मुंबई: भारत 24 के खास कार्यक्रम 'प्रवासी राजस्थान SUMMIT' में महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने शिरकत की. इस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र व देश की राजनीति से जुड़े तमाम सवालों का बेबाकी से जवाब दिए.
सवाल: महाराष्ट्र की राजनीति अपने आप में बहुत इंपॉर्टेंट है. महाराष्ट्र में जब भी कोई हलचल होती है तो चर्चा दिल्ली में उसकी जरूर होती है और अभी रिसेंटली क्योंकि दिल्ली में पार्लियामेंट सेशन मानसून सत्र चला है. महाराष्ट्र के दलों का इनडायरेक्ट समर्थन सरकार को कई चीजों में मिलते-मिलते नजर आया बट अल्टीमेटली उन चीजों को लेकर सदन में चर्चा नहीं हो पाई जिसमें मैं खासतौर पर डीलिमिटेशन की बात करती हूं. यहां से संकेत आए, समर्थन मिलेगा और नंबर गेम बहुत इंपॉर्टेंट रहा. लेकिन संसद के अंदर मानसून सत्र के दौरान हो रहा हंगामा देश की आर्थिक राजधानी में कैसा संदेश देता है?
जवाब: मेरे दृष्टि से संसद ये प्लेटफार्म है, व्यासपीठ है चर्चा का. संसद ये मौका रहता है विरोधियों को अपनी बातों को उजागर करने का. संसद यह इस प्रकार का प्लेटफार्म है जहां पर सरकार जनहित में क्या करना चाहती है उसको रखने का और जनता की आवाज वहां पर गूंजे जो छात्रों की गूंज करने वाले हैं वह संसद में गूंजना चाहिए था मैं छात्रों की गूंज का विरोधी नहीं हूं लेकिन संसद के गूंज को रोकना यह पाप मानता हूं. संसद में नागरिकों की आवाज गूंजनी चाहिए जो भी मुद्दे हो बात तब बनेगी जब सत्ता दल यह कहे कि हम चर्चा के लिए तैयार नहीं है. लेकिन बात चिंता की तब होती है जब विरोधी यह कहे कि हमको चर्चा नहीं करनी है. तो मुझे लगता है जनहित विरोधी भूमिका यानी संसद में हंगामा करना है. जरूर प्रदर्शन का अपना एक महत्व है. तो संसद के बाहर संसद के भवन में उस प्रदर्शन का अपना महत्व रखना चाहिए. लेकिन पूरा सत्र ही प्रदर्शन और हंगामे जाए तो हम ना केवल नागरिकों के जनता के हित में कर रहे हैं लेकिन दुनिया को भी संदेश दे रहे हैं कि यहां पर संसद न चलाने देना यह हमारी डेमोक्रेटिक वैल्यूज है. परम पूज्य भारत रत्न डॉ. बाबा साहब आंबेडकर जी ने जो हमको संवैधानिक व्यवस्था दी है. उस व्यवस्था में संसद का चलना, संसद का सत्र होना, उसमें चर्चा होना इसका महत्व है. और उन मूल्यों का हनन करना यह पाप विरोधी दल ने किया ऐसा मेरा मानना है.
सवाल: सीजेपी जिसने दिल्ली के जंतरमंतर का प्रोटेस्ट लीड किया वो अब महाराष्ट्र में अ कुछ मिनिस्टर्स को टारगेट कर रही है. उस पर आप कुछ कहना चाहेंगे?
जवाब: हर दल हर संगठन अपनी बात कह सकता है. जहां तक वो बात संवैधानिक तौर से संवैधानिक ढांचे के अंदर है तो उसके ऊपर शंका लेना चाहिए. ऐसा मेरा मत नहीं है और इसके लिए कोई भी दल हो सीजेपी हो या कोई भी हो यह अपनी बात कहता है तो उसको बात करने का अधिकार भी है और जहां तक सरकार इस नाते हम बैठे हैं तो उन्होंने जो बातें उठाई है उसमें तथ्य है तो उसके ऊपर कार्रवाई करना तथ्य नहीं है तो उसका जवाब देना और तथ्य के आधार पर विपर्यास अगर राजनीति का हो रहा है तो उसका राजनैतिक जवाब देना ये तीनों मूल्यों को मैं मानता हूं और इसके लिए अपनी बात कहना उसमें कोई गुनाह है ऐसा मैं नहीं मानता हूं.
