Himachal Petrol Diesel Price: हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है, जिससे आम लोगों पर महंगाई का असर और बढ़ने की आशंका है. आर्थिक दबाव का सामना कर रही राज्य सरकार ने ईंधन पर नया उपकर लगाने का निर्णय लिया है, जिसके बाद कीमतों में प्रति लीटर करीब 5 रुपये तक की बढ़ोतरी होगी. इस फैसले को लेकर विधानसभा में काफी बहस और हंगामा हुआ, लेकिन अंततः विधेयक पारित कर दिया गया.
राज्य सरकार का कहना है कि यह फैसला किसी आम टैक्स बढ़ोतरी की तरह नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को आर्थिक सहारा देना है. सरकार ने इस उपकर को ‘अनाथ और विधवा उपकर’ नाम दिया है. इसके जरिए जो राशि जुटाई जाएगी, उसे एक विशेष फंड में जमा किया जाएगा और अनाथ बच्चों व विधवाओं के कल्याण पर खर्च किया जाएगा. सरकार का दावा है कि इससे जरूरतमंदों को नियमित आर्थिक सहायता मिल सकेगी और उनके लिए नई योजनाओं का रास्ता भी खुलेगा.
विधानसभा में जोरदार विरोध के बीच पास हुआ विधेयक
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अगुवाई में हिमाचल प्रदेश मूल्य वर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन में पेश किया गया. इस पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने इसे जनता पर अतिरिक्त बोझ बताते हुए कड़ा विरोध किया. विपक्ष का कहना था कि पहले से ही महंगाई से परेशान लोगों पर इस तरह का फैसला उचित नहीं है. हालांकि, सरकार ने अपने बहुमत के आधार पर बिल को पारित करा लिया. विरोध में विपक्ष ने सदन से वॉकआउट भी किया.
कितनी बढ़ेंगी कीमतें और क्या होगा असर
इस फैसले के लागू होने के बाद पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में लगभग 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो सकती है. विपक्ष का दावा है कि इससे पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार और डीज़ल 90 रुपये से ऊपर जा सकता है. हिमाचल प्रदेश में पहले से ही पेट्रोल और डीज़ल पर टैक्स दरें काफी अधिक हैं, ऐसे में यह नई बढ़ोतरी सीधे आम लोगों की जेब पर असर डालेगी.
आम जनता, किसान और कारोबार पर असर
ईंधन की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी के कई पहलुओं पर पड़ेगा. ट्रांसपोर्ट महंगा होने से खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं. निर्माण सामग्री की लागत भी बढ़ेगी, जिससे मकान बनाना और महंगा हो जाएगा. पहाड़ी राज्य होने के कारण यहां सामान की ढुलाई पहले ही महंगी होती है, ऐसे में यह फैसला किसानों और खासतौर पर सेब उत्पादकों के लिए चिंता का कारण बन सकता है. बस और टैक्सी किराए में भी बढ़ोतरी की संभावना है.
पर्यटन पर भी पड़ सकता है असर
हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की बड़ी भूमिका है. हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं. ऐसे में ईंधन महंगा होने से यात्रा खर्च बढ़ सकता है, जिससे पर्यटन कारोबार पर असर पड़ने की आशंका है. इसके अलावा अगर पड़ोसी राज्यों की तुलना में यहां ईंधन महंगा हुआ, तो लोग अन्य राज्यों में ही ईंधन भरवाना पसंद कर सकते हैं.
मुख्यमंत्री ने फैसले का किया बचाव
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि सरकार का मकसद समाज के कमजोर वर्गों को मजबूत करना है. उनका कहना है कि केंद्र सरकार भी ईंधन पर भारी सेस वसूलती है और यह कदम उसी दिशा में एक प्रयास है. उन्होंने यह भी कहा कि पड़ोसी राज्यों में कई जगह ईंधन की कीमतें अधिक हैं और हिमाचल में अभी भी स्थिति नियंत्रण में है. मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह सामाजिक कल्याण के प्रयासों का विरोध कर रहा है.
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