म्हारी छोरियां छोरों से कम है के... गणतंत्र दिवस परेड में बेटियों ने बाइक पर किया स्टंट, देखें VIDEO

गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भारतीय अर्द्धसैनिक बलों ने एक नई मिसाल पेश की, जब एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) और सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) की महिला जवानों ने अपनी साहसिकता, शौर्य और धैर्य से पूरे देश को चौंका दिया.

Republic Day parade Indian daughters performed stunts on bikes
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गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भारतीय अर्द्धसैनिक बलों ने एक नई मिसाल पेश की, जब एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) और सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) की महिला जवानों ने अपनी साहसिकता, शौर्य और धैर्य से पूरे देश को चौंका दिया. इस खास दिन पर, इन महिला जांबाजों ने रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिलों पर अद्वितीय बाइक फॉर्मेशन और करतब दिखाए, जो न केवल देशवासियों को गर्व महसूस करवा गए, बल्कि ‘नारी शक्ति’ के प्रतीक के रूप में उनके साहस को भी उजागर किया.

गणतंत्र दिवस परेड 2026 के दौरान जब महिला जवानों ने बाइक पर स्टंट्स किए तो यह एक अविस्मरणीय दृश्य था. इन महिला कर्मियों ने अपनी सशक्त उपस्थिति से परेड को रोमांचित कर दिया और यह साबित कर दिया कि भारतीय महिलाएं अब किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं.

सीआरपीएफ और एसएसबी की महिला टुकड़ी

सीआरपीएफ और एसएसबी की महिला टुकड़ी ने कर्तव्य पथ पर जब रॉयल एनफील्ड पर लाजवाब फॉर्मेशन दिखाया, तो दर्शक वाह-वाह कर उठे. इन महिला जवानों के करतबों को देख लोग न केवल हैरान थे, बल्कि उनका सीना गर्व से चौड़ा हो गया. असिस्टेंट कमांडेंट सीमा नाग और नवीन कुमारी के नेतृत्व में, इन महिला जवानों ने बाइक पर फॉर्मेशन में चलते हुए जो शौर्य और साहस दिखाया, वह बहुत ही प्रेरणादायक था.

इन जवानों की स्टंटबाजी ने न केवल उनकी शारीरिक ताकत का प्रदर्शन किया, बल्कि यह दिखाया कि भारतीय महिलाएं हर चुनौती को स्वीकार कर सकती हैं. बाइक पर करतब करना आसान नहीं होता, लेकिन इन महिलाओं ने इसे अपने आत्मविश्वास और प्रशिक्षण से संभव कर दिखाया. कर्तव्य पथ पर उनका प्रदर्शन एक प्रतीक बन गया कि अब महिलाएं किसी भी मोर्चे पर पुरुषों से पीछे नहीं हैं.

सीआरपीएफ की महिला अधिकारी ने रचा इतिहास

गणतंत्र दिवस 2026 के दौरान सीआरपीएफ की एक महिला अधिकारी ने इतिहास रचा जब उन्होंने केवल पुरुष कर्मियों से बनी टुकड़ी का नेतृत्व किया. असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन बाला ने सीआरपीएफ के 147 जवानों की टुकड़ी का नेतृत्व किया, जो कि किसी भी महिला अधिकारी द्वारा इस तरह की टुकड़ी का नेतृत्व करने का पहला उदाहरण था. सिमरन बाला ने जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले से आकर न केवल अपनी टीम का नेतृत्व किया, बल्कि देश के सबसे बड़े अर्द्धसैनिक बल के इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया.

सिमरन बाला की उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पहली बार था जब किसी महिला अधिकारी ने 140 से अधिक केवल पुरुष जवानों के दल का नेतृत्व किया. उनका नेतृत्व सिर्फ महिला सशक्तिकरण का प्रतीक नहीं था, बल्कि यह दर्शाता था कि भारतीय सुरक्षा बलों में महिला अधिकारी किसी भी चुनौती को पूरी तरह से पार कर सकती हैं.

सिमरन बाला की यह ऐतिहासिक जीत केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का कारण बन गई. उनकी शौर्यपूर्ण उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि भारत की महिलाएं आज हर क्षेत्र में अग्रणी हैं और उन्हें हर मोर्चे पर समान सम्मान और अवसर मिल रहे हैं.

नारी शक्ति: सीआरपीएफ की महिला टुकड़ी

सिमरन बाला के नेतृत्व में सीआरपीएफ की महिला टुकड़ी ने गणतंत्र दिवस परेड के दौरान ‘देश के हम हैं रक्षक’ गीत की धुन पर कदम ताल किया. इस गाने के साथ ही महिलाओं की टोली ने अपने आत्मविश्वास और परिपक्वता का शानदार प्रदर्शन किया. यह दिन उनके लिए खास था, क्योंकि यह भारतीय अर्द्धसैनिक बलों के इतिहास में एक नया अध्याय था.

परेड के दौरान, सीआरपीएफ और एसएसबी की महिला टुकड़ी ने न केवल अपनी शारीरिक फिटनेस और प्रशिक्षण को दिखाया, बल्कि यह भी साबित किया कि महिलाएं किसी भी काम को मजबूती से कर सकती हैं, चाहे वह शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो या मानसिक रूप से. इन महिला जवानों ने साबित किया कि महिलाओं को किसी भी क्षेत्र में कोई भी चुनौती लेने से डरना नहीं चाहिए.

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