सवाल: अभी रिसेंटली राष्ट्रगान जन गण मन के समान राष्ट्रगीत वंदे मातरम को एक लीगल प्रोटेक्शन मिली है. अह सब कुछ संविधान के हिसाब से है. सब कुछ संविधान निहित है और उसके बावजूद विपक्ष का एक हंगामा देखने को मिला और वो सिर्फ दिल्ली में अपोजिशन तक सीमित नहीं था इंडिया अलायंस में. वो महाराष्ट्र में भी देखने को मिला. तो आपको लगता है कि इस तरीके का विरोध वंदे मातरम के लिए करना अनुचित है और यह नहीं करना चाहिए?
जवाब: 100 आने बात कहनी है तो कांग्रेस का जो रेजोल्यूशन उनके आज के बैठक में अब की बैठक में जो हुआ जो 1937 के अपने कांग्रेस के रेजोल्यूशन के आधार पर वंदे मातरम को तोड़ने का है. ऐसा दल कैसे हो सकता है कि जो वंदे मातरम इस गीत को ही तोड़ना चाहता हो. ऐसा दल रेजोल्यूशन कैसे कर सकता है कि जो वंदे मातरम इस गोद को दो भागों में बांटना चाह रहा हो. यह ऐसी दल की मानसिकता कांग्रेस की ऐसी क्यों है कि वंदे मातरम को तोड़ने से एक पर्टिकुलर समाज के लोगों के वोट के हितों की रक्षा जिसको अपीजमेंट पॉलिसी कह सकते हैं, वह करना चाहते हैं. इसके लिए सवाल सीधा कांग्रेस से है. आप राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के साथ हैं. तो रेोल्यूशन बदलिए. अगर आप वंदे मातरम को तोड़ना चाहते हैं तो क्यों तोड़ना चाहते हो? सवाल यह है कि जब देश के संसद ने कानून बना लिया तब उस कॉनन को भी तोड़ेंगे लेकिन वंदे मातरम तोड़ के रहेंगे. यह टुकड़े-टुकड़े गैंग की मनोस्थिति कांग्रेस की क्यों है? कांग्रेस अब टुकड़े-टुकड़े गैंग को जो चाहिए वह बातें कह रही है और वह भी सिर्फ कुछ वोटों के लिए देश हितों के लिए नहीं यह बात जनता तक हम लेकर जाएंगे.
सवाल: आप कहते हैं कि अपोजिशन मुस्लिम अपीज़मेंट करता है. तो अपोजिशन यह कहता है कि फिर आप भी तो आप भी तो अपीज़मेंट करते हैं. आप भी तो हिंदुत्व के नाम पर वोट बैंक को कंसोलिडेट करने की कोशिश करते हैं. आप भी तुष्टीकरण करते हैं. आपके यहां से बयान आता है एक है तो सेफ है. तो ये फिर आपके आरोप उन पर और उनके आरोप आप पर अलग कैसे हैं?
जवाब: दोनों बातें अलग है. भारतीय जनता पार्टी तिरंगा यात्रा करती है. कांग्रेस क्यों नहीं करती है? हम राष्ट्रवाद के साथ हैं. हम पूरे वंदे मातरम गान का कानून करते हैं. कांग्रेस उसको तोड़ना चाहती है. यह बात क्यों है? हम बात करेंगे कश्मीर से लेकर 370 हटाकर. देश एक रहे. कांग्रेस 370 का विरोध करती है. यह देश के हितों के विरोध में बात क्यों करती है? हम अगर यह कहते कि एक देश एक कानून एक जीएसटी इस कानून से कह रहा हूं. कांग्रेस इसका विरोध कर रही है. यह देश विरोधी बात क्यों करती है? हम अगर यह कहते एक भारत श्रेष्ठ भारत उसका विरोध कांग्रेस क्यों करती है? हम यह कहते कि एक देश एक राशन कार्ड उसका विरोध कांग्रेस क्यों करती है? हम एकता की बात करते हैं. कांग्रेस विघटन की बात करती है. सवाल यहां है. हम राष्ट्रवाद की बात करते हैं. विघटनवाद की बातों का समर्थन कांग्रेस करती है. भारत के अगर न्यायालय ने जिनको दोषी करार कर दिया और उनको फांसी की सजा दी न्यायालय ने तो कांग्रेस उन व्यक्तियों का समर्थन करती है जो कहते हैं अफजल तेरे कातिल जिंदा है. हम शर्मिंदा है. यह कांग्रेस क्यों कहती है? और इसके लिए लांगुल चालन राष्ट्र विरोधी विघटनवादी बातें करने के समर्थन में कांग्रेस है.
