बॉम्‍बर, हाइपरसोनिक मिसाइल, एंटी-सबमरीन एयरक्राफ्ट... रूसी सेना ने बैरंट सी में किया शक्ति प्रदर्शन

रूस ने एक बार फिर अपनी सैन्य ताक़त का प्रदर्शन करते हुए दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. 14 सितंबर को रूसी नौसेना ने उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्र के पास स्थित बैरेंट्स सागर में एक अत्याधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइल Zircon (Tsirkon) का सफल परीक्षण किया.

Russian army demonstrated power in the Barents Sea
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Social Media

मॉस्को: रूस ने एक बार फिर अपनी सैन्य ताक़त का प्रदर्शन करते हुए दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. 14 सितंबर को रूसी नौसेना ने उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्र के पास स्थित बैरेंट्स सागर में एक अत्याधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइल Zircon (Tsirkon) का सफल परीक्षण किया. यह परीक्षण तब सामने आया जब रूस और बेलारूस संयुक्त रूप से एक बड़े सैन्य अभ्यास Zapad-2025 को अंजाम दे रहे हैं, जिसमें भारत, पाकिस्तान और चीन समेत कई देश भाग ले रहे हैं.

इस मिसाइल परीक्षण और अभ्यास को लेकर पश्चिमी देशों, विशेष रूप से NATO (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइज़ेशन) के सदस्य देशों में चिंता की लहर दौड़ गई है.

Zircon: रूस की हाइपरसोनिक मिसाइल

रूसी रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी की गई वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि मिसाइल को उत्तरी बेड़े की ‘एडमिरल गोलोव्को’ नामक अत्याधुनिक फ्रिगेट से लॉन्च किया गया. मिसाइल एक ऊर्ध्वाधर लॉन्च पैड से आसमान की ओर तेजी से उठती है और फिर क्षितिज की ओर टर्न लेकर निर्धारित लक्ष्य की ओर रफ्तार भरती है.

रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि Zircon मिसाइल ने अपने लक्ष्य को सीधे सटीकता से भेदा और सभी डेटा रियल टाइम में रिकॉर्ड किए गए.

यह मिसाइल इतनी तेज़ है कि इसकी रफ्तार आवाज़ की गति से नौ गुना ज्यादा (Mach 9) है. मतलब यह कुछ ही मिनटों में सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित दुश्मन के किसी भी नौसैनिक या जमीनी लक्ष्य को तबाह करने में सक्षम है.

पश्चिमी विशेषज्ञों के मुताबिक, Zircon की रेंज 400 से लेकर 1,000 किलोमीटर के बीच हो सकती है. इसमें एक 300–400 किलोग्राम वज़नी वॉरहेड लगाया जा सकता है, जो इसे अत्यंत खतरनाक बना देता है.

इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हाइपरसोनिक गति से यात्रा करता है, जिससे NATO का कोई भी मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम इसे पकड़ने या रोकने में पूरी तरह सक्षम नहीं है. यही कारण है कि यह परीक्षण अमेरिका और यूरोपीय देशों के लिए एक प्रकार की रणनीतिक चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है.

बैरेंट्स सागर: रूस की सामरिक महत्व वाला इलाका

जहां पर यह मिसाइल परीक्षण किया गया बैरेंट्स सागर वह भूगोलिक और रणनीतिक रूप से रूस के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है.

यह सागर नॉर्वे और रूस के उत्तरी तटों के बीच स्थित है और आर्कटिक महासागर का हिस्सा है. इसके एक ओर स्वालबार्ड द्वीप और नॉर्वे हैं, जबकि दूसरी ओर कोला प्रायद्वीप और नोवाया ज़ेमल्या स्थित हैं जो कि रूस की नॉर्दर्न फ्लीट का गढ़ हैं.

रूस की कई स्ट्रैटेजिक न्यूक्लियर सबमरीन भी यहीं से संचालित होती हैं, और यही वह जगह है जहां से रूस अक्सर अपने मिसाइल सिस्टम्स का परीक्षण करता रहा है.

इसके अलावा, आर्कटिक क्षेत्र में रूस की बड़ी दावेदारी है खासकर गैस और तेल संसाधनों पर. और बैरेंट्स सागर, रूस के लिए वहां तक पहुंचने का ‘गेटवे’ कहा जाता है.

Zapad-2025: रूस-बेलारूस का सैन्य अभ्यास

Zircon मिसाइल का यह परीक्षण उस समय हुआ है जब रूस और बेलारूस मिलकर एक वृहद सैन्य अभ्यास “Zapad-2025” को अंजाम दे रहे हैं. इस अभ्यास की शुरुआत 12 सितंबर से हुई है और इसमें कई एशियाई और मध्य एशियाई देशों की सेनाएं भी हिस्सा ले रही हैं, जिनमें भारत, पाकिस्तान और चीन भी शामिल हैं.

इस अभ्यास में शामिल गतिविधियां हैं:

  • Su-34 सुपरसोनिक फाइटर-बॉम्बर्स द्वारा जमीनी लक्ष्यों पर बमबारी.
  • लंबी दूरी के एंटी-सबमरीन एयरक्राफ्ट द्वारा समुद्री गतिविधियों की निगरानी.
  • ड्रोन और सैटेलाइट्स के जरिए दुश्मन की पोजीशन का विश्लेषण.
  • रडार जैमिंग और साइबर वॉरफेयर के मॉड्यूल्स.

हालांकि रूस और बेलारूस का दावा है कि यह पूरा अभ्यास केवल रक्षात्मक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है और इसका मकसद किसी भी देश को उकसाना नहीं है.

परंतु जिस प्रकार रूस ने हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया है और फाइटर-बॉम्बर्स से लाइव स्ट्राइक ड्रिल कर रहा है, उससे पश्चिमी देशों में बेचैनी साफ दिखाई दे रही है.

NATO की प्रतिक्रिया

रूस की इन सैन्य गतिविधियों से अमेरिका और NATO की रणनीतिक कमान भी सतर्क हो गई है. जानकारी के अनुसार, NATO जल्द ही “Eastern Sentry” नामक एक नया सामूहिक सैन्य अभ्यास शुरू करने जा रहा है, जो पूर्वी यूरोप में रूस की बढ़ती सैन्य मौजूदगी का जवाब माना जा रहा है.

इस अभ्यास में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, पोलैंड जैसे बड़े सदस्य देश भाग लेंगे. इसका उद्देश्य होगा:

  • रूसी हमलों से निपटने की तैयारी.
  • साइबर और एंटी-मिसाइल डिफेंस का परीक्षण.
  • संयुक्त रणनीतिक युद्धाभ्यास.

NATO इस क्षेत्र में पहले से ही बढ़ती रूसी आक्रामकता को लेकर चिंतित है, और Zapad-2025 तथा Zircon परीक्षण ने इन चिंताओं को और गहरा कर दिया है.

ये भी पढ़ें- 6 मुस्लिम देशों में तबाही मचा चुका इजरायल! अब पाकिस्तान के दोस्त की बारी? जानें नेतन्याहू का प्लान