कई इश्यू के बाद भी भारत अखंड... प्रयागराज में बोले CJI गवई, पाकिस्तान-बांग्लादेश को लेकर कही ये बात

भारत के मुख्य न्यायधीश (CJI) बीआर गवई शनिवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण सेमिनार में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय में नवनिर्मित इमारतों का उद्घाटन भी किया.

Prayagraj CJI br Gavai said India remains united despite many issues
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प्रयागराज: भारत के मुख्य न्यायधीश (CJI) बीआर गवई शनिवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण सेमिनार में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय में नवनिर्मित इमारतों का उद्घाटन भी किया. इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इस समागम में सीजेआई ने न सिर्फ शिक्षात्मक पहलुओं पर विचार किए, बल्कि शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को भी सराहा.

नवनिर्मित इमारतों का उद्घाटन

सीजेआई ने सेमिनार से पहले इलाहाबाद विश्वविद्यालय के साइंस फैकल्टी में तीन नवनिर्मित बिल्डिंग्स का उद्घाटन किया. इनमें न्यू केमिस्ट्री बिल्डिंग, लेक्चर थियेटर कांप्लेक्स और न्यू लाइब्रेरी बिल्डिंग शामिल हैं. इन निर्माणों के जरिए विश्वविद्यालय के शिक्षा और अनुसंधान में और सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है. 

"भारत संविधान के कारण मूलभूत अधिकारों की रक्षा कर रहा"

इस मौके पर सीजेआई बीआर गवई ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यदि भारत अपनी स्वतंत्रता के बाद सुदृढ़ है तो इसका श्रेय उस संविधान को जाता है, जिसके निर्माण में डा. भीमराव राम जी आंबेडकर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. वह सच्चे राष्ट्रवादी थे. बाबा साहेब ने देश की एकता, संविधान के माध्यम से सुनिश्चित की है. सीजेआई ने कहा कि पड़ोसी देशों को देख लीजिए. पाकिस्तान तो हमारे साथ ही स्वतंत्रता हुआ है. नेपाल,श्रीलंका व बांग्लादेश देखिए. बीते 75 वर्षों में भारत अपने संविधान के कारण ही हर किसी के मूलभूत अधिकारों की रक्षा करता आ रहा है.

पाक, श्रीलंका और बांग्लादेश में क्या हुआ...

उन्होंने कहा कि बाबा साहेब का मानना था कि न्यायपालिका स्वतंत्र होनी चाहिए. पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश में क्या हुआ सबने देखा. देश के बाहर और भीतर के कुछ इश्यूज के बावजूद भारत अखंड बना हुआ है, यह संविधान की ही देन है. उन्होंने कहा- पिछले 75 सालों में हमने देखा है कि कई ऐसे अधिकार, जिन्हें संविधान निर्माताओं ने शुरू में मौलिक अधिकार के रूप में नहीं सोचा, अब न्यायपालिका द्वारा मौलिक अधिकार के रूप में उन्हें मान्यता दी गई.

CJI ने कहा कि पहले सुप्रीम कोर्ट का मत था कि केवल भाग 3 में दिए गए अधिकार ही मौलिक हैं. लेकिन समय के साथ कानून का विकास हुआ और सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो भी अधिकार अनुच्छेद 14 और 21 की भावना से प्रवाहित होते हैं, वे भी मौलिक अधिकार माने जाएंगे. 75 सालों में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने कई अधिकारों को इसी आधार पर मौलिक अधिकार के रूप में स्थापित किया. जीवन का अधिकार केवल जीवित रहने का अधिकार नहीं है, बल्कि मानवीय गरिमा के साथ जीने का अधिकार है.

जीवन के अधिकार में आश्रय का, भोजन और वस्त्र का अधिकार शामिल है. प्रदूषण रहित पर्यावरण और स्वच्छता का अधिकार भी इसमें शामिल है. इसके अलावा उचित चिकित्सा सुविधा प्राप्त करने का अधिकार, जबरन श्रम से मुक्ति का अधिकार और इसी तरह के अन्य अधिकार भी इसमें निहित हैं. इसमें व्यक्ति की एकता और गरिमा पर विशेष बल दिया गया है.

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