Nobel Peace Award Controversy: 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा के बाद वैश्विक राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र एक बार फिर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बन गए हैं. पुरस्कार इस वर्ष वेनेजुएला की विपक्षी नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता मारिया कोरिना मचाडो को मिला है. लेकिन ट्रंप को इस पुरस्कार से वंचित रखे जाने को लेकर न केवल अमेरिका में बल्कि रूस और इज़रायल जैसे देशों के शीर्ष नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है.
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस पर खुले तौर पर निराशा जताई है. दोनों नेताओं ने ट्रंप की हालिया गाज़ा संघर्ष के समाधान की कोशिशों और मध्य-पूर्व में शांति स्थापित करने के प्रयासों को सराहा, लेकिन इस बात पर हैरानी जताई कि उन्हें शांति का सर्वोच्च पुरस्कार नहीं दिया गया.
The Nobel Committee talks about peace. President @realDonaldTrump makes it happen.
— Prime Minister of Israel (@IsraeliPM) October 10, 2025
The facts speak for themselves. President #Trump deserves it.#PeaceThroughStrength https://t.co/hnvyfy2TaN
"शांति की दिशा में ट्रंप का प्रयास उल्लेखनीय"
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार न दिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय शांति की दिशा में कई महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं." उन्होंने विशेष रूप से गाज़ा संघर्ष में ट्रंप की मध्यस्थता और सीजफायर समझौते की सराहना की. हालांकि पुतिन ने यह भी जोड़ा कि "यह तय करना नोबेल समिति का अधिकार है कि पुरस्कार किसे देना है." उन्होंने आगे कहा, “यदि गाज़ा संघर्ष में ट्रंप की पहल स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ती है, तो यह इतिहास में दर्ज किया जाएगा.”
"ट्रंप ने शांति को वास्तविकता में बदला"
इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा, “नोबेल समिति सिर्फ शांति की बात करती है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप उसे वास्तविकता में बदलते हैं.” उन्होंने दावा किया कि ट्रंप ने जो कुछ मध्य-पूर्व में हासिल किया, वह “बातों से नहीं, बल्कि साहसिक फैसलों और नेतृत्व क्षमता” से संभव हुआ.
नेतन्याहू ने यह भी लिखा, “अगर आज इज़रायल और हमास के बीच संघर्ष समाप्त हुआ है, तो वह ट्रंप की पहल का नतीजा है. वह इस पुरस्कार के वास्तविक हकदार हैं.”
नोबेल समिति ने राजनीति को दी प्राथमिकता
अमेरिकी सरकार की ओर से भी इस मसले पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्टीवन चेउंग ने कहा कि "नोबेल शांति पुरस्कार समिति ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उनके लिए शांति से ज़्यादा राजनीति मायने रखती है."
चेउंग ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, “राष्ट्रपति ट्रंप दुनिया में युद्धों को खत्म करने और इंसानी जानों को बचाने में लगे हैं. उनका उद्देश्य मानवता की सेवा करना है, न कि किसी पुरस्कार को हासिल करना.”
ट्रंप की पहल से गाज़ा में युद्धविराम
गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रस्तावित 20-सूत्रीय ‘गाज़ा पीस प्लान’ के तहत इज़रायल और हमास के बीच संघर्ष विराम कराने में अहम भूमिका निभाई है. इज़रायली डिफेंस फोर्स (IDF) और हमास दोनों ने पहले चरण की शांति प्रक्रिया की शर्तों को स्वीकार कर लिया है, जिसके तहत गाज़ा पट्टी में पिछले दो साल से जारी हिंसा और सैन्य कार्रवाई को रोक दिया गया है.
यह संघर्ष अक्टूबर 2023 में उस समय शुरू हुआ था जब हमास ने दक्षिणी इज़रायल पर बड़ा हमला किया था. इस हमले में करीब 1,200 लोगों की मौत हुई थी और 250 से अधिक लोग बंधक बनाए गए थे. इसके बाद इज़रायल ने जवाबी कार्रवाई में व्यापक सैन्य अभियान चलाया था, जिसमें हजारों लोगों की जान गई. ट्रंप की पहल पर हुए सीजफायर समझौते के तहत दोनों पक्षों में कैदियों की अदला-बदली, मानवीय राहत सामग्री की आपूर्ति और सीमित क्षेत्रीय निगरानी जैसे प्रावधान शामिल हैं.
मचाडो को पुरस्कार मिलने पर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
नोबेल शांति पुरस्कार 2025 के लिए मारिया कोरिना मचाडो के चयन की सराहना भी कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने की है. वेनेजुएला में तानाशाही शासन के खिलाफ लोकतंत्र की बहाली और मानवाधिकारों के लिए लंबे संघर्ष को नोबेल समिति ने पुरस्कृत किया है.
हालांकि ट्रंप समर्थक हलकों में इसे “राजनीतिक चयन” करार दिया जा रहा है. आलोचकों का कहना है कि "जब ट्रंप ने सक्रिय शांति समझौते कराए हैं, तो उन्हें नजरअंदाज करना उचित नहीं लगता."
क्या ट्रंप को भविष्य में मिलेगा नोबेल?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के शांति प्रयासों को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार के लिए राजनीतिक धारणा, वैश्विक स्वीकार्यता और दीर्घकालिक असर जैसे कई कारकों पर विचार किया जाता है. गाज़ा सीजफायर योजना को कितनी स्थिरता मिलती है, और क्या यह स्थायी शांति में बदलता है, यही भविष्य में ट्रंप की दावेदारी को तय करेगा.
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