनों देशों के रिश्तों पर क्या इंपैक्ट आप देखते हैं?

जवाब: वेरी नाइस. वीजा फ्री हो जाए तो क्या चाहिए? टूरिस्ट आजकल वैसे परेशान है. कहीं दुबई बहुत से लोग जाना छोड़ दिए हैं और कई जगह नहीं है. एक और कंट्री जुड़ गया. इसके अंदर जो है वीजा फ्री है जाइए. अभी क्या है कि 12 या 14 डायरेक्ट फ्लाइट्स चल रही हैं. इंडिया और वहां के बीच में जो है ये बढ़ जाएंगी. तो सर्टेन इट इज गोइंग टू ब्रिंग मोर बिज़नेस इंडियन टूरिस्ट कंपनीज़, इंडियन होटल्स और जो भारत के लोग हैं वहां जाने वाले हैं. तो मोर बिज़नेस टू दोज़ कंट्रीज आल्सो. और वाइसवरसा क्या है कि म्यूचुअल जो है ट्रैवलर्स आएंगे जाएंगे. इट इज़ अ वेरी गुड मूव फॉर टूरिज्म इंडस्ट्री. 

सवाल: भारत और उज्बेकिस्तान के बीच में बौद्ध विरासत स्थलों के संरक्षण और 100 शास्त्री स्कॉलरशिप को लेकर जो 11 समझौते हुए हैं, उसे आप कैसे देखते हैं? 

जवाब: अच्छा है तो अब प्रधानमंत्री जहां जाते हैं तो उस देश में पहले देखते हैं भारत की संस्कृति कहां है? भारत का इतिहास कहां है? उसको रिकॉग्नाइज करें. वहां जाएं उसको वापस खड़ा करें. यह बुद्ध और महात्मा गांधी का देश रहा है ना दैट वे जो है तो जाते हैं तो उनको देखते हैं वहां पे जो है अब इसी प्रकार से क्या है कि वहां हिंदी को प्रोत्साहन देने के लिए यह 100 पुरस्कार बनाए गए हैं लाल बहादुर शास्त्री के हिसाब से जो है तो वो जाते हैं तो संस्कृति जोड़ते हैं तो ये क्या है कि नरेंद्र मोदी का कल्चरल कनेक्ट है बिटवीन द टू कंट्रीज जिसको प्रमोट करते हैं हर विजिट में इसका खास तौर पे ध्यान रखते हैं तो ये जो ताशकंद में हुआ ये उसी श्रंखला की एक और कड़ी है दोनों देशों के लोगों को और नजदीक लाने का उनको सांस्कृतिक रूप से इंटेलेक्चुअली इमोशनली आपस में जोड़ने का एक और प्रयास

सवाल: ताशकंद में ही लाल बहादुर शास्त्री स्मारक जाना महात्मा गांधी केंद्र जाना वहां से क्या संदेश दिया पीएम मोदी ने 

जवाब: द सेम लोकल कनेक्ट भारतीय लोगों को याद दिलाना खुद को भारतीय महसूस करना कि आज मैं आया हूं तो मेरी जड़े भारत में हैं भारत की संस्कृति भारत का साहित्य भारत का इतिहास के अवशेष क्या है यहां अब ताशकंद तो आप जानते हैं लाल बहादुर शास्त्री समझौता करके आए थे 1966 में तो ही उनका देहांत हो गया था तो एक स्मारक बन गया वहां शास्त्री जी के नाम का तो गए तो वहां पे गए इस तरह से वहां की जो यूनिवर्सिटी है वहां महात्मा गांधी का एक वह बना हुआ है सेंटर तो नेचुरली जो जाते हैं तो श्रद्धा देते हैं तो ही इज़ वेरी पर्टिकुलर टू रिमेंबर एंड टू पे होमेज टू इंडियन लीडर्स इन दोज़ कंट्रीज तो उसी का पार्ट है गए वहां पे तो चलो यहां जा के आते हैं अच्छा लगता है सबको. 

सवाल: ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी ने डिनर के बाद कहा कि अरे आपने तो ताशकंद में हिंदुस्तान खड़ा कर दिया तो इसके पीछे का सांस्कृतिक माहौल क्या है? 

जवाब: सांस्कृतिक माहौल तो देखो जब वो वहां गए उन्होंने गुजराती सब ढंग का देखा इस तरह से कि लोग घरबा कर रहे हैं गुजरात के लोग और अहमदाबाद से बड़ौदा से ज्यादा अच्छा गरबा कर रहे हैं तो मन में आता है ना और फिर सारा शहर तिरंगे झंडे से हुआ था वहां आप शहर में निकलते हैं तो तो मन का भाव तो आता है नहीं कि यार आपने इंडिया खड़ा कर दिया यहां तो आपने यहां पे भारत खड़ा कर दिया.

