Putrada Ekadashi: आज मंगलवार, 30 दिसंबर को पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है, जिसे पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है. यह वर्ष की अंतिम एकादशी भी है, इसलिए इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है. शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत विशेष रूप से संतान सुख की कामना और पारिवारिक बाधाओं के निवारण के लिए किया जाता है. मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख, शांति व समृद्धि का वास होता है.
पुत्रदा एकादशी का व्रत करने वाले अधिकांश श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखते हैं. जो लोग पूर्ण निराहार रहना कठिन समझते हैं, वे एक समय फल, दूध या फलाहार ग्रहण कर सकते हैं. इस दिन सात्विक आचरण, संयम और भक्ति भाव को विशेष महत्व दिया जाता है. चूंकि इस वर्ष एकादशी मंगलवार के दिन पड़ रही है, इसलिए भगवान विष्णु के साथ मंगल ग्रह से संबंधित पूजा भी अत्यंत शुभ मानी गई है.
पौराणिक मान्यता और शास्त्रीय उल्लेख
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, पुत्रदा एकादशी का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है. कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं इस व्रत की महिमा धर्मराज युधिष्ठिर को बताई थी. श्रीकृष्ण ने कहा था कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे दीर्घायु, गुणवान तथा संस्कारयुक्त संतान की प्राप्ति होती है. यही कारण है कि संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपती इस व्रत को विशेष श्रद्धा से करते हैं.
पुत्रदा एकादशी पर किए जाने वाले शुभ कर्म
इस पावन तिथि पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है. पूजा के दौरान दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित दूध भरकर भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का अभिषेक करें. इसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराएं. पूजा में गंगाजल, पुष्प, फल, धूप-दीप और प्रसाद अर्पित करें. तुलसी दल के साथ मिठाई का भोग लगाएं और विधिपूर्वक आरती करें. इस दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जप करने की परंपरा है. विष्णु भगवान की कथाएं पढ़ना या सुनना भी शुभ माना जाता है. व्रत का पारण द्वादशी तिथि को किसी जरूरतमंद को भोजन और दक्षिणा देने के बाद ही करना चाहिए.
मंगलवार के योग में हनुमान पूजा का विशेष फल
चूंकि इस बार एकादशी मंगलवार को पड़ रही है, इसलिए हनुमान जी की उपासना भी विशेष फल देने वाली मानी गई है. हनुमान जी के समक्ष दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें. भगवान श्रीराम की पूजा करते हुए “ॐ रामदूताय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ फल प्रदान करता है.
मंगल दोष शांति के लिए उपाय
ज्योतिष शास्त्र में मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से माना गया है. जिन जातकों की कुंडली में मंगल दोष या अंगारक योग होता है, उनके लिए यह दिन विशेष उपाय करने का है. ऐसे लोग शिवलिंग पर लाल गुलाल और लाल मसूर की दाल अर्पित करें. शास्त्रों के अनुसार मंगल ग्रह की पूजा शिव रूप में ही की जाती है, इसलिए मंगल दोष की शांति के लिए शिव आराधना अत्यंत प्रभावी मानी जाती है.
पुत्रदा एकादशी की प्रसिद्ध कथा
शास्त्रों में वर्णित कथा के अनुसार, प्राचीन काल में भद्रावती नगरी में राजा सुकेतुमान राज्य करते थे. उनकी पत्नी रानी चंपा थीं, लेकिन उन्हें संतान सुख प्राप्त नहीं था. इस कारण राजा और रानी अत्यंत दुखी रहते थे. एक दिन दुखी मन से राजा वन की ओर चले गए. वन में भ्रमण के दौरान उन्हें प्यास लगी और वे एक सरोवर के पास पहुंचे, जहां कई ऋषि-मुनि तपस्या में लीन थे. राजा ने विनम्रतापूर्वक अपनी पीड़ा उनके सामने रखी. तब मुनियों ने उन्हें पौष मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी. मुनियों के निर्देशानुसार राजा सुकेतुमान और रानी चंपा ने श्रद्धा से यह व्रत किया. कुछ समय बाद उन्हें एक तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई. तभी से यह व्रत संतान सुख प्रदान करने वाला माना जाता है.
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं, शास्त्रीय कथाओं और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना है. किसी भी उपाय को अपनाने से पहले अपनी व्यक्तिगत आस्था और विवेक का प्रयोग अवश्य करें.
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