रूस के मिसाइल हमलों से जूझ रहे यूक्रेन को अब अमेरिका और यूरोपीय देशों से और अधिक सैन्य सहायता मिलने जा रही है. राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बुधवार को बताया कि पश्चिमी देशों द्वारा उन्नत एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति की जा रही है, जो आने वाले महीनों में रूस की बढ़ती आक्रामकता के खिलाफ यूक्रेन की सुरक्षा को मजबूत बनाएगी.
जेलेंस्की के अनुसार, यूक्रेन को अब तक अमेरिका में निर्मित हथियारों के लिए 2 अरब डॉलर से ज्यादा की सैन्य सहायता मिल चुकी है, और यह आंकड़ा अक्टूबर तक 3.5 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. इस सहायता के तहत NASAMS और Patriot जैसे अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को यूक्रेन की सीमाओं पर तैनात किया जाएगा.
रूस के हमलों से चरमराया यूक्रेनी ऊर्जा ढांचा
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बताया कि रूस द्वारा बार-बार किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों ने देश की बिजली और गैस आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है. विशेषकर सर्दियों के मौसम में जब ऊर्जा की मांग बढ़ जाती है, रूस के हमले नागरिकों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं. ऐसे में एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका केवल सैन्य मोर्चे पर नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी बेहद अहम बन गई है. उन्होंने चेताया कि हीटिंग सीजन से पहले रूस अपने हमलों को और तेज कर सकता है, इसलिए यूक्रेन को जल्द से जल्द ठोस सुरक्षा कवच की आवश्यकता है.
नाटो की भी सक्रिय भागीदारी
नाटो के वरिष्ठ प्रतिनिधि पैट्रिक टर्नर ने इस सैन्य सहायता की पुष्टि करते हुए बताया कि अब तक चार पैकेज फंड हो चुके हैं और उनमें शामिल उपकरणों की आपूर्ति शुरू कर दी गई है. उन्होंने कहा कि सहयोगी देश यूक्रेन को तत्काल सहायता पहुंचाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और इस प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है.
सिर्फ हथियार नहीं, सुरक्षा का भरोसा
यूक्रेन को मिलने वाले NASAMS और Patriot जैसे सिस्टम अब केवल युद्ध के साधन नहीं, बल्कि नागरिकों की रक्षा की सबसे अहम जरूरत बन गए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ये सिस्टम रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने में निर्णायक साबित हो सकते हैं. यूक्रेन में वर्तमान में जिस तरह से ऊर्जा संरचनाएं और नागरिक ढांचा निशाना बन रहे हैं, उसमें इन एयर डिफेंस मिसाइलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी.
पश्चिमी समर्थन से युद्ध में नया मोड़ संभव
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह सहायता युद्ध के समीकरण बदल सकती है. जहां एक ओर यह यूक्रेन को राहत और आत्मविश्वास देगी, वहीं दूसरी ओर यह रूस के लिए एक कड़ा संदेश होगा कि पश्चिमी दुनिया अब केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं है. अमेरिका और यूरोप की यह सामूहिक प्रतिबद्धता यह भी दर्शाती है कि वे यूक्रेन के संघर्ष को अकेला नहीं छोड़ने वाले हैं.
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