सवाल: ताशकंद यूनिवर्सिटी के छात्रों ने पीएम मोदी की लिखी कविताओं का उज़्बेक भाषा में पाठ किया इस साहित्यिक जुड़ाव को आप कैसे आकते हैं?

जवाब: इट्स वन मोर केस फॉर मोदी पॉपुलरिटी अक्रॉस इंडियन बॉर्डर्स. आप देखिए अब इतनी दूर जो है 1000 मील दूर जो है नरेंद्र मोदी के ग्रंथ को लोग पढ़ रहे हैं. उनकी जीवनी को पढ़ रहे हैं. उनकी किताब को पढ़ रहे हैं. उसको ट्रांसलेट कर रहे हैं. पहले समझ रहे हैं. फिर उसको छपवा रहे हैं. फिर लाइब्रेरी में रख रहे हैं. और ये तो चांस था कि नरेंद्र मोदी चले गए. वरना वो तो एकलव्य के इतने अपना पूजा कर रहे थे. उस पुस्तक की जो है तो बड़ा अच्छा लगा उनको कि जिसके लिए पुस्तक लिखी है हमने वो व्यक्ति खुद आज यहां मौजूद है ए मोमेंट ऑफ़ प्राइड फॉर एवरीबॉडी और मोमेंट ऑफ़ प्राइड फॉर नरेंद्र मोदी आल्सो कि विदेशों में उनके इस तरह के एकलव्य बैठे हुए हैं कहां-कहां. 

सवाल: आखिर इंटरनेशनल और वेस्टर्न मीडिया में प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का रिस्पांस क्या रहा?

जवाब: बहुत अच्छा रिस्पांस था भारत से भी ज्यादा अच्छा रिस्पांस था सरप्राइजिंगली न्यू टाइम्स ने लिखा कि नरेंद्र मोदी ऐसे नेता है ट्रंप की धमकियों से डरते नहीं है अपना स्वतंत्र नीति स्वतंत्र हिसाब से अपना चलते हैं बड़ी बड़ी बात है. न्यूयॉर्क टाइम्स का रिएक्शन है. ये फिर जो है चाइना वाले [गला साफ़ करने की आवाज़] ने मेंशन किया कि बहुत कवरेज इनको इस तरह से मिल रहा है. रशिया ने कहा बहुत अच्छा कवरेज मिल रहा है. चाइना का मीडिया तो एक कदम और आगे चला गया. उसने कहा कि नरेंद्र मोदी केवल एक फॉर्मल ग्लोबल लीडर नहीं है. ही इज़ सच अ ग्लोबल लीडर हु इज़ हैविंग इंपैक्ट ऑन ग्लोबल डिसिशन ग्लोबल पॉलिसीज. ये चाइना कह रहा है. तो मोदी वंस अगेन इन दिस विजिट इज़ ऑलमोस्ट यू कैन से इज़ वर्चुअली अ हीरो इन फॉरेन मीडिया ड्यूरिंग दिस विजिट आल्सो. 

सवाल: अपनी विदेश यात्रा के दौरान ही प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर से देशवासियों से अपील की कि जरूरत ना हो तो सोना खरीदने से बचें. इस अपील की टाइमिंग के बारे में आप कुछ कहना चाहेंगे?

जवाब: टाइमिंग ऐसा है कि मोदी इज़ अ मैन ऑफ़ करज एंड कन्विक्शन. कोई फैसला लिया, कोई आलोचना हुई पीछे नहीं हटेंगे. विदेश में थे तो किसी ने कह दिया जीडीपी को लेकर के कि जीडीपी अगर ऐसी अच्छी हो गई है तो आप विदेश यात्रा जाने के लिए क्यों रोक रहे हैं? सोना खरीदने आप क्यों रोक रहे हैं? उसका जवाब उन्होंने वहां से दिया. पीछे नहीं हटे. उनका आज भी मेरा स्टैंड यही है कि सोना कम खरीदो और विदेश यात्राएं कम करो ताकि फॉरेन एक्सचेंज बच सके. फॉरेन एक्सचेंज बचेगा तो रुपया मजबूत होगा. और ये क्या है प्रपचुअल प्रोसेस है. चार दिन का चार महीने का प्रोसेस नहीं है. और अपील का असर है उनका. आप देखिए जब से उन्होंने अपील की थी कितनी बड़ी मात्रा में इन टर्म्स ऑफ़ फिगर्स जो है ना सक्सेस है. 

