राजस्थान राज्यसभा चुनाव में दो सीटों पर निर्विरोध जीते BJP उम्मीदवार, एक सीट पर कांग्रेस विजयी

Rajya Sabha Election 2026: राजस्थान में राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनावी मुकाबले की नौबत ही नहीं आई और सभी उम्मीदवार निर्विरोध संसद के उच्च सदन के लिए चुन लिए गए.

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Rajya Sabha Election 2026: राजस्थान में राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनावी मुकाबले की नौबत ही नहीं आई और सभी उम्मीदवार निर्विरोध संसद के उच्च सदन के लिए चुन लिए गए. हालांकि यह प्रक्रिया भले ही औपचारिक रही हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने काफी गहरे माने जा रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधते हुए उम्मीदवारों का चयन किया है. खासकर भाजपा के फैसले को आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि कांग्रेस ने अनुभव और सामाजिक संतुलन पर भरोसा जताया है.

बिना मतदान के पूरी हुई चुनाव प्रक्रिया

राजस्थान की तीन रिक्त राज्यसभा सीटों के लिए केवल तीन उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था. नाम वापसी की निर्धारित अवधि समाप्त होने तक किसी भी प्रत्याशी ने अपना नामांकन वापस नहीं लिया. इसके बाद निर्वाचन प्रक्रिया पूरी करते हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त नवीन जैन ने भाजपा के डॉ. सतीश पूनिया और डॉ. अलका सिंह गुर्जर तथा कांग्रेस के नीरज डांगी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया. चूंकि सीटों की संख्या और उम्मीदवारों की संख्या समान थी, इसलिए मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी और चुनाव परिणाम औपचारिक रूप से घोषित कर दिए गए.

राज्यसभा के बहाने विधानसभा की तैयारी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने उम्मीदवार चयन के जरिए केवल राज्यसभा सीटें भरने का काम नहीं किया, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों के लिए सामाजिक संदेश भी देने की कोशिश की है. डॉ. सतीश पूनिया जाट समुदाय से आते हैं, जबकि डॉ. अलका सिंह गुर्जर गुर्जर समाज का प्रतिनिधित्व करती हैं.

पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान की राजनीति में जाट और गुर्जर समुदायों की नाराजगी तथा उनकी राजनीतिक अपेक्षाओं को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं. किसान आंदोलन, आरक्षण से जुड़े मुद्दे और क्षेत्रीय नेतृत्व की भूमिका जैसे विषयों ने इन समुदायों को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है. ऐसे में भाजपा ने दोनों प्रभावशाली वर्गों को प्रतिनिधित्व देकर यह संकेत दिया है कि पार्टी सामाजिक संतुलन और जातीय समीकरणों को लेकर गंभीर है.

कांग्रेस ने अनुभव पर लगाया दांव

दूसरी ओर कांग्रेस ने नीरज डांगी को लगातार दूसरी बार राज्यसभा भेजने का फैसला किया है. पार्टी के इस निर्णय को संगठनात्मक स्थिरता और पारंपरिक सामाजिक आधार को मजबूत बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. नीरज डांगी लंबे समय से कांग्रेस संगठन और प्रदेश राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. ऐसे में पार्टी ने नए चेहरे की बजाय अनुभवी नेतृत्व पर भरोसा जताना अधिक उचित समझा.

नामांकन के दौरान दिखी राजनीतिक एकजुटता

राज्यसभा उम्मीदवारों के नामांकन के अवसर पर भाजपा ने शक्ति प्रदर्शन का भी संदेश दिया. प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित अभिनंदन समारोह में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत समेत कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे. इसके बाद मुख्यमंत्री स्वयं दोनों उम्मीदवारों को विधानसभा लेकर पहुंचे, जहां उन्होंने नामांकन पत्र दाखिल किए. इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की मौजूदगी भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी गई. पार्टी ने इस आयोजन के जरिए संगठनात्मक एकता और चुनावी तैयारी का संदेश देने की कोशिश की.

करोड़ों की संपत्ति वाले हैं तीनों सांसद

राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल किए गए हलफनामों से तीनों नेताओं की आर्थिक स्थिति की भी जानकारी सामने आई है. आंकड़ों के अनुसार तीनों निर्वाचित सांसदों और उनके परिवारों की कुल घोषित संपत्ति 23 करोड़ रुपये से अधिक है.

संपत्ति के मामले में कांग्रेस के नीरज डांगी सबसे आगे हैं. उनके और उनकी पत्नी के नाम कुल 9.23 करोड़ रुपये की चल एवं अचल संपत्तियां दर्ज हैं. इसमें कृषि भूमि, बैंक जमा, निवेश और अन्य संपत्तियां शामिल हैं. हलफनामे के अनुसार नीरज डांगी के नाम लगभग 2.09 करोड़ रुपये और उनकी पत्नी के नाम करीब 7.15 करोड़ रुपये की संपत्ति है.

अलका गुर्जर की संपत्ति और देनदारियां

भाजपा की नव निर्वाचित राज्यसभा सांसद डॉ. अलका सिंह गुर्जर और उनके पति के पास कुल 7.76 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की गई है. उनके पास कृषि भूमि, जयपुर में भूखंड और सोना-हीरे के आभूषण मौजूद हैं. हालांकि संपत्ति के साथ-साथ उनके ऊपर लगभग 47 लाख रुपये का ऋण भी दर्ज है, जिसका उल्लेख हलफनामे में किया गया है.

सतीश पूनिया के पास भी करोड़ों की संपत्ति

भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. सतीश पूनिया और उनकी पत्नी के नाम कुल 6.45 करोड़ रुपये की संपत्ति दर्ज की गई है. उनके पास कृषि भूमि, आवासीय संपत्तियां और विभिन्न प्लॉट मौजूद हैं. हलफनामे के अनुसार उन पर करीब 1.14 करोड़ रुपये का कर्ज भी है. इस तरह संपत्ति के साथ-साथ उनकी वित्तीय देनदारियों का विवरण भी सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा बन गया है.

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