हाल ही में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन और उसके बाद चीन में हुई विक्ट्री डे परेड वैश्विक स्तर पर खासा ध्यान खींच रही है. इस कार्यक्रम में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन की मुलाकात के दौरान हुई एक अनौपचारिक बातचीत सुर्खियों में है. बताया जा रहा है कि इस बातचीत में इन तीनों नेताओं ने इंसानी उम्र को बढ़ाने और भविष्य में "अमरता" जैसी संभावनाओं पर चर्चा की.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक वीडियो में देखा गया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग कहते हैं, "70 की उम्र आज के दौर में कोई बड़ी बात नहीं रह गई है. असली खेल तो अब शुरू होता है." वहीं, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के अनुवादक ने इस बातचीत को आगे बढ़ाते हुए कहा कि "बायोटेक्नोलॉजी की मदद से अब इंसानी अंगों का बार-बार प्रतिरोपण (ट्रांसप्लांट) किया जा सकता है. आने वाले समय में उम्र के साथ-साथ इंसान जवान होता जाएगा और शायद कभी बूढ़ा ही ना हो." इस पर उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन केवल मुस्कुराते नजर आए.
क्या सचमुच अमरता की ओर बढ़ रहा है विज्ञान?
शी जिनपिंग की एक और टिप्पणी ने इस चर्चा को और हवा दी. उन्होंने कहा कि कुछ भविष्यवाणियों के अनुसार, इस सदी में इंसानों का 150 साल तक जीवित रहना मुमकिन हो सकता है. इस बयान के बाद अटकलें लगाई जाने लगीं कि क्या ये नेता वास्तव में लंबा जीवन जीने की योजना बना रहे हैं? क्या वो अमर होना चाहते हैं?
पुतिन का स्पष्टीकरण
बढ़ती चर्चाओं के बीच, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से एक प्रतिक्रिया सामने आई. उन्होंने साफ किया कि मेडिकल साइंस चाहे जितनी भी तरक्की कर ले, केवल अंग प्रतिरोपण के सहारे बुढ़ापे को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता. उन्होंने कहा कि मेडिकल प्रगति से भविष्य बेहतर ज़रूर हो सकता है, लेकिन यह मान लेना कि सिर्फ ट्रांसप्लांट से इंसान अमर हो जाएगा, सही नहीं होगा.
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही विज्ञान ने अंगों के ट्रांसप्लांट और उम्र बढ़ाने वाले इलाजों में प्रगति की हो, परन्तु उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को पूरी तरह रोकना अब भी संभव नहीं है. दीर्घायु होना और अमर होना – दोनों में बड़ा अंतर है.
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