सपा नेता आज़म खां को हाईकोर्ट से मिली जमानत, फिर भी जेल से नहीं आ सकेंगे बाहर, ये है वजह

सपा के वरिष्ठ नेता आज़म खां को क्वालिटी बार प्रकरण में हाईकोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद राहत जरूर मिली, लेकिन उनकी कानूनी मुश्किलें अब भी कम होती नहीं दिख रहीं. एक अन्य मामले में अग्रिम विवेचना के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ तीन गंभीर धाराएं और जोड़ दी हैं.

Rampur New charges added in Azam Khan property case jail stay continues
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रामपुर: सपा के वरिष्ठ नेता आज़म खां को क्वालिटी बार प्रकरण में हाईकोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद राहत जरूर मिली, लेकिन उनकी कानूनी मुश्किलें अब भी कम होती नहीं दिख रहीं. एक अन्य मामले में अग्रिम विवेचना के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ तीन गंभीर धाराएं और जोड़ दी हैं, जिसके चलते उन्हें अब फिर से कोर्ट में पेश होना पड़ेगा और नई धाराओं में भी ज़मानत लेनी होगी.

क्वालिटी बार मामले में हाईकोर्ट से मिली राहत

21 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्वालिटी बार से जुड़े अवैध कब्जे के मामले में आज़म खां की ज़मानत याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था. 18 सितंबर को हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आज़म खां को राहत दी और ज़मानत मंजूर कर ली. यह मामला सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के सईद नगर हरदोई पट्टी स्थित क्वालिटी बार पर अवैध कब्जे का है, जिसकी शिकायत तत्कालीन राजस्व निरीक्षक अनंगराज सिंह ने 2019 में की थी.

शत्रु संपत्ति मामले में फिर बढ़ीं मुश्किलें

हालांकि, जेल से रिहाई की उम्मीद कर रहे आज़म खां को एक बार फिर झटका लगा है. साल 2020 में सिविल लाइंस थाने में दर्ज एक अन्य मामले में अब तीन गंभीर धाराएं—धारा 467, 471 और 201—जोड़ी गई हैं. यह मामला शत्रु संपत्ति से संबंधित दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ और सबूत मिटाने से जुड़ा है. इस मुकदमे में पहले आज़म खां, उनकी पत्नी तजीन फातमा, बेटे अब्दुल्ला आज़म और कलक्ट्रेट के पूर्व कर्मचारी भगवंत को आरोपी बनाया गया था. भगवंत अब सरकारी गवाह बन गया है और उसके बयान के आधार पर ही पुलिस ने धाराएं बढ़ाते हुए पूरक आरोपपत्र दाखिल किया है.

कोर्ट ने 20 सितंबर को तलब किया

एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) ने इस नए घटनाक्रम के तहत आज़म खां को 20 सितंबर को सीतापुर जेल से पेश करने का आदेश दिया है. अभियोजन पक्ष ने कोर्ट से अनुरोध किया था कि नई धाराओं में आज़म खां को न्यायिक हिरासत में लिया जाए और वारंट जारी किया जाए. बचाव पक्ष ने इस पर आपत्ति जताई, लेकिन कोर्ट ने अभियोजन के पक्ष में फैसला सुनाया.

जिन धाराओं में बढ़ा मुकदमा, वे कितनी गंभीर?

धारा 467: किसी दस्तावेज की जालसाजी से जुड़ी है, जो सबसे गंभीर अपराधों में मानी जाती है और इसके लिए आजीवन कारावास की सजा हो सकती है.

धारा 471: जाली दस्तावेज के उपयोग से जुड़ी है.

धारा 201: किसी अपराध से संबंधित साक्ष्य को नष्ट करने या छिपाने से संबंधित है.

सभी धाराएं गैर-जमानती और गंभीर प्रकृति की हैं, जिनमें लंबी सजा का प्रावधान है. ऐसे में आज़म खां को इन नए आरोपों में भी जमानत लेनी होगी, तभी वे जेल से बाहर आ सकते हैं.

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