6 मुस्लिम देशों में तबाही मचा चुका इजरायल! अब पाकिस्तान के दोस्त की बारी? जानें नेतन्याहू का प्लान

इज़राइल और हमास के बीच चल रही जंग अब सीमाओं से परे जाकर एक अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का रूप ले चुकी है.

Israel wreaked havoc on 6 Muslim countries
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Social Media

तेल अवीव/दोहा/अंकारा: इज़राइल और हमास के बीच चल रही जंग अब सीमाओं से परे जाकर एक अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का रूप ले चुकी है. इस टकराव ने अब उन देशों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से हमास के समर्थन में खड़े हैं. इज़राइल की नीति अब स्पष्ट है: "जहां भी हमास के नेता होंगे, वहीं तक हमारी पहुंच होगी." और इस नीति के तहत इज़राइल ने अब तक छह मुस्लिम देशों में हमले कर दिए हैं और संकेत हैं कि अगला निशाना तुर्की हो सकता है.

हमास के खिलाफ इज़राइल की कार्रवाई

इज़राइल ने यह पहले ही साफ कर दिया था कि वह हमास को केवल गाज़ा में ही नहीं, बल्कि दुनिया के किसी भी कोने में ढूंढकर खत्म करेगा. इज़राइली सेना प्रमुख इयाल जमीर ने 31 अगस्त को एक बयान में कहा था, "हमास के शीर्ष नेता विदेशों में छिपे हैं. लेकिन वे वहां भी सुरक्षित नहीं हैं. हम उन्हें वहां तक भी ढूंढ निकालेंगे."

इस बयान को कुछ लोगों ने एक सामान्य चेतावनी समझा था, लेकिन बीते दिनों हुए हमलों ने इसे एक रणनीतिक मिशन में बदल दिया.

दोहा पर हमला: कतर भी निशाने पर

इज़राइल ने हाल ही में कतर की राजधानी दोहा को निशाना बनाया- एक ऐसा शहर जो न केवल हमास नेताओं के लिए सुरक्षित ठिकाना माना जाता है, बल्कि अमेरिका के बड़े सहयोगी और रणनीतिक साझेदार के तौर पर भी जाना जाता है.

जब हमला हुआ, तब जानकारी के अनुसार, हमास के कई शीर्ष नेता दोहा में शांति वार्ता के नाम पर इकट्ठा थे. इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय हलकों में खलबली मचा दी, क्योंकि:

  • कतर में अमेरिका के बड़े सैन्य अड्डे मौजूद हैं.
  • कतर, नाटो के लिए एक रणनीतिक भागीदार है.
  • अमेरिका ने हाल ही में कतर से ट्रिलियन डॉलर का रक्षा और ऊर्जा समझौता किया है.

इस घटना ने साबित कर दिया कि इज़राइल अब किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव या कूटनीतिक संबंधों की परवाह किए बिना, हमास के खिलाफ कार्रवाई करने को तैयार है.

कौन-कौन से देश अब तक निशाने पर?

इज़राइल ने अब तक 6 मुस्लिम देशों में हमास को समर्थन देने या नेताओं को शरण देने के आरोप में हमले किए हैं:

  • फिलिस्तीन – स्वाभाविक रूप से पहला युद्धभूमि बना, जहां से हमास की उत्पत्ति हुई.
  • सीरिया – हमास को वैचारिक और सैन्य सहायता के लिए जिम्मेदार समझा गया.
  • यमन – ईरान समर्थित हौथी विद्रोहियों के जरिए हमास को हथियार और संसाधन पहुंचाने के आरोप.
  • ईरान – हमास का सबसे प्रमुख और पुराना समर्थनकर्ता, जो उसे वित्तीय और सैन्य सहायता देता रहा है.
  • लेबनान – विशेषकर हिज़्बुल्लाह के जरिए हमास को सहयोग.
  • कतर – हमास के नेताओं को राजनीतिक शरण और आर्थिक सहायता देने वाला देश.

अब इन देशों की सूची में अगला नाम तुर्की का माना जा रहा है.

क्या तुर्की है अगला टारगेट?

तुर्की लंबे समय से हमास को समर्थन देता आया है, न सिर्फ नैतिक तौर पर, बल्कि राजनीतिक मंचों पर भी उसका बचाव करता रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक:

  • तुर्की में हमास के नेताओं को सुरक्षित आश्रय मिला है.
  • तुर्की की सरकार हमास को “वैध राजनीतिक संगठन” मानती है.
  • तुर्की की ओर से हमास को आर्थिक सहयोग भी समय-समय पर मिला है.

हाल ही में, जब इज़राइल ने दोहा पर हमला किया, तो तुर्की में राजनीतिक हलकों में हलचल तेज़ हो गई. एर्दोआन सरकार ने आपात बैठकें बुलाईं और स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी. माना जा रहा है कि इज़राइल की नजर अब तुर्की पर भी टिकी है.

इस्लामिक देशों की रणनीति: एकजुट होना?

इज़राइल की इस आक्रामक नीति ने मुस्लिम दुनिया को एक नई चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है. अब तक की जानकारी के अनुसार, तुर्की, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब सहित 50 से ज्यादा इस्लामिक देश एक आपात “इस्लामिक समिट” की तैयारी कर रहे हैं.

इस समिट का प्रमुख उद्देश्य है:

  • अमेरिका पर कूटनीतिक दबाव बनाना,
  • इज़राइल को सीमित करना,
  • और हमास के लिए एक वैश्विक समर्थन तैयार करना.

इस समिट से पाकिस्तान की भूमिका भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि वह तुर्की और कतर दोनों का करीबी है और खुद भी इज़राइल-विरोधी रुख अपनाए हुए है.

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