26 जनवरी 2026 को जब देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा होगा, तब नई दिल्ली का कर्तव्य पथ सिर्फ परंपरा और संस्कृति का नहीं, बल्कि भारत की सैन्य शक्ति और तकनीकी आत्मनिर्भरता का भी प्रदर्शन करेगा. इस बार परेड में एक ऐसा हथियार पहली बार दुनिया के सामने आएगा, जो भारत को वैश्विक सैन्य महाशक्तियों की कतार में और मजबूती से खड़ा कर देगा.
डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन यानी DRDO की लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल, जिसे LRAShM नाम दिया गया है, पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में दिखाई जाएगी. यह मिसाइल सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि भारत की उस रणनीतिक सोच का प्रतीक है, जिसमें हिंद महासागर से लेकर वैश्विक समुद्री रास्तों तक अपनी सुरक्षा खुद सुनिश्चित करने का संकल्प साफ नजर आता है.