विकसित भारत युवा नेता संवाद के उद्घाटन मंच से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोवल ने देश के युवाओं को इतिहास, आत्मबल और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने वाला तीखा और भावनात्मक संदेश दिया. उन्होंने कहा कि आज जो भारत आत्मविश्वास से खड़ा दिखता है, वह हमेशा ऐसा नहीं था. इस मुकाम तक पहुंचने के लिए देश ने सदियों तक अपमान, अत्याचार और असहायता झेली है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता.
अजित डोवल ने कहा कि स्वतंत्रता कोई सहज उपलब्धि नहीं थी. हमारे पूर्वजों ने इसकी भारी कीमत चुकाई. उन्होंने बताया कि इतिहास गवाह है कि किस तरह लोगों को फांसी दी गई, गांव जलाए गए, हमारी सभ्यता को मिटाने के प्रयास हुए और मंदिरों को लूटा गया. उस दौर में समाज कई बार बेबस होकर सब कुछ घटते हुए देखता रहा. डोवल के मुताबिक, यह अतीत सिर्फ याद करने के लिए नहीं, बल्कि उससे सबक लेने के लिए है.
हर युवा में होनी चाहिए परिवर्तन की चिंगारी
NSA डोवल ने युवाओं से आह्वान किया कि उनके भीतर बदलाव की तीव्र इच्छा होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि “प्रतिशोध” भले ही आदर्श शब्द न हो, लेकिन यह एक शक्तिशाली प्रेरक ताकत है. इतिहास की गलतियों से सीख लेकर भारत को फिर उसी ऊंचाई तक ले जाना होगा, जहां देश अपने अधिकारों, विचारों और मूल्यों के आधार पर एक महान राष्ट्र के रूप में स्थापित हो सके.
#WATCH | Delhi: Speaking at the opening ceremony of Viksit Bharat Young Leaders Dialogue, NSA Ajit Doval says, "...This independent India wasn't always as free as it appears now. Our ancestors made great sacrifices for it. They endured great humiliation and experienced periods of… pic.twitter.com/1RGfOwZwqy
— ANI (@ANI) January 10, 2026
इतिहास से सीखना ही सबसे बड़ा दायित्व
डोवल ने भारतीय सभ्यता की परिपक्वता पर जोर देते हुए कहा कि जब दुनिया के कई हिस्से पिछड़ेपन में थे, तब भारत ने न तो दूसरों के धार्मिक स्थलों को नष्ट किया और न ही लूटपाट के इरादे से किसी पर हमला किया. लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हम कई बार अपनी सुरक्षा और संभावित खतरों को पहचानने में चूक गए. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हमने इतिहास से मिली चेतावनियों को सच में अपनाया है? अगर आने वाली पीढ़ियां इन सबकों को भूल जाती हैं, तो यह देश के लिए सबसे बड़ा नुकसान होगा.
इच्छाशक्ति से बनती है राष्ट्रीय ताकत
युद्ध और शक्ति के संदर्भ में बोलते हुए डोवल ने कहा कि किसी भी देश की असली ताकत उसकी इच्छाशक्ति होती है. यही इच्छाशक्ति आगे चलकर राष्ट्रीय शक्ति का रूप लेती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि युद्ध किसी विकृति या हिंसा के आनंद के लिए नहीं लड़े जाते. जंग का उद्देश्य दुश्मन का मनोबल तोड़ना होता है, ताकि वह हमारी शर्तों को स्वीकार करे और राष्ट्र अपने लक्ष्य हासिल कर सके.
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