Putin India Visit: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर को भारत आने वाले हैं और उनके इस बहुप्रतीक्षित दौरे ने दिल्ली को अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था के बीच ला खड़ा किया है. 23वें भारत–रूस वार्षिक सम्मेलन से पहले राष्ट्रीय राजधानी को हाई-सेक्योरिटी ज़ोन में बदल दिया गया है. पुतिन कहां ठहरेंगे, यह जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी गई है, लेकिन शहर में सुरक्षा का स्तर देखकर यह साफ हो गया है कि अगले दो दिन तक दिल्ली दुनिया की सबसे सुरक्षित जगहों में शामिल रहेगी.
दिल्ली पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियाँ और रूस की विशेष सुरक्षा टीम मिलकर ऐसा सुरक्षा जाल बिछा रही हैं जिसकी तुलना दुनिया के कुछ ही देशों से की जा सकती है. रूस के 50 से अधिक सुरक्षा विशेषज्ञ पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं और हर व्यवस्था की जमीनी जांच कर रहे हैं.
रूस की FSO और SBP—पुतिन की सुरक्षा का अदृश्य कवच
पुतिन की सुरक्षा का सबसे बड़ा दायित्व रूस की Federal Protective Service (FSO) निभाती है. यह एजेंसी 50,000 से अधिक कर्मियों, स्नाइपर्स, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर यूनिट और विशेष साइबर सुरक्षा टीम से बनी है. इसके भीतर SBP नामक एक एलीट यूनिट होती है जो राष्ट्रपति के लिए सबसे निकटतम सुरक्षा का कार्य संभालती है. SBP के Zaslon कमांडोज़ अपनी फुर्ती और प्रतिक्रिया क्षमता के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं, जो आधे सेकंड से भी कम समय में खतरे पर जवाब देने में सक्षम होते हैं.
पुतिन के चारों ओर तीन-परत सुरक्षा, हर कदम पर सतर्कता
पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था को तीन घेरों में बाँटा गया है. सबसे पहला घेरा उन 6–8 बॉडीगार्ड्स का होता है, जो पुतिन से कुछ कदम की दूरी पर रहते हैं. दूसरा घेरा लगभग 25–40 कमांडोज़ का है, जो अत्याधुनिक हथियारों, नाइट-विजन और थर्मल स्कैनर से सुसज्जित रहता है. बाहरी तीसरा घेरा और भी बड़ा होता है, जिसमें स्नाइपर टीम, ड्रोन-न्यूट्रलाइजेशन यूनिट, K-9 स्क्वाड और रियल-टाइम सर्विलांस टीमें शामिल रहती हैं. इस तीन-स्तरीय कवच को किसी भी परिस्थिति में तोड़ना लगभग असंभव माना जाता है.
Aurus Senat Limo—पुतिन का चलता-फिरता बंकर
पुतिन की विशेष कार Aurus Senat Limo को दुनिया की सबसे सुरक्षित राष्ट्रपति कारों में गिना जाता है. यह 6-टन की बुलेट व बम-प्रूफ लिमोज़िन गैस एवं केमिकल हमलों से भी सुरक्षा प्रदान करती है. कार के भीतर ऑक्सीजन बैकअप, फायर सेफ्टी सिस्टम और मेडिकल सपोर्ट तक मौजूद रहता है. उनके मोटरकेड में जैमर वाहन, कमांड कंट्रोल कार, एम्बुलेंस, काउंटर-असॉल्ट टीमें और अतिरिक्त सुरक्षा गाड़ियाँ शामिल रहती हैं. काफिले के दौरान आसपास का मोबाइल नेटवर्क, ड्रोन सिग्नल और रेडियो फ्रीक्वेंसी तक जाम कर दी जाती है ताकि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि को तुरंत रोका जा सके.
विदेश यात्रा के दौरान पुतिन के लिए लागू होता है खास सुरक्षा प्रोटोकॉल
जब पुतिन विदेश में जाते हैं, तो FSO पहले ही होटल, मीटिंग वेन्यू और उससे जुड़े सभी महत्वपूर्ण ज़ोन को अपने नियंत्रण में ले लेती है. जिस फ़्लोर पर पुतिन रहते हैं, वहां किसी बाहरी की एंट्री बिल्कुल संभव नहीं होती. उनके कमरे से लेकर किचन तक हर चीज़ की कई स्तर पर जांच होती है. पुतिन अपने साथ आने वाली टीम द्वारा तैयार भोजन ही ग्रहण करते हैं. स्नाइपर्स को आसपास की ऊँची इमारतों और छतों पर तैनात किया जाता है, जबकि मेडिकल टीम और तीन अस्पताल इमरजेंसी मोड पर रहते हैं.
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