Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक बदलाव की संभावनाएं भी मजबूत होती जा रही हैं. मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्ट के पुनर्गठन की सिफारिश किए जाने के बाद पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिक गई हैं. इसी बीच, मामले में कई आरोपियों के जेल भेजे जाने और दो प्रमुख ट्रस्टियों के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट की आगामी बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है.
SIT रिपोर्ट में प्रशासनिक सुधार की सिफारिश
जानकारी के अनुसार, एसआईटी ने अपनी शुरुआती जांच में ट्रस्ट के मौजूदा ढांचे में बदलाव की जरूरत बताई है. रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि ट्रस्ट के संचालन को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए किसी अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त किया जाए. माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव पर आगामी बैठक में विस्तार से चर्चा हो सकती है.
11 जुलाई की बैठक पर टिकी निगाहें
श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अगली त्रैमासिक बैठक 11 जुलाई को प्रस्तावित है. इस बैठक में ट्रस्ट के संगठनात्मक ढांचे, इस्तीफों और भविष्य की कार्ययोजना पर महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं. चर्चा यह भी है कि बैठक से पहले केंद्र सरकार CEO नियुक्ति को लेकर अपना अंतिम निर्णय ले सकती है.
दो ट्रस्टियों के इस्तीफे से बढ़ी हलचल
चढ़ावा मामले की जांच तेज होने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र के इस्तीफे की जानकारी सामने आई. बताया जा रहा है कि विभिन्न घटनाक्रमों और बढ़ते दबाव के बीच दोनों ने अपने पद छोड़ने का फैसला किया. हालांकि इन इस्तीफों पर अंतिम निर्णय ट्रस्ट की आगामी बैठक में लिया जाएगा.
नए CEO के लिए किन नामों की चर्चा?
ट्रस्ट में संभावित CEO नियुक्ति को लेकर कुछ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं. इनमें राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र का नाम पहले से सामने आ रहा था. इसके अलावा, पूर्व आईएएस अधिकारी योगेश्वरराम मिश्र का नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल बताया जा रहा है. वे प्रशासनिक सेवा में लंबे अनुभव के साथ अयोध्या में जिलाधिकारी के रूप में भी कार्य कर चुके हैं.
इस्तीफे मंजूर हुए तो खाली होंगे कई पद
यदि दोनों ट्रस्टियों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए जाते हैं, तो ट्रस्ट में रिक्त पदों की संख्या बढ़ जाएगी. पहले से एक पद पूर्व ट्रस्टी बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद खाली है. इसके अलावा, कुछ वरिष्ठ ट्रस्टी अधिक आयु और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से सक्रिय भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं. ऐसे में पुनर्गठन के दौरान नए सदस्यों को शामिल किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है.
CEO नियुक्ति के लिए नियमों में करना होगा बदलाव
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान ट्रस्ट नियमावली में CEO पद का कोई प्रावधान नहीं है. इसलिए यदि केंद्र सरकार इस पद का गठन करना चाहती है, तो पहले ट्रस्ट की उपविधियों (बायलॉज) में संशोधन करना होगा. नियमों में बदलाव के बाद ही आधिकारिक रूप से CEO की नियुक्ति संभव हो सकेगी.
जांच के साथ आगे बढ़ेगी नई व्यवस्था
चढ़ावा मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई अहम फैसले सामने आ सकते हैं. ऐसे में 11 जुलाई की बैठक ट्रस्ट के भविष्य, प्रशासनिक ढांचे और संभावित पुनर्गठन की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण बैठक मानी जा रही है.