CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है. ग्लासगो में खेले जा रहे इन खेलों के चौथे दिन भारत ने तीन पदक अपने नाम किए, जिनमें सबसे बड़ी उपलब्धि मीराबाई चानू का ऐतिहासिक गोल्ड मेडल रहा. हालांकि इसी दिन एक और भारतीय खिलाड़ी ने अपने जज्बे और संघर्ष से पूरे देश का दिल जीत लिया. तमिलनाडु के युवा वेटलिफ्टर राजा मुतुपंडि ने पुरुषों के 65 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर यह साबित कर दिया कि कठिन दौर और लगातार आई परेशानियां भी मजबूत इरादों के सामने ज्यादा देर तक टिक नहीं सकतीं.
करीब आठ साल बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में वापसी करने वाले राजा ने कुल 286 किलोग्राम वजन उठाकर भारत की झोली में एक और रजत पदक डाला. यह उपलब्धि सिर्फ एक मेडल नहीं बल्कि वर्षों के संघर्ष, चोट, बीमारी और लगातार की गई मेहनत का परिणाम है.
भारत के लिए शानदार रहा चौथा दिन
रविवार, 26 जुलाई को भारतीय वेटलिफ्टरों ने ग्लासगो में शानदार प्रदर्शन किया. दिन की शुरुआत ऋषिकांता सिंह के सिल्वर मेडल से हुई, जिन्होंने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में भारत को सफलता दिलाई. इसके बाद ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू ने गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया और भारत को इस संस्करण का पहला स्वर्ण पदक दिलाया. दिन के अंतिम वेटलिफ्टिंग मुकाबले में सभी की नजरें राजा मुतुपंडि पर थीं. उन्होंने भी उम्मीदों पर खरा उतरते हुए शानदार प्रदर्शन किया और भारत के लिए दूसरा सिल्वर मेडल जीत लिया.
शुरुआत रही कठिन, लेकिन अंत हुआ शानदार
पुरुषों के 65 किलोग्राम भार वर्ग में मुकाबला बेहद चुनौतीपूर्ण था. स्नैच राउंड में राजा अपने पहले प्रयास में असफल रहे, जिससे उन पर दबाव बढ़ गया. हालांकि उन्होंने शानदार वापसी करते हुए दूसरे प्रयास में 126 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया और खुद को पदक की दौड़ में बनाए रखा. क्लीन एंड जर्क राउंड में भी पहली कोशिश 158 किलोग्राम पर असफल रही. इसके बाद उन्होंने जोखिम उठाते हुए सीधे 160 किलोग्राम वजन चुना. इस चुनौतीपूर्ण प्रयास को उन्होंने सफलतापूर्वक पूरा कर सभी को प्रभावित किया. अंतिम प्रयास में 170 किलोग्राम उठाने की कोशिश सफल नहीं हो सकी, लेकिन कुल 286 किलोग्राम वजन के साथ उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया.
मलेशिया के चैंपियन से मिली कड़ी चुनौती
इस स्पर्धा में राजा के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलेशिया के अनुभवी वेटलिफ्टर अजनिल मुहम्मद थे. अजनिल पहले ही इस वर्ग में लगातार दो कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीत चुके थे और इस बार भी उन्होंने अपना दबदबा कायम रखा. मलेशियाई खिलाड़ी ने कुल 299 किलोग्राम वजन उठाकर नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाया और लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे. वहीं पापुआ न्यू गिनी के खिलाड़ी ने कांस्य पदक अपने नाम किया.
आठ साल पहले छठे स्थान पर रहे थे राजा
राजा मुतुपंडि के लिए यह पदक इसलिए भी खास है क्योंकि यह उनके लंबे इंतजार का अंत है. उन्होंने पहली बार 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया था. उस समय वह केवल 18 वर्ष के थे और प्रतियोगिता में छठे स्थान पर रहे थे. उस प्रदर्शन के बाद उन्होंने खुद को बेहतर बनाने का संकल्प लिया, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया. एक के बाद एक आई मुश्किलों ने उनके करियर की रफ्तार को रोक दिया.
चोट, महामारी और बीमारी से नहीं टूटा हौसला
साल 2019 में राजा की कोहनी में गंभीर चोट लग गई, जिसके कारण उन्हें सर्जरी करानी पड़ी. वह धीरे-धीरे वापसी की तैयारी कर ही रहे थे कि कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया. लॉकडाउन और प्रतिबंधों के कारण उनकी रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया भी प्रभावित हुई. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और 2021 में फिर से ट्रेनिंग शुरू की. जब वह 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी कर रहे थे, तभी उन्हें पीलिया हो गया. बीमारी से उबरने के कुछ समय बाद अपेंडिसाइटिस की वजह से एक और सर्जरी करानी पड़ी. इन परिस्थितियों ने उन्हें लगभग दस महीने तक प्रतियोगिताओं से दूर रखा, लेकिन उन्होंने हर चुनौती का डटकर सामना किया.
नेशनल रिकॉर्ड से कॉमनवेल्थ सिल्वर तक का सफर
लंबे संघर्ष के बाद राजा ने शानदार वापसी की. उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया और इसी वर्ष राष्ट्रीय चैंपियनशिप में कुल 302 किलोग्राम वजन उठाकर नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया. इसी प्रदर्शन ने उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स की भारतीय टीम में जगह दिलाई. अब ग्लासगो में सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर किसी भी मुश्किल को हराया जा सकता है. राजा मुतुपंडि की यह सफलता भारतीय वेटलिफ्टिंग के लिए नई उम्मीद लेकर आई है और आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में उनसे बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद और मजबूत हो गई है.
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