एशियाई कूटनीति इन दिनों नए मोड़ पर खड़ी है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया भारत यात्रा ने न केवल दिल्ली-मॉस्को संबंधों को नई मजबूती दी है, बल्कि बीजिंग की ओर से भी अप्रत्याशित रूप से सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है. ऐसे वक्त में, जब वैश्विक शक्तियां नए गठबंधन गढ़ रही हैं, भारत-चीन-रूस का संभावित त्रिकोण एक बार फिर चर्चा में आ गया है.
पुतिन की भारत यात्रा के तुरंत बाद चीन ने बयान जारी कर इस साझेदारी को वैश्विक स्थिरता के लिए अहम बताते हुए संकेत दिया है कि तीनों देश अगर मिलकर आगे बढ़ें, तो एशिया ही नहीं, पूरा विश्व एक संतुलित और सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ सकता है.
ग्लोबल साउथ में ‘भारत-चीन-रूस’ की बड़ी भूमिका
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत, चीन और रूस केवल बड़े भू-राजनीतिक खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ की दिशा तय करने वाले प्रमुख स्तंभ हैं. गुओ के अनुसार, तीनों देशों की उभरती अर्थव्यवस्थाएँ और उनकी सामूहिक क्षमता दुनिया के लिए सकारात्मक परिणाम ला सकती है. उन्होंने कहा कि इन राष्ट्रों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग बढ़ना न सिर्फ इनकी अपनी प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता को भी मजबूती देता है.
लद्दाख तनाव के बाद संबंध सुधारने की पहल
भारत और चीन के बीच पिछले चार वर्षों में पूर्वी लद्दाख विवाद ने रिश्तों को गहरा झटका दिया था. हालांकि अब बीजिंग की भाषा में नरमी साफ देखी जा सकती है. गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन भारत के साथ संबंधों को “स्थिर, संतुलित और टिकाऊ” बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देश रणनीतिक दृष्टिकोण से मिलकर ऐसे कदम उठाना चाहते हैं, जिससे दोनों देशों की जनता को वास्तविक लाभ मिल सके. यह बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सीमा विवाद पर तनाव होने के बावजूद, बीजिंग रिश्तों को सामान्य करने के लिए तैयार है.
पुतिन के बयान पर चीन का स्वागत
भारत यात्रा पर आने से पहले पुतिन ने एक इंटरव्यू में भारत और चीन को रूस के ‘करीबी मित्र’ बताते हुए कहा था कि दोनों देश अपने मतभेद स्वयं सुलझाने की क्षमता रखते हैं. इस पर चीन ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह रूस के साथ-साथ भारत के साथ भी मजबूत द्विपक्षीय सहयोग जारी रखना चाहता है.चीनी मीडिया ने पुतिन के उन बयानों को भी प्रमुखता से दिखाया, जिनमें उन्होंने भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने पर अमेरिकी आलोचना को खारिज किया था. यह रुख इस ओर इशारा करता है कि रूस-भारत नज़दीकियों से चीन को चिंता नहीं, बल्कि सामरिक अवसर दिखाई दे रहे हैं.
पुतिन की यात्रा में बने नए समीकरण
4–5 दिसंबर को हुए इस उच्चस्तरीय दौरे में भारत और रूस ने कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए. दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया.रक्षा उत्पादन, ऊर्जा सहयोग, आर्कटिक प्रोजेक्ट्स, आंतरिक सुरक्षा और निवेश जैसे क्षेत्रों में भी नई योजनाएँ सामने आईं. इसके अलावा एक दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी कार्यक्रम को भी मंजूरी मिली, जो आने वाले वर्षों में रूस-भारत रिश्तों को नई दिशा देगा.
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