अरे बाप रे! UPSC एस्पिरेंट ने इंजेक्शन लगाकर खुद काट लिया अपना प्राइवेट पार्ट, वजह जान हिल जाएगा दिमाग

Prayagraj News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक दिल दहला देने वाली खबर आई है, जहां एक UPSC की तैयारी कर रहा युवक मानसिक संघर्ष में आकर अपनी शारीरिक पहचान को बदलने के लिए खुद पर अत्यंत क्रूर कदम उठा बैठा.

Prayagraj UPSC aspirant injected anesthesia himself and cut his Private Part
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Prayagraj News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक दिल दहला देने वाली खबर आई है, जहां एक UPSC की तैयारी कर रहा युवक मानसिक संघर्ष में आकर अपनी शारीरिक पहचान को बदलने के लिए खुद पर अत्यंत क्रूर कदम उठा बैठा. उसने लड़की बनने की इच्छा को पूरा करने के लिए अपने प्राइवेट पार्ट को खुद ही काट दिया. इस घटना ने समाज में जेंडर डिस्फोरिया और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को फिर से उजागर कर दिया है.

बचपन से भीतर झेलता रहा पहचान का संघर्ष

अमेठी का रहने वाला यह युवक बचपन से ही महसूस करता था कि उसका जेंडर उसके शरीर से मेल नहीं खाता. 14 वर्ष की उम्र से ही वह खुद को लड़की समझता था, लेकिन परिवार में अकेला लड़का होने के कारण अपने इस दर्द को जाहिर नहीं कर पाया. कुछ समय अपनी मौसी के घर बिताने के बाद, वह पढ़ाई के लिए प्रयागराज आ गया और यहाँ अकेले किराए के कमरे में रहने लगा.

अकेले कमरे में खुद किया खौफनाक प्रयास

युवक ने इंटरनेट से जेंडर चेंज संबंधी जानकारियां जुटाईं और कटरा के एक झोलाछाप डॉक्टर से संपर्क किया. डॉक्टर की सलाह पर उसने मेडिकल स्टोर से एनेस्थेसिया का इंजेक्शन और सर्जिकल ब्लेड खरीदा. इसके बाद अकेले ही अपने कमरे में वह बेहद दर्दनाक कदम उठा बैठा. इंजेक्शन के असर के खत्म होते ही वह बेतहाशा दर्द में तड़पने लगा, लेकिन किसी को बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाया.

दर्द से कराहता रहा युवक

करीब एक घंटे तक दर्द सहने के बाद युवक ने अंततः मकान मालिक को आवाज लगाई. मकान मालिक ने तुरंत एंबुलेंस बुलाकर युवक को तेज बहादुर सप्रू बेली अस्पताल पहुंचाया. गंभीर हालत देख उसे स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल रेफर किया गया है, जहां उसका इलाज जारी है.

जेंडर डिस्फोरिया: एक मानसिक चुनौती

एसआरएन अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन संतोष सिंह ने बताया कि युवक जेंडर आईडेंटिटी डिसऑर्डर यानी जेंडर डिस्फोरिया से पीड़ित है, जिसमें व्यक्ति को अपनी जन्मजात शारीरिक पहचान से असहजता होती है और वह अपनी जेंडर पहचान को बदलना चाहता है. डॉक्टरों ने कहा कि अगर युवक को समय पर अस्पताल नहीं लाया गया होता तो जान को खतरा हो सकता था.

परिवार का दर्द और भविष्य की राह

युवक की मां भी बेटे की हालत देखकर बेहद आहत हैं और अस्पताल में उसके साथ हैं. डॉक्टरों की सलाह के अनुसार युवक को मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की काउंसिलिंग दी जाएगी. हार्मोन उपचार और चिकित्सकीय निगरानी के बाद ही जेंडर परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

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