SCO Summit: अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों को लेकर चर्चा में आ गए हैं. सोमवार को दिए एक बयान में उन्होंने भारत के साथ लंबे समय से चले आ रहे व्यापार संबंधों को "एकतरफा त्रासदी" करार दिया और दावा किया कि अब भारत शुल्क घटाकर उसे शून्य करने को तैयार है, लेकिन अब "बहुत देर हो चुकी है."
ट्रंप के इस तीखे बयान के बाद अमेरिकी विश्लेषकों और मीडिया में भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. जानकारों का मानना है कि ट्रंप की यह शैली अमेरिका की वैश्विक कूटनीति को नुकसान पहुंचा सकती है, खासकर ऐसे समय में जब भारत जैसे लोकतांत्रिक और रणनीतिक साझेदार की अहम भूमिका है.
ट्रंप का आरोप: भारत करता है फायदा, लेकिन देता नहीं बराबरी का मौका
अपने बयान में ट्रंप ने कहा, “भारत रूस से बड़ी मात्रा में तेल और हथियार खरीदता है, लेकिन अमेरिका से बहुत कम लेनदेन करता है. हम भारत से कम व्यापार करते हैं, जबकि वे हमें खूब बेचते हैं. यह रिश्ता दशकों से पूरी तरह एकतरफा रहा है.” उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि भारत अमेरिका को उसका सबसे बड़ा बाजार मानते हुए भी रक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अमेरिका की अनदेखी करता है.
क्या ट्रंप की नीति भारत को चीन-रूस के करीब धकेल रही है?
अमेरिकी विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की ‘बदले की भावना’ से की गई टैरिफ नीति और तीखे शब्द भारत को मजबूर कर रहे हैं कि वह अपने कूटनीतिक विकल्पों पर पुनर्विचार करे. एनबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि हाल ही में तियानजिन (चीन) में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गर्मजोशी से किया गया अभिवादन वाशिंगटन के लिए एक स्पष्ट संदेश है. रिपोर्ट में लिखा गया: “तीनों नेताओं की सार्वजनिक नजदीकी केवल एक कूटनीतिक इत्तेफाक नहीं थी, बल्कि अमेरिकी नीति-निर्माताओं के लिए एक संकेत थी.”
ट्रंप की रणनीति पर सवाल, मोदी से दूरी अमेरिका के लिए घातक?
वॉशिंगटन पोस्ट ने ट्रंप की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए लिखा कि वे बहुपक्षीय गठबंधनों की बजाय द्विपक्षीय सौदेबाज़ी पर अधिक भरोसा करते हैं. विश्लेषकों के मुताबिक, यह दृष्टिकोण अमेरिका को उसके पारंपरिक साझेदारों से दूर कर सकता है, खासकर ऐसे समय में जब चीन की वैश्विक ताकत को संतुलित करना जरूरी है.
पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन जैसे पूर्व अधिकारी भी ट्रंप की नीति की आलोचना कर चुके हैं. उनका कहना है कि यह सब शीर्ष स्तर से निर्देशित होता दिख रहा है और राष्ट्रपति खुद भारत के खिलाफ अपने गुस्से का खुलकर इज़हार कर रहे हैं.
रिश्तों को पटरी पर लाने में जुटा अमेरिकी दूतावास
इधर, दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने दोनों देशों के रिश्तों को संभालने की कोशिश तेज कर दी है. दूतावास की ओर से जारी बयान में कहा गया, “भारत-अमेरिका की साझेदारी निरंतर मजबूत हो रही है. हम विकास, रक्षा, नवाचार और द्विपक्षीय सहयोग के नए आयामों पर मिलकर काम कर रहे हैं. यही दोनों देशों की जनता के बीच गहरी और स्थायी मित्रता का आधार है.”
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