जरूर हम राष्ट्रवादी हैं. और इसके लिए हमारा नारा है जरूर कि सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास, सबका विश्वास हमने भेदभाव नहीं किया. हम देश की बात कर रहे हैं. और जरूर हिंदू हित की बात क्यों नहीं करना चाहिए? हिंदू हित की बात करने से कांग्रेस में पेट क्यों दुख रहा है? हमने कहा अगर व्यवस्था में अगर विभागशाह माइनॉरिटीज की हित गरीबी सुनाते हैं उसको मिलेगा. प्रधानमंत्री आवास योजना में माइनॉरिटी को भी मिलेगा और अन्य को भी मिलेगा. राशन माइनॉरिटी को भी मिलेगा. सबको मिलेगा. आपको उसको माइनॉरिटी डिपार्टमेंट से क्यों देना है? बात यहां पर है और इसके लिए अपीजमेंट वह करते हैं. राष्ट्रवाद के बाद हम करते हैं.
सवाल: इसमें तो कोई वोट बैंक की बात नहीं है जब कांग्रेस ये कहती है और कांग्रेस के तमाम लीडर्स कहते हैं मैं भी दिमागी नक्सल हूं. प्रधानमंत्री कहते हैं कि दिमागी नक्सल कौन है? किसी पार्टी पर तो प्रहार नहीं करते. तो फिर यहां पर तो कोई अपीज़मेंट भी नहीं है.
जवाब: सीधी बात है ना जो है उसने कबूल कर लिया. बात तो प्रधानमंत्री जी ने देश को ये कहा कि हमको दिमागी नक्सलों से बच के रहना चाहिए. सावधान. अब मैं दिमागी नक्सल हूं. तो क्यों है भाई बताओ? कांग्रेस के नेते बताओ कि आप में ऐसा कौन सा दिमागी नक्शवाद घुसा है? हम्म. हम नक्सलवाद मिटाने की बात कर रहे हैं. पूरा देश से नक्सलवाद उखाड़ने के लिए अमित भाई शाहजी और नरेंद्र मोदी जी काम कर रहे हैं. तो मैं दिमागी नक्श हूं. ये बात कहना ये कांग्रेस को क्यों लगा ये हमको उनका सवाल है. उसका जवाब वो दें.
सवाल: क्या कोई मानसिकता का मिलन है?
जवाब: देखिए कांग्रेस की मानसिकता मैंने जो कही है ना यह आज दुर्भाग्य से है. विघटनवादी अपीसमेंट पॉलिटिक्स और वोट के आधार पर समाज का बंटवारा करना. अब यह बात तो और थी कि समाज का बंटवारा दुर्भाग्य से वर्टिकल बना दिया इन्होंने. जाति जाति में भाषा भाषा में विभाग विभाग में अब वह वर्टिकल कम नहीं हुआ तब हॉरिजॉन्टल शुरू हुआ भाई ये हॉरिजॉन्टल जो है मैं समाज को भी आपके माध्यम से बताना चाहता हूं भाई हमारे समाज में प्रथा क्या थी किशोर शिशु बच्चा है तो बड़ा हो गया तो किशोर उसकी अवस्था बड़ी होगी तो तरुण यानी युवा और उससे बढ़ गया तो प्रौढ़ वह उसकी अवस्था से था अब यह बात कैसे आई कि मैं कौन से साल में जन्मा हूं. वहां से मेरा हॉरिजॉन्टल वाइब्रेशन होगा. 2000 के पहले जन्मा हूं तो इस नाम से पुकारा जाऊंगा. 2000 के बाद जन्मा हूं तो इस नाम से पुकारा जाऊंगा. 2011 के बाद पैदा हूं तो इस नाम से पुकारा जाऊंगा. तो कांग्रेस क्या चाह रही है? इस देश का बंटवारा वर्टिकल करने में तो प्रयास किया. अब हॉरिजॉन्टल भी करना चाह रही है और तब मोदी जी एक बात कर रहे हैं कि एक देश एक नारा एक देश एक चुनाव एक देश एक राशन कार्ड एक देश एक संस्कृति एक देश एक टैक्स बात विघटनवादी कांग्रेस के दिमाग में है.
सवाल: यह बताइए कि सुप्रिया सुले जी से या शरद पवार जी से कोई बैक डोर बातचीत चल रही है क्या क्योंकि बड़ा उनका एक पॉजिटिव रवैया आप लोगों को लेकर देखने को मिलता है.
