पाकिस्तान चला रहा प्रोपोगेंडा, सबकुछ है सुरक्षित; प्रेस ब्रीफिंग में सेना ने खोल दी आतंकिस्तान की पोल

MEA Press Breifing: विदेश मंत्रालय (MEA) ने अपनी हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की ओर से जारी भड़काऊ और उकसावे वाली गतिविधियों के बावजूद भारत ने बेहद संयम और ज़िम्मेदारी के साथ जवाब दिया है.

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MEA Press Breifing: विदेश मंत्रालय (MEA) ने अपनी हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की ओर से जारी भड़काऊ और उकसावे वाली गतिविधियों के बावजूद भारत ने बेहद संयम और ज़िम्मेदारी के साथ जवाब दिया है. मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत किसी भी उकसावे में आने के बजाय अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है और इसी नीति के तहत कार्रवाई की गई है.

S-400 फेल करने का झूठा दावा

सेना ने कहा कि पाकिस्तान ने S-400 फेल करने का भी झूठा दावा किया. उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान के 4 एयरबेस को निशाना बनाया. इसके बाद पाकिस्तान ने नागरिक उड्डयन को ढाल बनाकर फर्जी खबरें फैलाईं.

सेना ने क्या कहा?

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तान की ओर से किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों का भी जिक्र हुआ, जिन्हें भारत ने अपने आधुनिक डिफेंस सिस्टम से विफल कर दिया. सेना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी भारत की स्थिति से अवगत करा दिया है और उम्मीद जताई कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में सभी देश सहयोग करेंगे.

महिला सैन्य अधिकारियों के साथ साझा किया मंच

प्रेस ब्रीफिंग में विदेश सचिव के साथ भारतीय सेना की दो वीर महिला अधिकारी — लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी और मेजर व्योमिका सिंह भी मौजूद रहीं. इन दोनों अधिकारियों ने सीमा पर भारतीय सेना की तैयारियों और हालिया घटनाओं की जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि सीमा पर तैनात भारतीय जवान हर प्रकार के खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

भारत की नीति स्पष्ट: उकसावे का जवाब जरूर मिलेगा

विक्रम मिसरी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की पहली प्राथमिकता शांति और स्थिरता बनाए रखना है. लेकिन यदि पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आता, तो भारत राजनयिक, सैन्य और सामरिक हर स्तर पर जवाब देने में सक्षम और तैयार है.

पाकिस्तान का उद्देश्य: सीमा पर तनाव बढ़ाना

पाकिस्तानी सेना की हरकतों से यह साफ है कि वह सीमा पर जानबूझकर तनाव बढ़ाना चाहती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को दबाव में लाया जा सके. लेकिन भारत की स्थिति अब भी मजबूत और स्पष्ट है— संप्रभुता से कोई समझौता नहीं

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