भारत को Su-57 बेचने के लिए रूस का आखिरी ऑफर, घातक हथियारों के साथ पूरा इको सिस्टम देगा, होगी डील?

भारत ने साफ कर दिया है कि वह फ्रांस के साथ छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने की संभावना पर बात कर रहा है. ऐसे में भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान खरीदने की संभावना काफी कम हो गई है.

Russia offer to sell the Su-57 to India a complete ecosystem including lethal weaponry
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मॉस्को/नई दिल्ली: भारत ने साफ कर दिया है कि वह फ्रांस के साथ छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने की संभावना पर बात कर रहा है. ऐसे में भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान खरीदने की संभावना काफी कम हो गई है. इसके बावजूद रूस भारत को Su-57 स्टील्थ फाइटर देने की कोशिश कर रहा है.

रिपोर्टों के मुताबिक, रूस ने भारत के लिए Su-57 का एक बड़ा पैकेज तैयार किया है. इसमें विमान के साथ तकनीक का हस्तांतरण और पूरा इको-सिस्टम देने की बात कही गई है. पैकेज में नए और आधुनिक हथियार भी शामिल हैं.

Su-57 पैकेज में क्या-क्या शामिल है?

रूस के प्रस्ताव में Kh-69 स्टील्थ क्रूज मिसाइल भी शामिल है. इसे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है. इसकी मारक क्षमता करीब 290 किलोमीटर बताई जाती है.

इसके अलावा R-37M एयर-टू-एयर मिसाइल भी पैकेज का हिस्सा बताई गई है. इसकी रेंज 300 से 400 किलोमीटर तक बताई जाती है और इसकी रफ्तार करीब Mach 6 है. इसे दुश्मन के AWACS और टैंकर विमानों को निशाना बनाने वाली मिसाइल के तौर पर देखा जाता है.

रूस ने Su-57 के साथ Kinzhal और Zircon जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलों के इस्तेमाल की संभावना भी बताई थी. Kinzhal की रेंज करीब 2,000 किलोमीटर और रफ्तार Mach 10 तक बताई जाती है.

भारत को क्या ऑफर दे रहा था रूस?

रूस ने Su-57 की तकनीक के बड़े स्तर पर हस्तांतरण का प्रस्ताव दिया था. इसके तहत भारत को स्टील्थ तकनीक और सोर्स कोड देने की बात कही गई थी, ताकि भारत इसमें अपने हथियार और सेंसर लगा सके.

इसके अलावा शुरुआती 36 से 40 विमान रूस से लेने और बाकी विमानों का भारत में निर्माण करने का प्रस्ताव था. भारत में इन विमानों के निर्माण के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की नासिक फैसिलिटी का इस्तेमाल करने की बात कही गई थी.

रूस ने भारत के AMCA कार्यक्रम में तकनीकी मदद देने की पेशकश भी की थी. भारत अपना पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान AMCA विकसित कर रहा है.

भारत ने रूस का प्रस्ताव क्यों ठुकराया?

हालांकि भारत ने रूस के Su-57 प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है. भारत का फोकस अब अपने AMCA कार्यक्रम पर है. तब तक जरूरत पूरी करने के लिए फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की योजना पर आगे बढ़ा जा रहा है.

भारत का मानना है कि जब चीन और अमेरिका जैसे देश छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने पर काम कर रहे हैं, तो पांचवीं पीढ़ी के विमान खरीदने और उसके लिए अलग व्यवस्था तैयार करने में ज्यादा समय लगाना सही नहीं होगा.

फ्रांस के साथ छठी पीढ़ी के विमान पर नजर

भारत अब फ्रांस के साथ मिलकर छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने की संभावना तलाश रहा है. फ्रांस पहले जर्मनी के साथ FCAS छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम का हिस्सा था, लेकिन तकनीक और दूसरे मुद्दों को लेकर मतभेद के बाद वह इस कार्यक्रम से अलग हो चुका है.

अब फ्रांस को छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम के लिए नए सहयोगी की जरूरत है. भारत और फ्रांस के बीच रक्षा संबंध भी काफी मजबूत हैं. 114 राफेल विमानों की बड़ी डील भी दोनों देशों के बीच होने वाली है.

ऐसे में अगर भारत और फ्रांस मिलकर छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो यह दोनों के लिए बड़ा मौका हो सकता है. हालांकि सबसे बड़ा सवाल तकनीक, बौद्धिक संपदा और इसके प्रबंधन को लेकर रहेगा. जिस तरह फ्रांस ने जर्मनी के साथ इन मुद्दों पर समझौता नहीं किया, क्या वह भारत के साथ इन मामलों में सहमत होगा, यह देखना अहम होगा.

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