पटना: बिहार में नई सरकार के गठन की उलटी गिनती शुरू हो गई है और बिहार चुनाव के नतीजों के बाद अब बीजेपी और एनडीए गठबंधन सरकार बनाने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहे हैं. शनिवार को बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और सह-प्रभारी विनोद तावड़े ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की, जिसमें चुनावी नतीजों की समीक्षा और सरकार गठन की रूपरेखा पर अहम चर्चा हुई. सूत्रों के मुताबिक, 22 नवंबर से पहले शपथ ग्रहण की स्क्रिप्ट तैयार की जा रही है.
सीएम नीतीश कुमार का इस्तीफा और सरकार गठन की प्रक्रिया
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार को राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं, जिसके बाद नई सरकार बनाने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए शपथ ग्रहण समारोह की तारीख तय की जाएगी. इस बीच, पटना में प्रशासनिक हलचल तेज़ हो गई है और बीजेपी तथा जेडीयू ने अपने विधायकों को राजधानी में तुरंत पहुंचने का निर्देश दिया है.
एनडीए के विधायक दल की बैठक की तैयारी
आगामी सप्ताह में बिहार की राजनीति का कैलेंडर लगभग तय हो चुका है. जेडीयू, बीजेपी, हम और आरएलएम के विधायक दल की अलग-अलग बैठकें होंगी, जिनमें नेता चयन और नए राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा होगी. इन बैठकों के बाद मुख्यमंत्री आवास में एनडीए विधायक दल की संयुक्त बैठक होगी, जिसमें औपचारिक रूप से नीतीश कुमार को नेता चुना जाएगा. बीजेपी और जेडीयू के बीच इस बार का तालमेल सहज दिखाई दे रहा है, जिसका श्रेय चुनाव से पहले की माइक्रो-मैनेजमेंट और तुरंत हुई हाई-लेवल चर्चाओं को दिया जा रहा है.
मंत्रिमंडल के आकार और विभागों के बंटवारे पर चर्चा
धर्मेंद्र प्रधान और विनोद तावड़े की अमित शाह से मुलाकात को भी इस रणनीतिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में मंत्रिमंडल के संभावित आकार, विभागों के बंटवारे और शासन की प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई. बिहार में भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व चाहती है कि नई सरकार पहले 100 दिनों में प्रशासनिक तौर पर सख्त कदम उठाए, विशेषकर कानून-व्यवस्था, महिलाओं के लिए योजनाओं का विस्तार और रोजगार के मॉडल पर ध्यान केंद्रित करते हुए. विश्लेषकों के अनुसार, नीतीश कुमार की ताजपोशी सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि बीजेपी और जेडीयू के बीच नए भरोसे की शुरुआत मानी जा रही है.
नीतीश कुमार की वापसी और नया राजनीतिक समीकरण
नीतीश कुमार की दोबारा मुख्यमंत्री के रूप में ताजपोशी एक नई राजनीतिक शुरुआत का संकेत है. जहां एक ओर बिहार में बीजेपी और जेडीयू के बीच का तालमेल साफ दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर नए मंत्रिमंडल की संरचना, राज्य में विकास और प्रशासन के मॉडल पर भी बड़ी चर्चा हो रही है. बीजेपी और जेडीयू के इस मजबूत गठबंधन के बाद राज्य में विकास के नए रास्ते खुलने की उम्मीद जताई जा रही है.
ये भी पढ़ें: जातिवाद के जहर को चुनाव में नकार दिया... सूरत में बोले पीएम मोदी, कहा- दुनिया को राजनीति समझाता है बिहार