RSS के शताब्दी समारोह में बोले पीएम मोदी: "संघ का हर कदम राष्ट्र निर्माण को समर्पित"

विजयादशमी के पावन अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया. यह आयोजन राजधानी के डॉक्टर आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में हुआ, जहां पीएम मोदी ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा को स्मरणीय बनाने के लिए विशेष स्मृति डाक टिकट और स्मारक सिक्का भी जारी किया.

RSS 100 Year Completed pm modi released memorial stamp
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विजयादशमी के पावन अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया. यह आयोजन राजधानी के डॉक्टर आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में हुआ, जहां पीएम मोदी ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा को स्मरणीय बनाने के लिए विशेष स्मृति डाक टिकट और स्मारक सिक्का भी जारी किया.

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह क्षण केवल सम्मान का नहीं, बल्कि संघ के समर्पित प्रयासों की ऐतिहासिक मान्यता का प्रतीक है. उन्होंने बताया कि आज जारी किया गया स्मारक सिक्का ऐतिहासिक है क्योंकि इस पर पहली बार भारत माता की तस्वीर अंकित की गई है, साथ ही संघ का मूल मंत्र भी उकेरा गया है.

विजय कुमार मल्होत्रा को श्रद्धांजलि, नवरात्र की शुभकामनाएं

पीएम मोदी ने संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक विजय कुमार मल्होत्रा के हालिया निधन को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी. साथ ही देशवासियों को नवरात्रि के शुभ अवसर की हार्दिक बधाई भी दी.

संघ की शाखाएं नहीं, संस्कारों की पाठशाला हैं

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में संघ की शाखाओं को संस्कार निर्माण की प्रयोगशाला बताया. उन्होंने कहा कि "संघ ने व्यक्ति निर्माण के ज़रिए राष्ट्र निर्माण की राह अपनाई है." संघ के स्वयंसेवकों द्वारा 26 जनवरी की परेड में भाग लेने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश की आन-बान-शान के साथ जब स्वयंसेवक कदम से कदम मिलाते हैं, तो उसमें राष्ट्रभक्ति की झलक स्पष्ट दिखती है.

समाज के हर कोने में सक्रिय है संघ: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि समाज के हर आयाम में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है. उन्होंने कहा कि चाहे आदिवासी क्षेत्रों का कल्याण हो या शिक्षा, सेवा और संस्कार का क्षेत्र—संघ के स्वयंसेवक हर मोर्चे पर जुटे हैं.

विचारों में एकता, कार्यों में विविधता

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन इस विचार के साथ किया कि संघ की धारा बहुआयामी ज़रूर है, लेकिन उसका मूल विचार एक ही है.राष्ट्र सर्वोपरि. उन्होंने इस ‘अविरल तप और अखंड राष्ट्र भावना’ को भारत की शक्ति का स्तंभ बताया.

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