तेल अवीव/दोहा/अंकारा: इज़राइल और हमास के बीच चल रही जंग अब सीमाओं से परे जाकर एक अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का रूप ले चुकी है. इस टकराव ने अब उन देशों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से हमास के समर्थन में खड़े हैं. इज़राइल की नीति अब स्पष्ट है: "जहां भी हमास के नेता होंगे, वहीं तक हमारी पहुंच होगी." और इस नीति के तहत इज़राइल ने अब तक छह मुस्लिम देशों में हमले कर दिए हैं और संकेत हैं कि अगला निशाना तुर्की हो सकता है.
हमास के खिलाफ इज़राइल की कार्रवाई
इज़राइल ने यह पहले ही साफ कर दिया था कि वह हमास को केवल गाज़ा में ही नहीं, बल्कि दुनिया के किसी भी कोने में ढूंढकर खत्म करेगा. इज़राइली सेना प्रमुख इयाल जमीर ने 31 अगस्त को एक बयान में कहा था, "हमास के शीर्ष नेता विदेशों में छिपे हैं. लेकिन वे वहां भी सुरक्षित नहीं हैं. हम उन्हें वहां तक भी ढूंढ निकालेंगे."
इस बयान को कुछ लोगों ने एक सामान्य चेतावनी समझा था, लेकिन बीते दिनों हुए हमलों ने इसे एक रणनीतिक मिशन में बदल दिया.
दोहा पर हमला: कतर भी निशाने पर
इज़राइल ने हाल ही में कतर की राजधानी दोहा को निशाना बनाया- एक ऐसा शहर जो न केवल हमास नेताओं के लिए सुरक्षित ठिकाना माना जाता है, बल्कि अमेरिका के बड़े सहयोगी और रणनीतिक साझेदार के तौर पर भी जाना जाता है.
जब हमला हुआ, तब जानकारी के अनुसार, हमास के कई शीर्ष नेता दोहा में शांति वार्ता के नाम पर इकट्ठा थे. इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय हलकों में खलबली मचा दी, क्योंकि:
इस घटना ने साबित कर दिया कि इज़राइल अब किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव या कूटनीतिक संबंधों की परवाह किए बिना, हमास के खिलाफ कार्रवाई करने को तैयार है.
कौन-कौन से देश अब तक निशाने पर?
इज़राइल ने अब तक 6 मुस्लिम देशों में हमास को समर्थन देने या नेताओं को शरण देने के आरोप में हमले किए हैं:
अब इन देशों की सूची में अगला नाम तुर्की का माना जा रहा है.
क्या तुर्की है अगला टारगेट?
तुर्की लंबे समय से हमास को समर्थन देता आया है, न सिर्फ नैतिक तौर पर, बल्कि राजनीतिक मंचों पर भी उसका बचाव करता रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक:
हाल ही में, जब इज़राइल ने दोहा पर हमला किया, तो तुर्की में राजनीतिक हलकों में हलचल तेज़ हो गई. एर्दोआन सरकार ने आपात बैठकें बुलाईं और स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी. माना जा रहा है कि इज़राइल की नजर अब तुर्की पर भी टिकी है.
इस्लामिक देशों की रणनीति: एकजुट होना?
इज़राइल की इस आक्रामक नीति ने मुस्लिम दुनिया को एक नई चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है. अब तक की जानकारी के अनुसार, तुर्की, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब सहित 50 से ज्यादा इस्लामिक देश एक आपात “इस्लामिक समिट” की तैयारी कर रहे हैं.
इस समिट का प्रमुख उद्देश्य है:
इस समिट से पाकिस्तान की भूमिका भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि वह तुर्की और कतर दोनों का करीबी है और खुद भी इज़राइल-विरोधी रुख अपनाए हुए है.
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