सोना खरीदने की मात्रा कितना कम विदेश यात्रा कितनी कम लोगों ने की है. जहां तक विदेश यात्रा पे न जाने की नरेंद्र मोदी के अपील का सवाल है. आप देखिए मेरे दफ्तर में ही कुछ दिन पहले थी आदिति नागर पॉलिटिकल एटर अब चली गई हैं. तो उन्होंने कहा कि मैं जा रही हूं क्वालामपुर अपने हस्बैंड और बच्चे के साथ. थोड़े दिन में मालूम पड़ा गई नहीं. पूछा क्यों नहीं गए कि मेरे हस्बैंड पर नरेंद्र मोदी के अपील का असर हो गया. उनका विदेश नहीं चलेंगे. तो कहां जाएंगे? उत्तराखंड चले गए. लुक एट द कॉमन मैन कि नरेंद्र मोदी के अपील को कितना सीरियसली लोग ले रहे हैं. तो ये तो क्या नेशनल लीडर का एक नेशनल कैंपेन होता है. एक आह्वान होता है. उसे वो चैनल्स ने यहां जो उसको क्रिटिकल करने की कोशिश की तो नरेंद्र मोदी ने कहा नहीं मेरा फैसला तो वही है. मैं तो वहीं खड़ा हूं और मेरे फैसले में मेरिट है. एंड आई एनकरेज एंड कन्विक्शन कि मैं आलोचना से पीछे नहीं हटूंगा इस बात से. और मैं रिपीट करूंगा उस बात को कि यस सोना मत खरीदो. विदेश कम जाओ. एंड आई एम राइट इन माय वे. 

सवाल: आखिर नरेंद्र मोदी ने कैसे किया 7.8% जीडीपी का यह चमत्कार?

जवाब: उन्होंने केवल चमत्कार ही नहीं किया बल्कि विदेश से Instagram पे थे और उन्होंने उसको अचीव किया और कहा कि भारत आज खुश है और सचमुच आश्चर्य था कि लोग इतनी आलोचना करते हैं कहीं कि ये कम है वो कम है सारे माहौल के बावजूद आलोचना छोड़िए मैं कहता हूं वर्ल्ड की आज जो रेस्ट्रिकशंस हैं डेवलपमेंट की जो वॉर है वॉर के रेस्ट्रिकशंस हैं सप्लाई के रेस्ट्रिकशंस है हॉर्मोस के इश्यूज है हम ईरान और अमेरिका के इश्यूज हैं रूस यूक्रेन के के इशज़ हैं. इन सबके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था पे इसका कोई प्रभाव नहीं है. बल्कि रादर मोर पॉजिटिव प्रोएक्टिव प्रभाव है कि आपकी जो ग्रोथ रेट है पहले से बढ़ गई और 7.8 हो गई जो है इज़ अ मिरेकल वास्तव में है.

उस मिरेकल को उन्होंने रिकॉग्नाइज़ किया और विदेश में वीडियो करके देशवासियों को कहा कि इज़ अ मोमेंट ऑफ़ प्राइड फॉर ऑल ऑफ़ अस. अब देखो विपक्ष तो कोई भी उसका काम आलोचना करना होता है. उन्होंने आलोचना की उस बात की जो है आंकड़ों के जाल तो ऐसा नहीं जग फिगर्स. आप कैसे कर सकते हैं? लेकिन मैं इस बात से कन्विंस हूं. इट्स अ जेन्युइन डाटा 7.8 एंड इट इज़ अ वेरी गुड साइन फॉर इंडियन इकॉनमीज़ ग्रोथ. ये मिरेकल है. तो देश की लीडरशिप विदेश में भारत को और 145 करोड़ से ज्यादा भारतीयों को मजबूती देने की कवायद में लगी हुई है. और बॉलीवुड की एक भाषा में एक कहा यह जाता है कि पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त. क्योंकि SCO से लेकर ब्रिक्स तक ग्लोबल स्टेज तक भारत की कहानी अभी तो बहुत आगे जानी है. प्रधानमंत्री मोदी की डिप्लोमेसी ने दुनिया को यह समझा दिया है कि दोस्ती सबके साथ हो सकती है. लेकिन फैसले हमेशा भारत के हित में होंगे. तो दिल से भी, दोस्ती से भी, डिप्लोमेसी से आज का संदेश बहुत साफ है. भारत की आवाज सिर्फ सुनी नहीं जाती है बल्कि गौर से सुनी जाती है.

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