जवाब: उनका दल है वो अपने दल की क्या भूमिका ले वो पवार साहब या सुप्रिया जी उनका अधिकार है प्रधानमंत्री इस नाते जब देश के प्रधानमंत्री हर किसी को मिलते हैं मिलना भी चाहिए चर्चा भी करते हैं. हम्म तब राष्ट्रवादी कांग्रेस के सांसद यानी शरद पवार गुटके और पवार साहब मिलना चाहते हैं तो उसका डेमोक्रेसी में स्वागत होना चाहिए. यही कांग्रेस की सोचते है विघटनवादी. लेकिन कि भाई एक दल दूसरे दल को क्यों मिल रहा है? कांग्रेस के पेट में दर्द क्यों है? हम्म इसके लिए हम इनको विघटनवादी कहते हैं.
सवाल: महाराष्ट्र में एनसीपी का टूटना, महाराष्ट्र में उद्धव गुट का, शिवसेना का टूट जाना यह टूट अलग रीजनल पार्टीज़ में आखिर क्यों देखने को मिलती है? और बीजेपी इसे कैसे देखती है?
जवाब: देखिए इसका जवाब तो उन दलों ने देना चाहिए जो उन दलों ने दिया है. एकनाथ शिंद जी ने सीधा-सीधा जवाब इस बात का दिया है. आप इस नरेटिव के जाल में मत फसिए. उद्धव ठाकरे जी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद मेरे दल के विधायकों को न्याय नहीं दिया. नंबर एक. नंबर दो. बाला साहेब ठाकरे जी की जो सोच कट्टर हिंदुत्ववाद की थी वह उन्होंने उद्धव ठाकरे जी ने छोड़ दी. एकनाथ शिंद जी का आरोप नंबर दो. नंबर तीन टुकड़े-टुकड़े गैंग के लोग शर्जिल उस्मानी से लेकर सब यहां के यूनिवर्सिटीज में आकर कार्यक्रम करें. यह हमें मंजूर नहीं और इस बात को उद्धव जी ने सुना नहीं. यह उनके आरोप है. यह उनके तथ्य हैं. जब उनको लगा कि भाई बाला साहब की विचारधारा इन्होंने छोड़ी है तब उन्होंने अपना दल बनाया है. सवाल का जवाब सीधा है. वही बात अजीत पवार जी ने कही है कि भाई महाराष्ट्र के हित में राज्य का विकास, किसानों का विकास सब समाज को लेकर चलना इस बात से तब कि शरद पवार जी के नेतृत्व की राष्ट्रवादी कांग्रेस मुकर गई. वायदा देकर मुकर गई. हम अलग हो गए. अब बात और तथ्य तो सामने है. उस बात से मुंह फेरना इससे उबाटा और शरद पवार गट बच नहीं सकता.
सवाल: उद्धव जी और आप लोगों की विचारधारा लगभग बराबर की हुआ करती थी. फिर राहें जुदा हो गई. ये विचारधारा कैसे बदल जाती है शेलार साहब?
जवाब: यही तो उद्धव जी को कहना है हमारा. भाई जहां पर आप और आपके पिताजी ये कहते थे कि कांग्रेस की दुकान बंद करनी चाहिए. क्यों आपकी यह विचारधारा बदली उद्धव जी कि आप कांग्रेस के शासन में और सपोर्ट के साथ वहां पर बैठ गए. जिस विचारधारा में बाला साहब ठाकरे जी ने सावरकर जी का अपमान करने वाले कांग्रेस के मणिशंकर अय्यर को चप्पल और जूते मारो. सावरकर जी की बदनामी हम सहन नहीं करेंगे. यह कहने वाले उद्धव जी अपने पिताजी के विचार छोड़कर जिन्होंने अपने मैगज़ीन में कांग्रेस ने सावरकर जी को बदनाम किया. उनका साथ क्यों जोड़ा? राम भगवान रामचंद्र यह काल्पनिक है. यह कहने वाली कांग्रेस जिसका विरोध बाला साहब ने राम मंदिर अभियान में मैं उतर के करूंगा. ऐसे बाला साहब के विचारों को क्यों छोड़ा? 100 सवाल उद्धव जी के पास है. सत्ता के लिए आपने विचारधारा छोड़िए और उसका खामियाजा उद्धव जी महाराष्ट्र की जनता आपको दे रही है.
सवाल: बीजेपी ऐसी कौन सी स्ट्रेटजी शेलार साहब अपनाती है? जरा थोड़ा डिकोड करिएगा कि सारी रीजनल पार्टी इसको सहपास कर रही है. बंगाल में चले जाइए तो ममता बनर्जी टीएमसी उनकी रीजनल पार्टी वो हार जाती है. फिर इसके बाद आप बिहार आ जाइए तो जेडीयू आपके साथी पार्टी है. लेकिन आपकी सीटें ज्यादा आ जाती हैं. महाराष्ट्र में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है. तो ऐसी कौन सी स्ट्रेटजी या ऐसी कौन सी मैजिक बॉन्ड है आपके पास कि आप क्षेत्रीय पार्टियों को कम सीटों तक पहुंचा देते हैं और खुद उनसे ऊपर निकल जाते हैं.
