Siddhesh Lad: रणजी ट्रॉफी के मौजूदा सीजन में मुंबई के कप्तान सिद्धेश लाड ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने उन्हें भारतीय घरेलू क्रिकेट के चुनिंदा दिग्गजों की कतार में खड़ा कर दिया है. दिल्ली के खिलाफ जारी मुकाबले में शतक जड़ते ही सिद्धेश ने इस सीजन में अपना पांचवां शतक पूरा किया और इसके साथ ही उन्होंने रणजी इतिहास के एक बेहद खास क्लब में एंट्री कर ली.
करीब नौ दशक पुराने रणजी ट्रॉफी इतिहास में अब तक सिर्फ 26 बल्लेबाज़ ही एक ही सीजन में पांच या उससे अधिक शतक लगा पाए हैं. इनमें से भी मुंबई की ओर से यह उपलब्धि हासिल करने वाले बल्लेबाज़ बेहद कम रहे हैं. सिद्धेश लाड अब उन गिने-चुने नामों में शामिल हो गए हैं, जिनके साथ रूसी मोदी और सचिन तेंदुलकर जैसे महान बल्लेबाज़ों का नाम जुड़ा हुआ है.
कप्तानी पारी जिसने रच दिया रिकॉर्ड
इस उपलब्धि को और भी खास बनाता है वह तथ्य कि सिद्धेश लाड ने यह रिकॉर्ड बतौर कप्तान बनाया. उन्होंने सिर्फ रन नहीं बनाए, बल्कि मैदान पर मोर्चे से टीम का नेतृत्व किया. दिल्ली के खिलाफ मुकाबले में सिद्धेश ने 178 गेंदों में नाबाद 102 रन बनाए, जिसमें 12 चौके शामिल थे. यह उनका रणजी ट्रॉफी में लगातार चौथा शतक भी रहा.
मुंबई की पारी एक समय दबाव में थी, लेकिन कप्तान ने जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली. सुवेद पारकर ने नाबाद 53 रन बनाकर उनका बेहतरीन साथ निभाया. दोनों के बीच छठे विकेट के लिए हुई 130 रनों की अटूट साझेदारी ने मैच का रुख मुंबई की ओर मोड़ दिया और टीम का स्कोर 266/5 तक पहुंचाया.
मैच की स्थिति और मुंबई की पकड़
दिल्ली की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 221 रन बनाए थे. मुंबई के गेंदबाज़ों ने नियमित अंतराल पर विकेट लेकर विपक्षी टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचने से रोके रखा. इसके बाद बल्लेबाज़ी में शुरुआती झटकों के बावजूद मुंबई ने संयम दिखाया. दिन का खेल समाप्त होने तक मुंबई ने 45 रनों की बढ़त हासिल कर ली थी, जिससे मुकाबले में उसकी स्थिति मजबूत हो गई.
रूसी मोदी और सचिन तेंदुलकर की विरासत में नाम
सिद्धेश लाड का नाम अब उस विशिष्ट सूची में दर्ज हो चुका है, जिसमें मुंबई के लिए एक सीजन में पांच शतक लगाने वाले बल्लेबाज़ों में सिर्फ दो ही नाम पहले से मौजूद थे, रूसी मोदी (1944-45) और सचिन तेंदुलकर (1994-95). दशकों के अंतराल के बाद किसी मुंबई बल्लेबाज़ का इस क्लब में पहुंचना इस उपलब्धि की अहमियत को और बढ़ा देता है.
‘भारत के लिए खेलना मेरा सपना है’
मैच के बाद मीडिया से बातचीत में सिद्धेश लाड ने अपने लक्ष्य को लेकर साफ बात कही. उन्होंने कहा कि वह बहुत दूर की नहीं सोचते, लेकिन देश के लिए खेलना उनका सबसे बड़ा सपना है. सिद्धेश के मुताबिक, फिलहाल उनका पूरा फोकस मुंबई के लिए रणजी ट्रॉफी जीतने पर है, खासकर इसलिए क्योंकि वह दूसरे राज्य का प्रतिनिधित्व करने के बाद वापस मुंबई लौटे हैं और मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने उन पर भरोसा जताया है.
गोवा से वापसी और नई शुरुआत
2022-23 सीजन में सिद्धेश लाड ने गोवा की ओर से रणजी ट्रॉफी खेली थी. इसके बाद उन्होंने मुंबई में वापसी की और इस सीजन में कप्तानी की जिम्मेदारी भी संभाली. वापसी के बाद जिस तरह का प्रदर्शन उन्होंने किया है, उसने उनके फैसले को पूरी तरह सही साबित कर दिया है.
पिता दिनेश लाड की छाया और आत्मविश्वास
सिद्धेश लाड के पिता दिनेश लाड भारतीय क्रिकेट के जाने-माने कोच हैं और रोहित शर्मा जैसे कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को उन्होंने तराशा है. इस बारे में सिद्धेश का कहना है कि उन्होंने इसे कभी दबाव के रूप में नहीं लिया. उनके लिए यह हमेशा गर्व और सौभाग्य की बात रही है. उन्होंने साफ कहा कि उनके पिता ने कभी उन पर व्यक्तिगत दबाव नहीं डाला, भले ही बाहर के लोग उनसे ज्यादा उम्मीदें रखते रहे हों.
मेहनत, नेतृत्व और धैर्य की कहानी
सिद्धेश लाड की यह पारी सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि धैर्य, जिम्मेदारी और नेतृत्व का उदाहरण भी है. कप्तान के तौर पर आगे बढ़कर टीम को संभालना और ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाना यह दिखाता है कि वह न सिर्फ रन बनाने वाले बल्लेबाज़ हैं, बल्कि बड़े मौकों के खिलाड़ी भी हैं.
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