पुतिन ने चली ऐसी चाल, जिससे ट्रंप के उड़ जाएंगे होश! 'गाजा पीस बोर्ड' को लेकर रखी ये शर्त

Putin Trump Diplomacy: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा हाल ही में स्थापित किया गया ‘गाजा पीस बोर्ड’ अब कूटनीतिक पैंतरेबाज़ी का केंद्र बन गया है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस बोर्ड में शामिल होने की अपनी सहमति तो दे दी है, लेकिन इसके लिए उन्होंने एक ऐसी शर्त रख दी है जिसने वॉशिंगटन में हलचल मचा दी है.

Putin made such a move that will blow Trump senses Gaza Peace Board America frozen Russian assets
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Putin Trump Diplomacy: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा हाल ही में स्थापित किया गया ‘गाजा पीस बोर्ड’ अब कूटनीतिक पैंतरेबाज़ी का केंद्र बन गया है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस बोर्ड में शामिल होने की अपनी सहमति तो दे दी है, लेकिन इसके लिए उन्होंने एक ऐसी शर्त रख दी है जिसने वॉशिंगटन में हलचल मचा दी है.

पुतिन ने स्पष्ट किया है कि रूस केवल तभी इस शांति प्रयास का हिस्सा बनेगा जब बोर्ड के स्थायी सदस्य बनने के लिए तय 1 अरब डॉलर का योगदान अमेरिका में फ्रीज की गई रूसी संपत्तियों से भरा जाएगा. इस शर्त को पूरा करना ट्रंप प्रशासन के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि यह कदम न केवल राजनीतिक रूप से संवेदनशील है बल्कि कानूनी दृष्टि से भी जटिल है.

गाजा पीस बोर्ड और रूस की भूमिका

ट्रंप ने दुनिया के 60 देशों के नेताओं को इस बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण दिया था. इसके तहत बोर्ड के स्थायी सदस्य बनने के लिए प्रत्येक देश को 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा. रूस की शर्त यह दर्शाती है कि वह शांति प्रक्रिया में भाग लेना चाहता है, लेकिन केवल तब जब उसका आर्थिक हित सुनिश्चित हो.

रूसी मीडिया TASS की रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन ने कहा कि रूस फिलिस्तीनी लोगों के साथ ऐतिहासिक और मजबूत संबंध रखता है, और इसलिए वह शांति प्रयास में योगदान देने को तैयार है. लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह राशि अमेरिका में फ्रीज की गई रूस की संपत्ति से ली जाए.

अमेरिका के फ्रीज किए गए रूसी एसेट्स

पुतिन का यह प्रस्ताव यूक्रेन युद्ध के बाद जमे हुए राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव से जुड़ा है. बाइडेन प्रशासन और यूरोपीय सहयोगियों ने रूसी केंद्रीय बैंक और अमीर नागरिकों की अरबों डॉलर की संपत्ति फ्रीज कर रखी है. पुतिन का तर्क सरल है कि अगर अमेरिका चाहता है कि रूस शांति प्रयास में योगदान करे, तो उसे पहले उन संपत्तियों को अनफ्रीज करना होगा.

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने इस विषय पर कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस योगदान को कानूनी रूप से कैसे औपचारिक बनाया जाएगा. इसके लिए अमेरिका को फ्रीज की गई संपत्तियों को रिलीज करने का निर्णय लेना होगा, जो कि एक जटिल प्रक्रिया है और इसमें कई कानूनी और राजनीतिक बाधाएं हैं.

ट्रंप के दूत मॉस्को पहुंचे

इस शर्त पर चर्चा के लिए ट्रंप के विशेष दूत मॉस्को में पुतिन से मुलाकात कर रहे हैं. पुतिन ने फिलिस्तीनी नेता महमूद अब्बास के साथ क्रेमलिन में बैठक के दौरान भी इस मुद्दे पर बातचीत की. ट्रंप के प्रतिनिधियों में उनके दामाद और पूर्व सलाहकार जेरेड कुशनर और करीबी सहयोगी स्टीव विटकॉफ शामिल हैं.

जेरेड कुशनर मध्य पूर्व की राजनीति में गहरी समझ रखते हैं, जबकि विटकॉफ ट्रंप के प्रमुख सलाहकारों में गिने जाते हैं. उनके मॉस्को पहुंचने से यह संकेत मिलता है कि ट्रंप और पुतिन के बीच बैक-चैनल कूटनीति जोर पकड़ रही है.

अमेरिकी प्रशासन के लिए चुनौती

अमेरिका में फ्रीज की गई रूसी संपत्तियों को अनफ्रीज करना आसान नहीं है. इसके लिए कांग्रेस की मंजूरी या विशेष कार्यकारी आदेश की आवश्यकता पड़ सकती है. यदि ट्रंप इस कदम को उठाते हैं, तो उन्हें अमेरिकी मीडिया और डेमोक्रेटिक पार्टी से आलोचना का सामना करना पड़ सकता है.

आलोचक इसे रूस के प्रति नरमी और यूक्रेन युद्ध में रूस की जीत के रूप में देख सकते हैं. इसके अलावा, रूस की अधिकतर संपत्ति यूरोप में फ्रीज है. अगर अमेरिका अपनी तरफ से ढील देता है, तो यूरोपीय देशों पर भी दबाव बनेगा, जिससे NATO में एकता पर असर पड़ सकता है.

कूटनीतिक शतरंज की चाल

पुतिन का यह कदम केवल शांति प्रक्रिया में शामिल होने की शर्त नहीं, बल्कि कूटनीतिक शतरंज की बड़ी चाल भी माना जा रहा है. उन्होंने ट्रंप के हाथ में यह चुनौती रखी है कि यदि वह रूस को बोर्ड का हिस्सा बनाना चाहते हैं, तो पहले अमेरिकी फ्रीज की गई संपत्तियों को अनलॉक करें. इस तरह, गाजा पीस बोर्ड अब सिर्फ शांति की पहल नहीं रह गई है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, राजनीति और कानूनी जटिलताओं का एक केंद्र बन गई है.

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