जवाब: देखिए नैरेटिव का बात है जिनकी विस्मृतियां बढ़ गई है वो इस बारे में सोचते हैं. भाई बिहार में लालू जी का दल और नीतीश जी का दल जब अलग हुआ समाजवादी से तो क्या हम सत्ता में थे? जब तमिलनाडु में एआईडीएम के और डीएमके अलग हुआ और अभी पीएमके और बाकी दल हुए तो क्या हम सत्ता में थे? जब कश्मीर में जाकर दो दल हुए पीडीपी हुआ या फिर उमर अब्दुल जी का पार्टी बनी तो क्या हम सत्ता में थे? क्या यह रीजनल पार्टी नहीं थी? कांग्रेस से निकलकर जाकर ममता जी का दल अलग हुआ. कम्युनिस्ट का दल छोड़कर ममता जी ने पार्टी बनाई या उनके दल में लिया तो क्या हम दिल में थे? तो रीजनल पार्टियों में दुर्भाग्य से फूट ये क्या बीजेपी के कारण है? ये नैरेटिव का भाग है. और जिनको राजनैतिक विस्मृति की बीमारी लगी है. वो ये बात कहते हैं.
सवाल: अभी-अभी आपने रिसेंटली एनडी स्टूडियोज को आपने टेक ओवर किया. और कहते हैं कि कला जो है वो सरहदों को आपस में जोड़ती है और उससे पार भी जाती है. एक लेगसी के तौर पर नितिन देसाई का ये स्टूडियो सिर्फ एक स्टूडियो के तौर पर नहीं बल्कि एक लेगसी के तौर पर देखा जाना चाहिए. तो कैसे इस कल्चर का समागम आप देखते हैं खासतौर से क्योंकि बॉलीवुड इंडस्ट्री यहीं पर है. इसको किन ऊंचाइयों पर आप लेकर जाना चाहते हैं?
जवाब: ये दुर्भाग्य तो यह है कि नितिन देसाई जी हमारे में नहीं रहे. और उनके बाद उन्होंने जो एक बड़ा स्टूडियो खड़ा किया है जो बॉलीवुड हो, हॉलीवुड हो या मराठी या रीजनल इंडस्ट्री हो उसके लिए एक बड़े सेट्स वहां पर उन्होंने पैदा किए. जहां शूट्स हो सकते हैं. दुर्भाग्य से कुछ आर्थिक गतिविधियों के कारण प्रतिबंधों में वह अटका पड़ा था. मैं माननीय मुख्यमंत्री देवेंद्र जी के इस निर्णय की सराहना और अभिनंदन करता हूं कि उसको सरकार ने निर्णय किया. हम इसको टेकओवर करेंगे. सरकारी नाते जो भी आर्थिक विषय थे उसको पूरा करेंगे. के परिवार की भी चिंता करेंगे नितिन देसाई जी की और आज वहां पर एक बड़ी फैसिलिटी उसके कंपनी और उसका चलन करने का जिम्मेदारी मुझे दी है.
मैं मानता हूं कि पूरे महाराष्ट्र में जैसे एनडी स्टूडियो के माध्यम से हम पूरी क्रिएटिव इंडस्ट्री को यहां जो है उसको बढ़ाना चाहते हैं. हमारा गोरेगांव में फिल्म सिटी उसका नया प्लान बना रहे हैं. उसका रिवम हो रहा है जिसके कारण और फैसिलिटीज क्रिएट हो. मैं यहां बताते हुए मुझे सौभाग्य हो रहा है कि रामटेक नागपुर में भी 150 एकड़ हमने लिया है. वहां नई फिल्म सिटी हम बना रहे हैं. नासिक का अभी प्राइमरी स्टेज पर है. नासिक में बना रहे हैं. पूरे दुनिया का हब मोदी जी का विज़न है वेव्स के माध्यम से कि वर्ल्ड ऑडियो विजुअल समिट हम्म दुनिया का आई कैचिंग आई बॉल्स भारत में है और क्रिएटिव इंडस्ट्री भी आए. भारत बने दुनिया का हब और उसमें महाराष्ट्र सबसे ज्यादा आगे बढ़े. इस विज़न को लेकर हम काम कर रहे हैं.
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