सकट चौथ 2026: संतान सुख और दीर्घायु का विशेष व्रत, जानिए तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

    Sakat Chauth 2026: हिंदू पंचांग में सकट चौथ का व्रत विशेष आस्था और विश्वास से जुड़ा माना जाता है. यह पर्व भगवान गणेश को समर्पित होता है और इसे संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है.

    Sakat Chauth 2026 Sri Ganesh Know Pujan Vidhi and Muhurat
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    Sakat Chauth 2026: हिंदू पंचांग में सकट चौथ का व्रत विशेष आस्था और विश्वास से जुड़ा माना जाता है. यह पर्व भगवान गणेश को समर्पित होता है और इसे संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन विशेष रूप से महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी भविष्य की कामना के लिए कठोर निर्जला व्रत रखती हैं. देश के लगभग हर हिस्से में यह व्रत श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया जाता है. सकट चौथ के दिन कथा श्रवण, गणेश पूजन और रात्रि में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व होता है. चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है.

    भगवान गणेश को इस दिन शकरकंद, तिल-गुड़ के लड्डू और मौसमी फलों का भोग अर्पित किया जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से संतान संबंधी कष्ट दूर होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. आइए जानते हैं सकट चौथ 2026 की शुभ तिथि, पूजन मुहूर्त, पूजा सामग्री और विधि के बारे में विस्तार से.

    सकट चौथ 2026 के शुभ मुहूर्त

    सकट चौथ के दिन पूजा के लिए कई शुभ योग बन रहे हैं, जिनमें भगवान गणेश की आराधना करना विशेष फलदायी माना गया है.

    • ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 26 मिनट से सुबह 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा.
    • अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा.
    • विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 11 मिनट से 2 बजकर 53 मिनट तक रहेगा.
    • गोधूली मुहूर्त शाम 5 बजकर 36 मिनट से 6 बजकर 4 मिनट तक रहेगा.
    • अमृत काल सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 17 मिनट तक रहेगा.
    • सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 7 बजकर 15 मिनट से दोपहर 12 बजकर 17 मिनट तक रहेगा.
    • इस दिन चंद्रमा का उदय रात 8 बजकर 54 मिनट पर होगा. चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोलना शुभ माना गया है.

    सकट चौथ 2026 की पूजा सामग्री

    सकट चौथ की पूजा के लिए पहले से सामग्री एकत्र कर लेना शुभ रहता है. पूजा में भगवान गणेश की प्रतिमा, लाल फूल, दूर्वा घास की 21 गांठें, लकड़ी की चौकी, जनेऊ, सुपारी, पान के पत्ते, पीला वस्त्र, गाय का घी, दीपक, अगरबत्ती, गंगाजल, सिंदूर, मेहंदी, लौंग, इलायची, रोली, अक्षत, हल्दी, मौली, अबीर-गुलाल, 11 या 21 तिल के लड्डू, मोदक, शकरकंद, मौसमी फल, कलश और सकट चौथ की कथा की पुस्तक शामिल होती है.
    चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए दूध, चीनी, इत्र और पुष्प भी अवश्य रखें.

    सकट चौथ 2026 की पूजा विधि

    सकट चौथ के दिन महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करती हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं. इस दिन लाल रंग के वस्त्र पहनना विशेष शुभ माना जाता है. स्नान के बाद पूजा स्थल को शुद्ध करें और भगवान गणेश की स्थापना करें. हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें और इसे गणेश जी के चरणों में अर्पित करें. पूजा स्थल पर तिल-गुड़ के लड्डू, शकरकंद, फल और धूप-दीप सजाएं. मान्यता के अनुसार इस दिन देवी दुर्गा की उपस्थिति भी आवश्यक मानी जाती है, इसलिए उनकी प्रतिमा या चित्र भी पूजा स्थान पर रखें. चूंकि मुख्य पूजा शाम को होती है, इसलिए संध्या काल से पहले पुनः स्नान करना शुभ होता है.इसके बाद घी का दीपक जलाकर भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें. सकट चौथ की कथा सुनें या पढ़ें और अंत में गणेश जी की आरती करें. उन्हें प्रिय भोग अर्पित करें और रात्रि में चंद्रमा के उदय की प्रतीक्षा करें.

    सकट चौथ पर चंद्रमा की पूजा विधि

    चंद्रमा दिखाई देने के बाद सबसे पहले उसे अर्घ्य अर्पित करें. अर्घ्य के जल में गंगाजल, कच्चा दूध, सफेद तिल, साबुत अनाज और पुष्प मिलाना शुभ माना जाता है. इसके बाद चंद्रमा को धूप और दीप दिखाएं. भोग अर्पित कर चंद्रमा की तीन परिक्रमा करें और संतान सुख की कामना करें. चंद्र पूजा के बाद ही जल ग्रहण कर व्रत का पारण करें.

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