Rajya Sabha Election 2026: गुजरात की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपनी मजबूत संगठनात्मक पकड़ का प्रदर्शन किया है. राज्यसभा की चार सीटों पर भाजपा के सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए हैं. विपक्ष की ओर से कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरने के कारण अब 18 जून को प्रस्तावित राज्यसभा चुनाव की आवश्यकता नहीं रह गई है. निर्वाचन आयोग ने औपचारिक घोषणा करते हुए भाजपा के चारों प्रत्याशियों को विजयी घोषित कर दिया. इस घटनाक्रम को राज्य की राजनीति में भाजपा के बढ़ते प्रभाव और विपक्ष की कमजोर स्थिति के रूप में देखा जा रहा है.
विधानसभा में भाजपा की मजबूत स्थिति बनी वजह
गुजरात विधानसभा में भाजपा के पास वर्तमान में 161 विधायकों का विशाल बहुमत है. इसके मुकाबले कांग्रेस के केवल 12 विधायक हैं, जबकि आम आदमी पार्टी की पांच सीटें हैं. संख्या बल के लिहाज से विपक्ष के लिए राज्यसभा चुनाव में मुकाबला करना बेहद कठिन था. यही कारण रहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा. परिणामस्वरूप भाजपा के सभी प्रत्याशी बिना मतदान के ही राज्यसभा पहुंच गए और चुनाव प्रक्रिया औपचारिकता भर बनकर रह गई.
कौन हैं निर्विरोध चुने गए भाजपा उम्मीदवार?
राज्यसभा पहुंचने वाले चार नेताओं में मुकेश राठवा, जितेंद्र कंजारिया, मानसिंह परमार और राजू शुक्ला शामिल हैं. मुकेश राठवा छोटा उदयपुर जिले के जनजातीय क्षेत्र क्वांट से आते हैं और लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. वह भाजपा के महासचिव के साथ-साथ युवा मोर्चा के राज्य उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. वहीं देवभूमि द्वारका के नेता जितेंद्र कंजारिया पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता के रूप में पहचान रखते हैं. उनका परिवार लंबे समय से भाजपा से जुड़ा रहा है और उनके पिता मेघजीभाई कंजारिया भी क्षेत्र के प्रमुख नेता थे.
सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति
भाजपा ने उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक प्रतिनिधित्व का भी विशेष ध्यान रखा है. मानसिंह परमार राजपूत समाज से आते हैं और वर्तमान में गुजरात भाजपा के बख्शी पंच मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं. दूसरी ओर राजू शुक्ला ब्राह्मण समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं और कड़ी-कलोल क्षेत्र से जुड़े हुए हैं. संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका और विभिन्न जिलों में पार्टी के लिए किए गए कार्यों को देखते हुए उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला किया गया. राजनीतिक जानकार इसे भाजपा की सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने वाली रणनीति के रूप में देख रहे हैं.
राज्यसभा में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व होगा समाप्त
इस चुनाव का एक बड़ा राजनीतिक असर कांग्रेस पर भी पड़ने वाला है. गुजरात कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा में पार्टी के एकमात्र सांसद शक्तिसिंह गोहिल का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है. उनके कार्यकाल खत्म होने के बाद राज्यसभा में गुजरात से कांग्रेस का कोई प्रतिनिधि नहीं रहेगा. ऐसे में उच्च सदन में गुजरात से भाजपा का दबदबा और अधिक मजबूत हो जाएगा, जबकि कांग्रेस के लिए यह स्थिति संगठन और राजनीतिक प्रभाव दोनों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है.
ये भी पढ़ें: मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में भाजपा का क्लीन स्वीप, निर्विरोध जीते तीनों उम्मीदवार