भारत में वायु प्रदूषण अब केवल मौसमी समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह एक स्थायी और संरचनात्मक संकट का रूप ले चुका है. हालिया विश्लेषण से सामने आया है कि देश के लगभग 44 प्रतिशत शहर लंबे समय से खतरनाक स्तर के वायु प्रदूषण का सामना कर रहे हैं. यह जानकारी ऊर्जा एवं स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (CREA) की ताजा रिपोर्ट में सामने आई है.
रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रदूषण किसी एक-दो अस्थायी कारणों का नतीजा नहीं है, बल्कि उद्योग, परिवहन, निर्माण गतिविधियों और अन्य उत्सर्जन स्रोतों से लगातार निकलने वाले प्रदूषकों की वजह से बना हुआ संकट है.
4,041 शहरों के सैटेलाइट डेटा का विश्लेषण
CREA ने सैटेलाइट आधारित आंकड़ों की मदद से भारत के 4,041 शहरों में PM2.5 कणों के स्तर का अध्ययन किया. रिपोर्ट में बताया गया कि इन शहरों में से 1,787 शहरों में पिछले पांच वर्षों (2019, 2021, 2022, 2023 और 2024) के दौरान हर साल PM2.5 का स्तर राष्ट्रीय वार्षिक मानक से ऊपर रहा.
इस विश्लेषण में कोविड-19 से प्रभावित वर्ष 2020 को शामिल नहीं किया गया.
इसका सीधा अर्थ यह है कि देश के करीब 44 फीसदी शहर लगातार जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं, जो प्रदूषण की गंभीरता को दर्शाता है.
2025 में सबसे प्रदूषित शहर कौन से?
रिपोर्ट में वर्ष 2025 के लिए PM2.5 कणों के औसत स्तर के आधार पर भारत के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची भी जारी की गई है. इसमें चौंकाने वाला तथ्य यह है कि दिल्ली पहले स्थान पर नहीं है.
PM2.5 के आधार पर भारत के शीर्ष तीन सबसे प्रदूषित शहर हैं:
राष्ट्रीय मानकों की तुलना में ये आंकड़े कई गुना अधिक हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक माने जाते हैं.
नोएडा, गुरुग्राम और ग्रेटर नोएडा किस स्थान पर?
रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में एनसीआर के कई शहर टॉप-10 में शामिल हैं:
यह साफ दर्शाता है कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र वायु प्रदूषण के सबसे गंभीर हॉटस्पॉट्स में से एक बना हुआ है.
NCAP के दायरे से बाहर अधिकांश प्रदूषित शहर
रिपोर्ट में एक और गंभीर पहलू सामने आया है. लंबे समय से प्रदूषण झेल रहे 1,787 शहरों में से सिर्फ चार प्रतिशत ही राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के अंतर्गत आते हैं.
वर्तमान में NCAP के तहत केवल 130 शहरों को शामिल किया गया है, जबकि इनमें से भी सिर्फ 67 शहर ऐसे हैं जो लगातार कई वर्षों से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा तय किए गए राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) को पूरा करने में विफल रहे हैं.
400 से ज्यादा शहर नियमों पर खरे नहीं
रिपोर्ट के अनुसार, NAAQS मानकों का लगातार उल्लंघन करने वाले शहरों में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है. राज्यवार स्थिति इस प्रकार है:
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि प्रदूषण की समस्या केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि छोटे और मझोले शहर भी गंभीर संकट में हैं.
PM10 के मोर्चे पर भी हालात चिंताजनक
रिपोर्ट में PM10 कणों की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा की गई है. NCAP के तहत शामिल 130 शहरों में से 28 शहरों में अभी तक निरंतर वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (CAAQMS) ही उपलब्ध नहीं हैं.
वहीं, जिन 102 शहरों में CAAQMS मौजूद हैं, उनमें से 100 शहरों में PM10 का स्तर 80 प्रतिशत या उससे अधिक दर्ज किया गया है.
PM10 नियंत्रण के प्रयासों का हाल इस प्रकार है:
PM10 प्रदूषण में दिल्ली सबसे ऊपर
PM10 कणों के मामले में दिल्ली देश में सबसे प्रदूषित शहर बना हुआ है.
दिल्ली में PM10 का स्तर राष्ट्रीय मानक से लगभग तीन गुना अधिक है.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि PM10 सांद्रता के आधार पर शीर्ष 50 शहरों में:
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