प्रवीर रंजन ने संभाला सीआईएसएफ के महानिदेशक पद का कार्यभार, राजविंदर सिंह भट्टी हुए रिटायर

भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के वरिष्ठ अधिकारी प्रवीर रंजन ने मंगलवार को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के महानिदेशक का पदभार ग्रहण कर लिया. वर्ष 1993 बैच के अधिकारी प्रवीर रंजन इससे पहले भी सीआईएसएफ में कई प्रमुख भूमिकाएं निभा चुके हैं और अप्रैल 2024 से वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं.

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भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के वरिष्ठ अधिकारी प्रवीर रंजन ने मंगलवार को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के महानिदेशक का पदभार ग्रहण कर लिया. वर्ष 1993 बैच के अधिकारी प्रवीर रंजन इससे पहले भी सीआईएसएफ में कई प्रमुख भूमिकाएं निभा चुके हैं और अप्रैल 2024 से वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं.

संवेदनशील जिम्मेदारियों का लंबा अनुभव

महानिदेशक पद की नियुक्ति से पहले, रंजन विशेष महानिदेशक (एयरपोर्ट सिक्योरिटी) के रूप में सीआईएसएफ के एक अत्यंत संवेदनशील सेक्टर का नेतृत्व कर रहे थे. इससे पहले वे दिल्ली पुलिस में स्पेशल सीपी (क्राइम और इकोनॉमिक ऑफेंसेज विंग) जैसे महत्वपूर्ण पद पर रह चुके हैं. इसके अतिरिक्त उन्होंने CBI में डीआईजी, चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक, और सीआईएसएफ में एडीजी जैसे दायित्वों का भी सफलता से निर्वहन किया है.

शैक्षणिक पृष्ठभूमि में भी उत्कृष्टता

प्रवीर रंजन का शैक्षणिक जीवन भी उतना ही प्रभावशाली रहा है जितना कि उनका पुलिस सेवा में कार्यकाल. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर, उस्मानिया विश्वविद्यालय से पुलिस प्रबंधन में स्नातकोत्तर, सिंगापुर के नेशनल यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक मैनेजमेंट में उच्च अध्ययन किया है. इसके अलावा, उन्होंने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से एलएलएम की उपाधि भी प्राप्त की है.

32 वर्षों की सेवा में उल्लेखनीय योगदान

अपने तीन दशक से अधिक लंबे सेवा काल में प्रवीर रंजन ने पुलिसिंग और सुरक्षा के क्षेत्र में कई नवाचार किए हैं. चाहे वह अपराध नियंत्रण हो या विशेष आर्थिक अपराधों की जांच, हर क्षेत्र में उन्होंने अपना मजबूत प्रभाव छोड़ा है. उनकी कार्यशैली को व्यावसायिक कुशलता, तकनीकी दक्षता और प्रशासनिक समझ के लिए जाना जाता है.

टेक्नोलॉजी से पुलिसिंग को बनाया हाईटेक


आईपीए प्रवीर रंजन का एडमिनिस्ट्रेटिव और रिसर्च वर्क हमेशा सराहा गया है. उन्हें बेहद टेक्नोफ्रैंडली अधिकारी माना जाता है. उन्होंने दिल्ली दंगों की जांच, लाल किले पर सुरक्षा व्यवस्था और पुलिसिंग को टेक्‍नोलॉजी के जरिए हाईटेक बनाने की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया है. उनकी लीडरशिप में ई-बुक सिस्टम, इ-बिट और 112 कंट्रोल रूम जैसे कई रिफार्म्स हुए हुए हैं.

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