ईरान की सड़कों पर कब्जा, सरकारी टीवी की बिल्डिंग में आग... खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शनकारियों का विद्रोह

    ईरान इस समय हाल के वर्षों के सबसे बड़े और उग्र विरोध प्रदर्शनों का सामना कर रहा है.

    Protestors revolt against Khamenei in Iran occupy the streets
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    तेहरान: ईरान इस समय हाल के वर्षों के सबसे बड़े और उग्र विरोध प्रदर्शनों का सामना कर रहा है. सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाले इस्लामिक शासन के खिलाफ देशभर में भड़के ये प्रदर्शन गुरुवार रात हिंसक हो गए. निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी की अपील के बाद हजारों लोग राजधानी तेहरान समेत कई बड़े शहरों की सड़कों पर उतर आए.

    प्रदर्शनकारियों ने “आजादी-आजादी” और “खामेनेई मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए. कुछ ही घंटों में हालात बेकाबू हो गए और अलग-अलग इलाकों से आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा की खबरें सामने आने लगीं.

    सरकारी संपत्तियों को बनाया गया निशाना

    प्रदर्शन के दौरान गुस्साई भीड़ ने सरकारी इमारतों को निशाना बनाना शुरू कर दिया. मध्य ईरान के इस्फहान शहर में सरकारी टीवी नेटवर्क इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्ट (IRIB) की एक इमारत में आग लगा दी गई.

    इसी दौरान दक्षिणी ईरान की रणनीतिक रूप से अहम पोर्ट सिटी बंदर अब्बास में भी बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर जमा हो गए. वहां सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी रही.

    हालात बिगड़ने पर देशभर में इंटरनेट शटडाउन

    प्रदर्शनों के तेज होते ही राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की सरकार ने सख्त कदम उठाए. गुरुवार आधी रात से पूरे देश में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं. इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल्स पर भी रोक लगा दी गई.

    सरकार का यह कदम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि भारी सुरक्षा तैनाती के बावजूद इस्लामिक शासन को हालात हाथ से निकलने का डर सता रहा है. इंटरनेट बंद होने से प्रदर्शनकारियों के बीच संपर्क और बाहरी दुनिया तक सूचनाओं का प्रवाह काफी सीमित हो गया है.

    महंगाई से शुरू हुआ आंदोलन

    इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत पिछले साल 28 दिसंबर को हुई थी. शुरुआती वजह बढ़ती महंगाई, गिरती करेंसी और गहराता आर्थिक संकट था, जिसने आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया.

    हालांकि, समय के साथ यह आंदोलन आर्थिक मुद्दों से निकलकर पूरी तरह राजनीतिक रूप ले चुका है. अब प्रदर्शनकारी खुलेआम सत्ता परिवर्तन की मांग कर रहे हैं. कई जगहों पर खामेनेई के शासन को खत्म कर राजशाही की वापसी की मांग भी सुनाई दी. कुछ शहरों में निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के पोस्टर भी देखे गए हैं.

    100 से ज्यादा शहरों में फैला विरोध

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के 100 से अधिक छोटे-बड़े शहरों में विरोध प्रदर्शनों की खबरें सामने आई हैं. ये प्रदर्शन केवल शहरी इलाकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग जातीय समूहों, सामाजिक वर्गों और प्रांतों तक फैल चुके हैं.

    मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि प्रदर्शन की यह लहर ईरान के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर रही है.

    सुरक्षाबलों पर हिंसा के गंभीर आरोप

    मानवाधिकार समूहों ने ईरानी सुरक्षाबलों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग करने के आरोप लगाए हैं. नॉर्वे स्थित एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) के अनुसार, गुरुवार रात की हिंसा से पहले ही सुरक्षाबलों की गोलीबारी में 45 लोगों की मौत हो चुकी थी, जिनमें 8 नाबालिग शामिल हैं.

    इसके अलावा, अब तक 2000 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है. अधिकार समूहों का कहना है कि वास्तविक आंकड़े इससे कहीं अधिक हो सकते हैं, क्योंकि मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक और इंटरनेट शटडाउन के कारण जानकारी सामने नहीं आ पा रही है.

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