यूपी में पंचायत चुनाव की तैयारियां शुरू, जानें क्या-क्या काम करते हैं जिला पंचायत सदस्य; इतनी मिलती है सैलरी

UP Panchayat Election: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के रुख के बाद पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने दावा किया है कि राज्य सरकार 12 जुलाई तक पंचायत चुनाव करवा लेगी.

Preparations for Panchayat elections begin in UP the work done by District Panchayat members their salaries
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UP Panchayat Election: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के रुख के बाद पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने दावा किया है कि राज्य सरकार 12 जुलाई तक पंचायत चुनाव करवा लेगी. उनका यह भी कहना है कि सरकार 25 मार्च को हाईकोर्ट में जवाब दाखिल कर देगी और अप्रैल तक मतदाता सूची का प्रकाशन कर दिया जाएगा.

इसके साथ ही, 24 मार्च को होने वाली कैबिनेट बैठक में पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन पर भी मुहर लगने की संभावना है. यह आयोग लगभग चार हफ्तों में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, जिसके आधार पर रोटेशनल आरक्षण तय किया जाएगा.

पंचायत चुनाव की संरचना

पंचायत चुनाव में तीन स्तर होते हैं: ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य और अध्यक्ष. हर पद का अपना अलग कार्य होता है. आइए, जानते हैं कि एक जिला पंचायत सदस्य के क्या काम होते हैं और उनकी सैलरी कितनी होती है.

जिला पंचायत सदस्य के मुख्य कार्य

उत्तर प्रदेश में चुने गए जिला पंचायत सदस्य अपने इलाके के विकास कार्यों पर ध्यान देते हैं. वे सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं को लागू कर सकते हैं. इसके अलावा, वे हर साल 5 लाख रुपये तक के प्रस्ताव दे सकते हैं ताकि विकास कार्यों के लिए फंड मिल सके. जिला पंचायत सदस्य स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और पेयजल सुविधाओं की व्यवस्था भी करते हैं. वे जिला पंचायत की बैठकों में हिस्सा लेते हैं और फंड की मंजूरी दिलवाने में मदद करते हैं. 

पीएम आवास योजना, कृषि और सिंचाई योजनाओं में लोगों की मदद करना भी उनके कार्यक्षेत्र में आता है. इसके साथ ही, जिला पंचायत सदस्य पिछड़े और अनुसूचित जाति/जनजाति वर्गों के लिए सरकारी योजनाओं को लागू करने का काम भी करते हैं. वे गांवों के बीच रास्ते जोड़ने और सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने में भी मदद करते हैं.

जिला पंचायत सदस्य की सैलरी

जिला पंचायत सदस्य का कार्यकाल पांच साल का होता है. हालांकि, उनकी कोई निश्चित सैलरी नहीं होती, बल्कि उन्हें मानदेय मिलता है. वे साल में अधिकतम छह बैठकों में हिस्सा ले सकते हैं, और प्रति बैठक उन्हें 1500 रुपये का मानदेय मिलता है. इस तरह, साल भर में उन्हें 9,000 रुपये का मानदेय मिल सकता है.

2021 से पहले था कम मानदेय

2021 से पहले, जिला पंचायत सदस्यों को प्रति बैठक 1000 रुपये का मानदेय मिलता था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे बढ़ाकर 1500 रुपये किया. इसके साथ ही, ग्राम प्रधानों का मानदेय 3500 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये प्रतिमाह, क्षेत्र पंचायत प्रमुख का मानदेय 9800 रुपये से बढ़ाकर 11,300 रुपये प्रतिमाह और जिला पंचायत अध्यक्ष का मानदेय 14,000 रुपये से बढ़ाकर 15,500 रुपये प्रतिमाह किया गया.

क्षेत्र पंचायत सदस्य का मानदेय

उत्तर प्रदेश सरकार ने क्षेत्र पंचायत सदस्य के मानदेय को 500 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये प्रति बैठक किया था. यह मानदेय साल में अधिकतम छह बैठकों के लिए मान्य होगा. इस तरह, पंचायत चुनाव की तैयारी में तेजी आ चुकी है और सरकार ने चुनाव के आयोजन के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं.

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