लखनऊ: उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में गंगा एक्सप्रेस-वे एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की और स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य दिसंबर 2025 तक हर हाल में पूरा होना चाहिए. सीएम योगी ने कहा कि यह परियोजना केवल एक सड़क नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास की रीढ़ है.
साप्ताहिक समीक्षा और गुणवत्ता पर सख्त नजर
बैठक में सीएम योगी ने उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल एक्सप्रेस-वे डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) के अधिकारियों को निर्देश दिए कि गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण की साप्ताहिक समीक्षा की जाए. उन्होंने चेतावनी दी कि कार्य की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक्सप्रेस-वे पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सहज और तेज कनेक्टिविटी से जोड़ेगा, जिससे औद्योगिक निवेश और क्षेत्रीय संतुलन को नई गति मिलेगी.
भूमि आवंटन नीति पर पारदर्शिता और जवाबदेही
सीएम योगी ने बैठक में भूमि आवंटन नीति पर विशेष बल दिया. उन्होंने कहा कि जिन निवेशकों को भूमि आवंटित की गई है, यदि वे तीन वर्षों के भीतर उसका यथोचित उपयोग नहीं करते, तो वह आवंटन स्वतः निरस्त माना जाएगा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि उपयोग की निगरानी के लिए पारदर्शी प्रणाली विकसित की जाए और निवेशकों को दी जाने वाली सुविधाएं केवल वास्तविक प्रगति के आधार पर ही दी जाएं.
औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक पार्कों में निवेश को बढ़ावा
बैठक में यूपीडा ने जानकारी दी कि एक्सप्रेस-वे के किनारे विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक पार्कों में निवेश आकर्षित करने के लिए बिजली, जलापूर्ति, ट्रक टर्मिनल और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी सुविधाओं के विकास की समयबद्ध योजना तैयार की गई है. इस दौरान गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार के रूप में प्रस्तावित मेरठ-हरिद्वार लिंक, नोएडा-जेवर लिंक, चित्रकूट-रीवा लिंक, विंध्य एक्सप्रेसवे और विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे पर भी विस्तार से चर्चा हुई.
NHAI के नेटवर्क से तालमेल और एकीकृत सड़क तंत्र
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नई परियोजनाओं की योजना बनाते समय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के प्रस्तावित नेटवर्क का ध्यान रखा जाए. इसका उद्देश्य यह है कि दोहराव से बचा जाए और एक समग्र, एकीकृत सड़क तंत्र विकसित हो, जिससे यातायात व्यवस्था और औद्योगिक लॉजिस्टिक्स को मजबूत आधार मिले.
डिफेंस कॉरिडोर में स्किल डेवलपमेंट सेंटर की स्थापना
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़े नोड्स—लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट—में स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित किए जाएं. उनका उद्देश्य है कि स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर उन्हें रक्षा उद्योग से जोड़ा जाए, जिससे रोजगार सृजन और क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता को बल मिल सके.
30,000 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव और तेज़ प्रगति
बैठक में जानकारी दी गई कि डिफेंस कॉरिडोर परियोजना के तहत अब तक लगभग 30,819 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. कुल 5039 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है, और कई कंपनियां अपना काम भी शुरू कर चुकी हैं. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना की गति को और तेज किया जाए, ताकि उत्तर प्रदेश औद्योगिक और रक्षा निर्माण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन सके.
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