रूस में डील पर मतदान, भारत पर फैसला...पुतिन के दौरे से पहले क्या मिलेगी गुड न्यूज?

वैश्विक राजनीति के बदलते समीकरणों के बीच भारत और रूस एक बार फिर अपने रणनीतिक रिश्तों को नई दिशा देने की तैयारी में हैं. मास्को में आज का दिन दोनों देशों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि रूस की संसद का निचला सदन स्टेट डूमा भारत के साथ होने वाले प्रमुख रक्षा समझौते RELOS (Reciprocal Exchange of Logistics Agreement) की मंजूरी पर मतदान करेगा.

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वैश्विक राजनीति के बदलते समीकरणों के बीच भारत और रूस एक बार फिर अपने रणनीतिक रिश्तों को नई दिशा देने की तैयारी में हैं. मास्को में आज का दिन दोनों देशों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि रूस की संसद का निचला सदन—स्टेट डूमा—भारत के साथ होने वाले प्रमुख रक्षा समझौते RELOS (Reciprocal Exchange of Logistics Agreement) की मंजूरी पर मतदान करेगा. यह मतदान न केवल प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा गया है, बल्कि इसे आगामी उच्चस्तरीय कूटनीतिक गतिविधियों की नींव भी माना जा रहा है.

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 48 घंटे की भारत यात्रा पर गुरुवार को नई दिल्ली पहुँच रहे हैं, जहाँ वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वार्षिक शिखर बैठक करेंगे. इस यात्रा से पहले RELOS का अनुमोदन दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को नई ऊंचाई देने वाला कदम साबित हो सकता है.

क्या है RELOS और क्यों है यह इतना महत्वपूर्ण?

RELOS समझौता भारतीय और रूसी सेनाओं को संयुक्त सैन्य अभ्यास, राहत अभियानों और ऑपरेशनल गतिविधियों के दौरान एक-दूसरे के सैन्य बेस, एयरफील्ड और लॉजिस्टिक सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति देता है. इससे सैनिकों, उपकरणों और संसाधनों की तैनाती में लागत कम होगी और आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया समय काफी तेज हो जाएगा. इसे भारत–अमेरिका LEMOA, भारत–फ्रांस की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था और अन्य प्रमुख सैन्य साझेदारियों के समान श्रेणी में रखा जा रहा है.

फरवरी 2025 में हुए हस्ताक्षर, रणनीतिक भरोसे का प्रतीक

इस समझौते को औपचारिक रूप से 18 फरवरी 2025 को मॉस्को में अंतिम रूप दिया गया था.भारत की ओर से उस समय रूस में भारतीय राजदूत विनय कुमार, जबकि रूस की ओर से तत्कालीन उप-रक्षा मंत्री अलेक्ज़ेंडर फोमिन मौजूद थे. दोनों देशों ने इसे अपनी “Privileged Strategic Partnership” को और मजबूती देने वाला बड़ा कदम बताया था. अब, स्टेट डूमा की मंजूरी के साथ यह समझौता लागू होने की अंतिम कड़ी पूरी हो जाएगी.

पुतिन की भारत यात्रा का एजेंडा—व्यापार से सुरक्षा तक बड़े फैसलों की उम्मीद

पुतिन की आने वाली यात्रा में ऊर्जा सहयोग, व्यापार विस्तार, रक्षा उत्पादन, अंतरिक्ष तकनीक और बहुपक्षीय मंचों पर रणनीतिक तालमेल जैसे क्षेत्रों में गहन चर्चा होने की संभावना है. विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनावपूर्ण हालात में भारत–रूस रिश्ता पहले से अधिक प्रासंगिक हो गया है. RELOS की पुष्टि इस साझेदारी को और ठोस बुनियाद देगी.

वैश्विक परिदृश्य में भारत–रूस साझेदारी की नई भूमिका

जहाँ दुनिया की महाशक्तियों के बीच तनाव गहराता जा रहा है, वहीं भारत और रूस अपनी दशकों पुरानी रणनीतिक निकटता को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी में हैं. लॉजिस्टिक सहयोग पर आधारित यह समझौता न केवल सैनिकों के लिए सुविधाजनक होगा, बल्कि इंडो-पैसिफिक और यूरेशियन सुरक्षा ढांचे में दोनों देशों की भूमिका को भी मजबूत करेगा.

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