कैरिबियन सागर में अमेरिका की दादागिरी पर भड़का रूस, दे दी चेतावनी; वेनेजुएला को दिया खुला समर्थन

Caribbean Drug Trafficking: कैरिबियन सागर एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बन गया है. अमेरिकी रक्षा मंत्री पेटे हेगसेथ ने शनिवार को जानकारी दी कि अमेरिकी सेना ने मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल एक नाव पर हवाई हमला किया, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई. 

Russia got angry America bullying in the Caribbean Sea Gave open support to Venezuela
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Caribbean Drug Trafficking: कैरिबियन सागर एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बन गया है. अमेरिकी रक्षा मंत्री पेटे हेगसेथ ने शनिवार को जानकारी दी कि अमेरिकी सेना ने मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल एक नाव पर हवाई हमला किया, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई. 

आधिकारिक बयान में इसे “नार्को-टेररिज्म के खिलाफ सैन्य कार्रवाई” बताया गया है. हालांकि, क्षेत्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ ड्रग माफिया के खिलाफ नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक प्रभाव के लिए चल रहा एक बड़ा अभियान है.

ट्रंप प्रशासन का ‘नार्को-टेरर’ अभियान

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने मादक पदार्थों की तस्करी को राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे के रूप में परिभाषित किया है. इसी रणनीति के तहत अमेरिका ने हाल ही में कैरिबियन सागर में F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट, नेवी के युद्धपोत और सैकड़ों सैनिकों की तैनाती की है. हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर कहा कि “यह हमला ड्रग्स नेटवर्क से जुड़ी एक नाव पर किया गया था, जो लंबे समय से अमेरिका के खिलाफ तस्करी गतिविधियों में शामिल थी.”

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अब तक चलाए गए इस अभियान में कम से कम 15 नावों को निशाना बनाया गया है, और इसमें 60 से अधिक लोग मारे गए हैं. हालांकि अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि सभी अभियान “सटीक खुफिया जानकारी” के आधार पर किए गए हैं, मगर इनकी वैधता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

रूस ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

इस सैन्य कार्रवाई पर रूस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ाखारोवा ने कहा कि अमेरिका ड्रग-विरोधी अभियान के नाम पर शक्ति प्रदर्शन कर रहा है. उन्होंने कहा कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और इससे कैरिबियन क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ेगी.

रूस ने साफ कर दिया कि वह वेनेजुएला के साथ खड़ा रहेगा, जो इस समय अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है. दरअसल, रूस और वेनेजुएला के बीच तेल और रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है, यही बात वॉशिंगटन को सबसे अधिक चिंतित कर रही है.

संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने इस अभियान पर चिंता जताते हुए कहा है कि “बिना प्रक्रिया की गई ये हत्याएं” अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन हैं. संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिका से आग्रह किया है कि वह ऐसे एकतरफा सैन्य अभियानों को तुरंत रोके और स्थानीय सरकारों के साथ मिलकर ड्रग नेटवर्क से निपटने की नीति बनाए.

असल मकसद क्या है?

कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा अभियान केवल ड्रग तस्करी रोकने का बहाना है. वास्तव में अमेरिका कैरिबियन क्षेत्र में अपना वर्चस्व फिर से स्थापित करना चाहता है.

यह इलाका वेनेजुएला, क्यूबा, निकारागुआ और लैटिन अमेरिका के अन्य देशों को मिलाकर अमेरिका का पारंपरिक “बैकयार्ड” कहा जाता है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां रूस और चीन की आर्थिक और सैन्य मौजूदगी लगातार बढ़ रही है.

रूस न केवल वेनेजुएला को तेल और हथियारों में सहयोग दे रहा है, बल्कि चीन भी इस क्षेत्र में बंदरगाहों, संचार नेटवर्क और खनन परियोजनाओं में निवेश बढ़ा रहा है. इससे अमेरिका की रणनीतिक घबराहट बढ़ गई है. विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका अब इस क्षेत्र में शक्ति प्रदर्शन कर यह संदेश देना चाहता है कि “कैरिबियन अभी भी उसका प्रभाव क्षेत्र है.”

क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की इस आक्रामक रणनीति से लैटिन अमेरिका और कैरिबियन के छोटे देशों में असंतोष बढ़ सकता है. स्थानीय सरकारें डर रही हैं कि कहीं यह इलाका फिर से शीत युद्ध के नए संस्करण में न बदल जाए, जहां रूस और अमेरिका प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से टकराव की स्थिति में पहुंच जाएं.

रिपोर्टों के अनुसार, क्यूबा और निकारागुआ ने भी अमेरिका की इस नीति पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि अमेरिकी कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में राजनीतिक अस्थिरता, हथियारों की होड़ और आर्थिक असुरक्षा बढ़ेगी.

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